सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त

MP Election 2023: जनसंघ, भाजपा और कांग्रेस की दो-दो पीढ़ियों ने किया राज; जानिए किसने कहां बनाई पकड़

Arvind Tiwari अरविंद तिवारी
Updated Sat, 14 Oct 2023 02:24 PM IST
सार

MP Assembly Election 2023: मालवा-निमाड़ ने मध्य प्रदेश को छह मुख्यमंत्री डॉ. कैलाशनाथ काटजू, भगवंतराव मंडलोई, प्रकाशचंद सेठी, कैलाश जोशी, वीरेंद्र कुमार सखलेचा और सुंदरलाल पटवा दिए और इनमें से चार के वंशज भी यहां की राजनीति में अहम भूमिका में रहे।

विज्ञापन
MP Election 2023 News: Two generations each of Jan Sangh, BJP and Congress ruled
मध्य प्रदेश की वंशवाद राजनीति। - फोटो : Amar Ujala Digital
राजनीति में वंशवाद की बेल गहरी जड़ों के साथ मालवा-निमाड़ में भी खूब फली-फूली हैं। यहां जनसंघ, भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं की दो-दो पीढ़ियों ने राज किया है और इनका यहां की राजनीति में खासा दबदबा भी रहा है। मालवा-निमाड़ ने मध्य प्रदेश को छह मुख्यमंत्री डॉ. कैलाशनाथ काटजू, भगवंतराव मंडलोई, प्रकाशचंद सेठी, कैलाश जोशी, वीरेंद्र कुमार सखलेचा और सुंदरलाल पटवा दिए और इनमें से चार के वंशज भी यहां की राजनीति में अहम भूमिका में रहे। इसी तरह इस अंचल से जो तीन नेता शिवभानुसिंह सोलंकी, सुभाष यादव और जमुना देवी उपमुख्यमंत्री बने उन तीनों के वंशजों का भी यहां की राजनीति में खासा दखल है।
Trending Videos
MP Election 2023 News: Two generations each of Jan Sangh, BJP and Congress ruled
कैलाश जोशी और दीपक जोशी - फोटो : Amar Ujala Digital

कैलाश जोशी-दीपक जोशी
राजनीति के संतपुरुष कैलाश जोशी बागली क्षेत्र से लगातार सात चुनाव जीते। वे ऐसे नेता हैं, जिन्हें जनता वोट के साथ चुनाव खर्च के लिए नोट भी देती थी। 1998 में पहला चुनाव हारे तो पार्टी ने राज्यसभा में भेज दिया। भोपाल से दो बार सांसद भी रहे। बेटे दीपक की स्थिति पूत के पांव पालने में दिखने जैसी रही। छात्र राजनीति में खूब नाम कमाया। भोपाल के हमीदिया कालेज के अध्यक्ष रहे, जनता विद्यार्थी मोर्च के प्रांत संयोजक रहे और 2003 में अपने पिता के परंपरागत क्षेत्र बागली से विधायक चुने गए। परिसीमन में इसके सुरक्षित हो जाने के बाद 2008 में हाटपिपल्या से चुनाव जीते। 2013 में फिर यहीं से जीते, लेकिन 2018 में हार गए। अब दीपक कांग्रेस में हैं और कन्नौद-खातेगांव सीट से मजबूत दावेदार हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
MP Election 2023 News: Two generations each of Jan Sangh, BJP and Congress ruled
वीरेंद्र कुमार सखलेचा और ओमप्रकाश सखलेचा - फोटो : Amar Ujala Digital

वीरेंद्र कुमार सखलेचा और ओमप्रकाश सखलेचा
जब मध्य प्रदेश में जनसंघ के पास गिने-चुने विधायक होते थे, तब उनमें से एक नाम वीरेंद्र कुमार सखलेचा का था। जावद से वे कई बार विधायक चुने गए। संविद सरकार में वे जनसंघ के कोटे से उपमुख्यमंत्री रहे फिर राज्यसभा सदस्य बने। 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री बने। 1980 में वे चुनाव जीते पर धीरे-धीरे पार्टी की मुख्यधारा की राजनीति से अलग होते गए। आखिरी चुनाव उन्होंने 1998 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जावद से लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए। इसके पहले भी वे बागी प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे थे। 2003 में जब मध्य प्रदेश में उमा भारती की अगुवाई में चुनाव लड़ा गया था, तब इनके उद्योगपति बेटे ओमप्रकाश सखलेचा को पहली बार जावद से पार्टी टिकट मिला तो पिता की पुण्याई काम आई और जीत गए। तब से अब तक वे लगातार चार चुनाव जीत चुके हैं और इस बार फिर मैदान में हैं।

सुंदरलाल पटवा और सुरेंद्र पटवा
1957 सुंदरलाल पटवा पहली बार विधायक बने, उसके बाद विधानसभा और लोकसभा के कई चुनाव जीते। दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्र में कई विभागों के मंत्री रहे। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे। दत्तक पुत्र सुरेंद्र पटवा भोजपुर से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं और शिवराज मंत्रिमंडल में मंत्री भी रहे।

MP Election 2023 News: Two generations each of Jan Sangh, BJP and Congress ruled
भगवंतराव मंडलोई - फोटो : Amar Ujala Digital

भगवंतराव मंडलोई और नंदा मंडलोई
भगवंतराव मंडलोई दो अलग-अलग चक्र में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। वे खंडवा से विधायक चुने गए थे। उनके सक्रिय राजनीतिक से दूर होने के सालों बाद उनकी बहू नंदा मंडलोई 1984 में खंडवा से विधायक बनीं, लेकिन इनकी राजनीतिक पारी ज्यादा लंबी नहीं रही।

शिवकुमार सिंह और महेंद्र सिंह और सुरेंद्र सिंह शेरा और मंजू ठाकुर
निमाड़ खासकर पूर्वी निमाड़ की राजनीति में ठाकुर नवलसिंह बड़ा नाम रहे। बेटे शिवकुमार सिंह को भी राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल हुआ। 1972 में पहली बार विधायक बने थे। फिर विधानसभा और लोकसभा के कई चुनाव जीते। 1998 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद शपथ लेने के पूर्व ही खंडवा से बुरहानपुर लौटते समय रेलवे स्टेशन पर निधन हो गया। उपचुनाव में बेटी मंजू ठाकुर विधायक बनी। एक भाई महेंद्र सिंह कई बार बुरहानपुर के महापौर और बाद में खंडवा से सांसद भी रहे। छोटे भाई सुरेंद्रसिंह अभी बुरहानपुर से विधायक हैं।

विज्ञापन
MP Election 2023 News: Two generations each of Jan Sangh, BJP and Congress ruled
शिवभानु सिंह सोलंकी और सूरजभान सोलंकी - फोटो : Amar Ujala Digital

शिवभानु सिंह सोलंकी और सूरजभान सोलंकी
शिवभानुसिह सोलंकी सालों तक धार जिले की मनावर सीट से विधायक रहे। कई मुख्यमंत्रियों की कैबिनेट में रहे और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का दायित्व भी संभाला। 1980 में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद वे मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार थे, लेकिन आलाकमान ने अर्जुन सिंह को मौका दे दिया। सोलंकी जब राजनीति के उत्तरार्ध में थे, तब अपने पायलट बेटे सूरजभानु सोलंकी को जिनका राजनीति से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था, धार से लोकसभा का चुनाव लड़वाकर सांसद बनवाया। सूरजभानु दो बार धार से सांसद रहे और 2013 में हरसूद से विधानसभा चुनाव भी लड़े, लेकिन हार गए।

विक्रम वर्मा और नीना वर्मा
छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय विक्रम वर्मा धार सीट से 1977 में पहली बार विधायक बने। यहीं से कई चुनाव जीते। संसदीय सचिव और केबिनेट मंत्री रहे, नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभाई। 1998 में धार से ही विधानसभा चुनाव हारे भी। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद केंद्र में खेल और युवा कल्याण मंत्री रहे। पत्नी नीना वर्मा 2008 में पहली बार विधायक बनी और लगातार तीन चुनाव जीत चुकी हैं।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed