4 जनवरी को हर साल विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है। दुनियाभर में दृष्टिबाधितों के लिए ये दिन बहुत खास है। ब्रेल दिवस लुईस ब्रेल नाम के शख्स के जन्मदिन के मौके पर मनाया जाता है। लुईस ब्रेल एक आविष्कारक हैं, जिन्होंने ब्रेल लिपि का आविष्कार किया था। ब्रेल लिपि एक भाषा है, जिसका उपयोग आंखों से देख न पाने वाले लोग लिखने और पढ़ने के लिए करते हैं। जो लोग जन्मजात या किसी कारण वश अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं, उनके लिए समाज में अन्य लोगों के बराबर खड़े होने, उन्हें पढ़ाई से वंचित न होना पड़े और वह अपनी शारीरिक कमी के बाद भी आत्मनिर्भर बन सकें, इसके लिए ब्रेल लिपि का आविष्कार करके लुईस ब्रेल दुनियाभर के दृष्टिबाधितों के मसीहा बन गए। हालांकि जब वह जीवित थे, तब उनके काम को सम्मान नहीं मिला, लेकिन बाद में विश्व ब्रेल दिवस की शुरुआत उनके ही जन्मदिन पर करके लुईस ब्रेल को सम्मान दिया गया। चलिए जानते हैं ब्रेल लिपि के बारे में, कैसे हुआ इसका आविष्कार? लुईस ब्रेल कौन थे? विश्व ब्रेल दिवस की शुरुआत कब और कैसे हुई?
World Braille Day 2022: ब्रेल लिपि क्या है? जानिए कब और कैसे हुई विश्व ब्रेल दिवस की शुरुआत
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लुईस ब्रेल कौन थे?
फ्रांस के कुप्रे नाम के गांव में 4 जनवरी 1809 में लुई्स ब्रेल नाम के लड़के का जन्म हुआ था। लुईस के पिता का नाम साइमन रेले ब्रेल था, जो उन दिनों शाही घोड़ो के लिए काठी और जीन बनाने का काम करते थे। परिवार की आर्थिक हालत तंग होने के कारण लुईस को तीन साल की उम्र से ही पिता के साथ उनके काम में लगना पड़ा। इस दौरान एक हादसे में उनकी एक आंख पर चाकू घुस गया और उनका एक आंख खराब हो गई। बाद में उनकी दूसरी आंख की रोशनी भी जाने लगी। तंगी के कारण सही से इलाज भी न मिल सका और 8 साल की उम्र में लुईस ब्रेल को दिखाई देना बंद हो गया।
कैसे हुआ ब्रेल लिपि का आविष्कार?
बाद में लुईस ब्रेल ने नेत्रहीनों के स्कूल में दाखिला लिया। उनको सेना की एक ऐसी कूटलिपि के बारे में पता चला जो अंधेरे में भी संदेशों को पढ़ने में मदद करेगी। उनके दिमाग में नेत्रहीनों के लिए भी इस तरह की लिपि के बारे में विचार आया और उन्होंने ब्रेल लिपि का आविष्कार किया।
ब्रेल लिपि क्या है?
ब्रेल लिपि उन लोगों के लिए वरदान बन गई जो आंखों से देख नहीं सकते। ब्रेल लिपि नेत्रहीनों के पढ़ने और लिखने की एक स्पर्शनीय कोड है। इसमें विशेष प्रकार के उभरे कागज का इस्तेमाल होता है, जिस पर उभरे हुए बिंदुओं को छूकर पढ़ा जा सकता है। टाइपराइटर की तरह की ही एक मशीन 'ब्रेलराइटर' के माध्यम से ब्रेल लिपि को लिखा जा सकता है। इसके अलावा स्टायलस और ब्रेल स्लेट के जरिए भी लिख सकते हैं। ब्रेल में उभरे हुए बिंदुओं को 'सेल' कहा जाता है।
विश्व ब्रेल दिवस की शुरुआत कब हुई?
संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में करीब 39 मिलियन लोग देख नहीं सकते हैं। वहीं करीब 253 मिलियन लोगों में किसी न किसी तरह का कोई दृष्टि विकार है। इतनी बड़ी संख्या में दृष्टिबाधितों के होने पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 6 नवंबर 2018 को ये प्रस्ताव पास किया कि हर साल लुईस ब्रेल के जन्मदिन के मौके यानी 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाएगा।