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Archana Tiwari: अर्चना का नेपाल कनेक्शन, कौन था इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड? कैसे-कहां रचा था ये खतरनाक प्लान?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 20 Aug 2025 05:14 PM IST
सार
Archana Tiwari Case: अर्चना तिवारी ने शादी से बचने के लिए खुद के गायब होने की साजिश रची। दो दोस्तों की मदद से पहचान छिपाकर इटारसी स्टेशन से निकली और नेपाल तक पहुंची। पुलिस ने कॉल डिटेल से सुराग लगाकर उसे ढूंढ निकाला। पूरी योजना खुद अर्चना ने ही बनाई थी।
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अर्चना तिवारी 13 दिनों में कहां-कहां पहुंची
- फोटो : अमर उजाला
बीते 13 दिनों से मिस्ट्री बनी हुई अर्चना तिवारी अब सामने आ गई है। भोपाल रेल पुलिस ने अर्चना तिवारी को नेपाल के बॉर्डर जिले लखीमपुर खीरी से दस्तयाब कर लिया है। अर्चना तिवारी को रेलवे पुलिस भोपाल लेकर आई। इसके बाद उसके गायब होने, काठमांडू पहुंचने और फिर वापस भोपाल आने की पूरी कहानी सामने आ चुकी है। अपने गायब होने का प्लान अर्चना तिवारी ने खुद तैयार किया। पूरे घटनाक्रम की मास्टरमाइंड वो खुद थी। इसमें उसका साथ सारांश और तेजेंदर नाम को दो लड़कों ने दिया। ये लड़के अर्चना तिवारी को कहां मिले? वो इनके संपर्क में कैसी आई? इसका खुलासा भी पुलिस ने किया है। सिलसिलेवार पूरी घटना को यहां समझिए।
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इंदौर के युवक से प्यार करती है अर्चना।
- फोटो : अमर उजाला
पहचान छिपाने के लिए बदले कपड़े
रेल एसपी राहुल लोढ़ा ने बताया कि अर्चना तय तारीख 7 अगस्त को इंदौर से इंदौर बिलासपुर ट्रेन में बी 3 कोच में बैठी। इसके बाद उसने शुजालपुर में रहने वाले सारांश को फोन करके कपड़े लाने के लिए बोला। अर्चना के कहे अनुसार सारांश ने शुजालपुर से उसके लिए नए कपड़े खरीदे और वह नर्मदापुरम के लिए अपनी एसयूवी से निकल गया। इसके बाद सारांश ने नर्मदापुरम में कपड़े तेजेंदर को दिए, जो ट्रेन में बैठा हुआ था। तेजेंदर इटारसी रेलवे स्टेशन के पास रहता था। उसको ये पहले से पता था कि इटारसी रेलवे स्टेशन के पास सीसीटीवी कैमरे कहां कहां लगे हुए हैं। तेजेंदर ने कपड़े ट्रेन के अंदर अर्चना तिवारी को दिए। अर्चना ने इटारसी पहुंचने से पहले नए कपड़े पहन लिए, जिससे ट्रेन में बैठे लोग उसे पहचान ना सकें। जब तक ट्रेन नर्मदापुर से इटारसी तक पहुंची तब तक सारांश भी अपनी एसयूवी से इटारसी रेलवे स्टेशन तक पहुंच गया।
सीसीटीवी से बचकर निकली बाहर
पुलिस के अनुसार अर्चना कपड़े बदलने के बाद ट्रेन से बाहर निकली। वो ए 2 कोच से बाहर निकली जबकि वो बी 3 कोच में बैठी हुई थी। उसका रिजर्वेशन बी 3 कोच में था। बाहर निकलने के बाद अर्चना तेजेंदर को मिली। उसने रेलवे स्टेशन के आउटर से अर्चना को बाहर निकाला। दोनों ने ऐसा रास्ता चुना जहां पर कहीं भी सीसीटीवी नहीं लगा हुआ था। स्टेशन से बाहर निकलने के बाद वे दोनों सारांश को मिले। सारांश एसयूवी के साथ इटारसी स्टेशन के बाहर इन दोनों का इंतजार कर रहा था। इसके बाद अर्चना अपनी घड़ी और मोबाइल तेजेंदर को दे दिए और कहा कि दोनों चीजें मिडघाट क्षेत्र में यानी इटारसी और बाघ तवा के बीच फेंक देना, जिससे ये शक हो कि लड़की ट्रेन से गिरी है। पुलिस के अनुसार इस बात की भी प्लानिंग थी कि लड़की के गिरने की एफआईआर कुछ लड़कों से लिखवा दी जाएगी।
ये सब करने के बाद अर्चना सारांश के साथ शुजालपुर आने के लिए एसयूवी में बैठकर निकल गई। सारांश अपने साथ एक लड़के को भी लेकर आया था जो उसकी रास्ते भर मदद करते आया। इन लोगों ने शुजालपुर आने के लिए ऐसे रास्तों का पकड़ा जहां पर ना तो टोल था ना ही कोई सीसीटीवी कैमरा लगे हुए थे।
ये भी पढ़ें- क्या अर्चना ही सारांश की सपना? पिता बोले- बेटे ने बताई थी प्रेम संबंध की बात, अब उसे जीआरपी वाले उठाकर ले गए
रेल एसपी राहुल लोढ़ा ने बताया कि अर्चना तय तारीख 7 अगस्त को इंदौर से इंदौर बिलासपुर ट्रेन में बी 3 कोच में बैठी। इसके बाद उसने शुजालपुर में रहने वाले सारांश को फोन करके कपड़े लाने के लिए बोला। अर्चना के कहे अनुसार सारांश ने शुजालपुर से उसके लिए नए कपड़े खरीदे और वह नर्मदापुरम के लिए अपनी एसयूवी से निकल गया। इसके बाद सारांश ने नर्मदापुरम में कपड़े तेजेंदर को दिए, जो ट्रेन में बैठा हुआ था। तेजेंदर इटारसी रेलवे स्टेशन के पास रहता था। उसको ये पहले से पता था कि इटारसी रेलवे स्टेशन के पास सीसीटीवी कैमरे कहां कहां लगे हुए हैं। तेजेंदर ने कपड़े ट्रेन के अंदर अर्चना तिवारी को दिए। अर्चना ने इटारसी पहुंचने से पहले नए कपड़े पहन लिए, जिससे ट्रेन में बैठे लोग उसे पहचान ना सकें। जब तक ट्रेन नर्मदापुर से इटारसी तक पहुंची तब तक सारांश भी अपनी एसयूवी से इटारसी रेलवे स्टेशन तक पहुंच गया।
सीसीटीवी से बचकर निकली बाहर
पुलिस के अनुसार अर्चना कपड़े बदलने के बाद ट्रेन से बाहर निकली। वो ए 2 कोच से बाहर निकली जबकि वो बी 3 कोच में बैठी हुई थी। उसका रिजर्वेशन बी 3 कोच में था। बाहर निकलने के बाद अर्चना तेजेंदर को मिली। उसने रेलवे स्टेशन के आउटर से अर्चना को बाहर निकाला। दोनों ने ऐसा रास्ता चुना जहां पर कहीं भी सीसीटीवी नहीं लगा हुआ था। स्टेशन से बाहर निकलने के बाद वे दोनों सारांश को मिले। सारांश एसयूवी के साथ इटारसी स्टेशन के बाहर इन दोनों का इंतजार कर रहा था। इसके बाद अर्चना अपनी घड़ी और मोबाइल तेजेंदर को दे दिए और कहा कि दोनों चीजें मिडघाट क्षेत्र में यानी इटारसी और बाघ तवा के बीच फेंक देना, जिससे ये शक हो कि लड़की ट्रेन से गिरी है। पुलिस के अनुसार इस बात की भी प्लानिंग थी कि लड़की के गिरने की एफआईआर कुछ लड़कों से लिखवा दी जाएगी।
ये सब करने के बाद अर्चना सारांश के साथ शुजालपुर आने के लिए एसयूवी में बैठकर निकल गई। सारांश अपने साथ एक लड़के को भी लेकर आया था जो उसकी रास्ते भर मदद करते आया। इन लोगों ने शुजालपुर आने के लिए ऐसे रास्तों का पकड़ा जहां पर ना तो टोल था ना ही कोई सीसीटीवी कैमरा लगे हुए थे।
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अर्चना तिवारी ट्रेन से लापता हो गई थी।
- फोटो : अमर उजाला
शुजालपुर से खरीदा मोबाइल
शुजालपुर पहुंचने के बाद सारांश ने अपने पिताजी के नाम पर एक सिम और फोन एक मॉल से खरीदा, जबकि अपना सिम एक फोन में लगाकर उसे एयरोप्लेन मोड पर इंदौर में रख दिया। उसने पिताजी के नाम पर लिए सिम का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
शुजालपुर से हैदराबाद रवाना
इस बीच अर्चना के गायब होने की खबर मीडिया के जरिए पूरे देश में फैल गई। इससे अर्चना और सारांश ने नया प्लान बनाया। पुलिस के अनुसार वे दोनों ऐसी जगह जाना चाहते थे जहां पर हिंदी ना बोली जाती हो। इस विचार से वे लोग हैदराबाद के लिए रवाना हुए। वे बुरहानपुर पहुंचे। इसके बाद वहां से बस से हैदराबाद गए। हैदराबाद में दो दिन रहने के बाद उन्होंने नई जगह जाने के बारे में विचार करने लगे।
मामला सुर्खियों में आया तो बदला प्लान
पुलिस के अनुसार जब मामला मीडिया में सुर्खियां बटोरने लगा तो अर्चना और हिमांशु ने अपनी लोकेशन बदलने के बारे में सोचा। वे हैदराबाद से जोधपुर पहुंचे। इसके बाद दिल्ली होते हुए काठमांडू बाय रोड गए। रेल एसपी राहुल लोढ़ा ने बताया कि नेपाल में एंट्री के समय सारांश और अर्चना तिवारी साथ में थे। नेपाल में एंट्री के लिए सारांश के आधार कार्ड को सीमा पर दिखाया गया। अर्चना का आधार कार्ड सपना के नाम से था, जो उस समय उसके पास था। सपना नाम अर्चना तिवारी का घर का नाम था। पुलिस सारांश अर्चना को नेपाल में छोड़कर वापस अपने घर शुजालपुर आ गया।
ये भी पढ़ें- Archana Tiwari: अर्चना को किसी से प्यार; घरवाले बना रहे थे शादी का दबाव, पुलिस से छिपाया ये सच; खुले बड़े राज
शुजालपुर पहुंचने के बाद सारांश ने अपने पिताजी के नाम पर एक सिम और फोन एक मॉल से खरीदा, जबकि अपना सिम एक फोन में लगाकर उसे एयरोप्लेन मोड पर इंदौर में रख दिया। उसने पिताजी के नाम पर लिए सिम का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
शुजालपुर से हैदराबाद रवाना
इस बीच अर्चना के गायब होने की खबर मीडिया के जरिए पूरे देश में फैल गई। इससे अर्चना और सारांश ने नया प्लान बनाया। पुलिस के अनुसार वे दोनों ऐसी जगह जाना चाहते थे जहां पर हिंदी ना बोली जाती हो। इस विचार से वे लोग हैदराबाद के लिए रवाना हुए। वे बुरहानपुर पहुंचे। इसके बाद वहां से बस से हैदराबाद गए। हैदराबाद में दो दिन रहने के बाद उन्होंने नई जगह जाने के बारे में विचार करने लगे।
मामला सुर्खियों में आया तो बदला प्लान
पुलिस के अनुसार जब मामला मीडिया में सुर्खियां बटोरने लगा तो अर्चना और हिमांशु ने अपनी लोकेशन बदलने के बारे में सोचा। वे हैदराबाद से जोधपुर पहुंचे। इसके बाद दिल्ली होते हुए काठमांडू बाय रोड गए। रेल एसपी राहुल लोढ़ा ने बताया कि नेपाल में एंट्री के समय सारांश और अर्चना तिवारी साथ में थे। नेपाल में एंट्री के लिए सारांश के आधार कार्ड को सीमा पर दिखाया गया। अर्चना का आधार कार्ड सपना के नाम से था, जो उस समय उसके पास था। सपना नाम अर्चना तिवारी का घर का नाम था। पुलिस सारांश अर्चना को नेपाल में छोड़कर वापस अपने घर शुजालपुर आ गया।
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अर्चना तिवारी (सपना) और सारांश के बीच प्रेस-प्रसंग की बात आई सामने।
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस सारांश के जरिए पहुंची अर्चना तक
पुलिस ने बताया कि पूरे मिडघाट की तलाशी के बाद जब ये बाद कंफर्म हो गई है कि अर्चना की मौत नहीं हुई है तो जांच के दायरे को बढ़ाया गया। छह महीने की कॉल डिटेल अर्चना तिवारी की निकाली गई। इसमें केवल तीन बार सारांश और अर्चना तिवारी के बीच लंबी बातचीत का रिकॉर्ड मिला। इसके आधार पर सारांश पर जांच का दायरा बढ़ाया गया। सारांश से जब पूछताछ की गई तब पूरा मामला खुल गया। फिर सारांश के जरिए नेपाल में रह रही अर्चना तिवारी को फोन किया गया और वापस बुलाया गया।
शादी नहीं करना थी, इसलिए बुना पूरा प्लान
जीआरपी सूत्रों के अनुसार, अर्चना के लापता होने में उसके एक करीबी दोस्त ने पूरी मदद की। उक्त युवक इंदौर में रहता है और अर्चना उससे शादी करना चाहती थी। अर्चना के परिजन इस बात से वाकिफ थे, इसलिए वे उसकी शादी जल्द से जल्द अपनी बिरादरी में करना चाहते थे। करियर बनाने की बात कहकर अर्चना अब तक शादी टालती आ रही थी, लेकिन जब परिजन उसे और समय देने के लिए तैयार नहीं हुए, तो उसने लापता होने की योजना बनाई।
कैसे बने अर्चना, सारांश और तेजेंदर दोस्त
जनवरी 2025 में अर्चना ट्रेन में जा रही थी। इसके सामने की बर्थ में सारांश बैठा हुआ था। अर्चना किसी से एक केस के सिलसिले में बात कर रही थी। तब सारांश भी उसे सुन रहा था। सारांश ड्रोन से संबंधित काम करता था। इसके लिए उसे एक कंपनी बनानी थी। इस सिलसिले में उसने अर्चना से ट्रेन में ही बातचीत शुरू की। वो अपनी कंपनी के लिए लीगल कागजात अर्चना से बनवाना चाहता था। इसके लिए फिर दोनों की आपस में बातचीत शुरू हो गई। वहीं तेजेंदर केस के सिलसिल में अर्चना को महेश्वर और हरदा आदि जगह ले गया था। इससे उसका संपर्क लगातार अर्चना से बना रहता था। 7 अगस्त के पहले अर्चना एक दिन केस को लेकर हरदा गई हुई थी। वहीं सारांश भी आ गया। अर्चना ने सारी बात दोनों को बताई। इसके बाद वहां एक ढाबे में बैठकर तीनों ने अर्चना के गायब होने का प्लान बनाया।
ये भी पढ़ें- Archana Tiwari: ट्रेन से लापता अर्चना नेपाल बॉर्डर पर मिली, 13 दिन तक कहां थी, ग्वालियर आरक्षक कनेक्शन क्या?
पुलिस ने बताया कि पूरे मिडघाट की तलाशी के बाद जब ये बाद कंफर्म हो गई है कि अर्चना की मौत नहीं हुई है तो जांच के दायरे को बढ़ाया गया। छह महीने की कॉल डिटेल अर्चना तिवारी की निकाली गई। इसमें केवल तीन बार सारांश और अर्चना तिवारी के बीच लंबी बातचीत का रिकॉर्ड मिला। इसके आधार पर सारांश पर जांच का दायरा बढ़ाया गया। सारांश से जब पूछताछ की गई तब पूरा मामला खुल गया। फिर सारांश के जरिए नेपाल में रह रही अर्चना तिवारी को फोन किया गया और वापस बुलाया गया।
शादी नहीं करना थी, इसलिए बुना पूरा प्लान
जीआरपी सूत्रों के अनुसार, अर्चना के लापता होने में उसके एक करीबी दोस्त ने पूरी मदद की। उक्त युवक इंदौर में रहता है और अर्चना उससे शादी करना चाहती थी। अर्चना के परिजन इस बात से वाकिफ थे, इसलिए वे उसकी शादी जल्द से जल्द अपनी बिरादरी में करना चाहते थे। करियर बनाने की बात कहकर अर्चना अब तक शादी टालती आ रही थी, लेकिन जब परिजन उसे और समय देने के लिए तैयार नहीं हुए, तो उसने लापता होने की योजना बनाई।
कैसे बने अर्चना, सारांश और तेजेंदर दोस्त
जनवरी 2025 में अर्चना ट्रेन में जा रही थी। इसके सामने की बर्थ में सारांश बैठा हुआ था। अर्चना किसी से एक केस के सिलसिले में बात कर रही थी। तब सारांश भी उसे सुन रहा था। सारांश ड्रोन से संबंधित काम करता था। इसके लिए उसे एक कंपनी बनानी थी। इस सिलसिले में उसने अर्चना से ट्रेन में ही बातचीत शुरू की। वो अपनी कंपनी के लिए लीगल कागजात अर्चना से बनवाना चाहता था। इसके लिए फिर दोनों की आपस में बातचीत शुरू हो गई। वहीं तेजेंदर केस के सिलसिल में अर्चना को महेश्वर और हरदा आदि जगह ले गया था। इससे उसका संपर्क लगातार अर्चना से बना रहता था। 7 अगस्त के पहले अर्चना एक दिन केस को लेकर हरदा गई हुई थी। वहीं सारांश भी आ गया। अर्चना ने सारी बात दोनों को बताई। इसके बाद वहां एक ढाबे में बैठकर तीनों ने अर्चना के गायब होने का प्लान बनाया।
ये भी पढ़ें- Archana Tiwari: ट्रेन से लापता अर्चना नेपाल बॉर्डर पर मिली, 13 दिन तक कहां थी, ग्वालियर आरक्षक कनेक्शन क्या?
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अर्चना तिवारी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
तेजेंदर और दिल्ली पुलिस के कारण देरी
रेलवे पुलिस के अनुसार वे तेजेंदर तक पहुंच गए थे। अर्चना जब शुजालपुर के लिए रवाना हो गई। उसके कुछ दिन बाद तेजेंदर को दिल्ली पुलिस उठा कर ले गई। उसके ऊपर दिल्ली में चोरी का आरोप था। रेलवे पुलिस का कहना है कि अगर दिल्ली पुलिस तेजेंदर को नहीं ले जाती तो केस जल्दी सॉल्व हो जाता, क्योंकि वे उसे पूछताछ के लिए पकड़ने वाले थे। जब दिल्ली पुलिस तेजेंदर को उठा लाई तब सलाखों के पीछे तेजेंदर से इस केस के बारे में पूछताछ की गई।
ग्वालियर के आरक्षक राम तोमर का लिंक
रेलवे पुलिस के अनुसार ग्वालियर में हिरासत में लिए गए राम तोमर का इस केस से कोई लिंक सामने नहीं आया है। वो अर्चना को समय-समय पर फोन करता रहता था जिससे अर्चना भी परेशान थी। ऐसा बयान स्वयं अर्चना ने दिया है। जब अर्चना जबलपुर में प्रेक्टिस कर रही थी तब राम तोमर उसके संपर्क में आया था। इसके बाद वो अर्चना को ग्वालियर बुलाना चाहता था। और कई बार उसने टिकिट भी बुक किए थे। पर अर्चना ने कभी उन टिकिट पर सफर नहीं किया था।
ये था मामला
कटनी निवासी अर्चना तिवारी इंदौर के सत्कार छात्रावास में रहकर सिविल जज की तैयारी कर रही थी। सात अगस्त को वह रक्षाबंधन पर घर जाने के लिए इंदौर से नर्मदा एक्सप्रेस के एसी कोच बी-3 की सीट पर यात्रा कर रही थी। भोपाल के रानीकमलापति रेलवे स्टेशन के पास तक वह अपनी सीट पर देखी गई, लेकिन उसके बाद वह वहां नहीं मिली और उसका फोन भी बंद हो गया। आठ अगस्त की सुबह जब ट्रेन कटनी पहुंची और अर्चना नहीं उतरी, उसके परिजनों ने उमरिया में रहने वाले उसके मामा को सूचना दी। मामा ट्रेन में गए तो उन्हें अर्चना का पर्स मिला, जिसमें बच्चों के लिए खिलौने, कुछ सामान और राखी रखी थी। एक बैग में उसके कपड़े भी सही-सलामत थे, लेकिन अर्चना गायब थी। यात्रियों ने मामा को बताया कि रानीकमलापति रेलवे स्टेशन के बाद से ही वह अपनी सीट पर नहीं दिखी।
रेलवे पुलिस के अनुसार वे तेजेंदर तक पहुंच गए थे। अर्चना जब शुजालपुर के लिए रवाना हो गई। उसके कुछ दिन बाद तेजेंदर को दिल्ली पुलिस उठा कर ले गई। उसके ऊपर दिल्ली में चोरी का आरोप था। रेलवे पुलिस का कहना है कि अगर दिल्ली पुलिस तेजेंदर को नहीं ले जाती तो केस जल्दी सॉल्व हो जाता, क्योंकि वे उसे पूछताछ के लिए पकड़ने वाले थे। जब दिल्ली पुलिस तेजेंदर को उठा लाई तब सलाखों के पीछे तेजेंदर से इस केस के बारे में पूछताछ की गई।
ग्वालियर के आरक्षक राम तोमर का लिंक
रेलवे पुलिस के अनुसार ग्वालियर में हिरासत में लिए गए राम तोमर का इस केस से कोई लिंक सामने नहीं आया है। वो अर्चना को समय-समय पर फोन करता रहता था जिससे अर्चना भी परेशान थी। ऐसा बयान स्वयं अर्चना ने दिया है। जब अर्चना जबलपुर में प्रेक्टिस कर रही थी तब राम तोमर उसके संपर्क में आया था। इसके बाद वो अर्चना को ग्वालियर बुलाना चाहता था। और कई बार उसने टिकिट भी बुक किए थे। पर अर्चना ने कभी उन टिकिट पर सफर नहीं किया था।
ये था मामला
कटनी निवासी अर्चना तिवारी इंदौर के सत्कार छात्रावास में रहकर सिविल जज की तैयारी कर रही थी। सात अगस्त को वह रक्षाबंधन पर घर जाने के लिए इंदौर से नर्मदा एक्सप्रेस के एसी कोच बी-3 की सीट पर यात्रा कर रही थी। भोपाल के रानीकमलापति रेलवे स्टेशन के पास तक वह अपनी सीट पर देखी गई, लेकिन उसके बाद वह वहां नहीं मिली और उसका फोन भी बंद हो गया। आठ अगस्त की सुबह जब ट्रेन कटनी पहुंची और अर्चना नहीं उतरी, उसके परिजनों ने उमरिया में रहने वाले उसके मामा को सूचना दी। मामा ट्रेन में गए तो उन्हें अर्चना का पर्स मिला, जिसमें बच्चों के लिए खिलौने, कुछ सामान और राखी रखी थी। एक बैग में उसके कपड़े भी सही-सलामत थे, लेकिन अर्चना गायब थी। यात्रियों ने मामा को बताया कि रानीकमलापति रेलवे स्टेशन के बाद से ही वह अपनी सीट पर नहीं दिखी।

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