{"_id":"6220457d07a7bd0c2e5831f6","slug":"world-wild-life-day-more-than-254-tigers-died-in-a-decade-in-tiger-state-mp-even-after-spending-crores-tigers-are-not-safe","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"MP: टाइगर स्टेट में एक दशक में 254 से ज्यादा बाघों की मौत, करोड़ों खर्च फिर भी सुरक्षित नहीं वनराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP: टाइगर स्टेट में एक दशक में 254 से ज्यादा बाघों की मौत, करोड़ों खर्च फिर भी सुरक्षित नहीं वनराज
सार
World Wild Life Day: टाइगर स्टेट में 10 साल में 254 से ज्यादा बाघों की मौत, करोड़ों खर्च फिर भी सुरक्षित नहीं वनराज
विज्ञापन
मध्य प्रदेश में दम तोड़ रहे बाघ (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाघों का घर के कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में बीते एक दशक में 254 से ज्यादा बाघों की अलग-अलग कारणों से मौत हो चुकी है। प्रदेश में बाघों की मौत के आंकड़ें चौंकाने वाले हैं। 2012 से 2020 तक 8 सालों में जहां प्रदेश में 202 बाघों की मौत हुई। तो वहीं, महज 2021 से अब तक 15 महीनों में ही 52 से ज्यादा बाघ दम तोड़ चुके हैं।
बाघों का घर है मध्य प्रदेश (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
बाघों की सुरक्षा के लिए करोड़ों का बजट
मध्य प्रदेश सरकार हर साल बाघों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती हैं, लेकिन उसके बावजूद प्रदेश में बाघ दम तोड़ रहे हैं। राज्य सरकार ने 2018-19 में बाघों के संरक्षण, सुरक्षा और निगरानी में 283 करोड़ रुपये, 2019-20 में 220 करोड़ और 2020-21 और 2021-22 में क्रमशः 264 करोड़ और 128 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
बिना आईडी के हो रही निगरानी
राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा में करोड़ों का बजट व्यय करने के बाद भी 2017 के बाद प्रदेश में बाघों की आईडी नहीं बनी है। आईडी के जरिए ही वन विभाग बाघों की निगरानी करता है, लेकिन 2017 के बाद प्रदेश के कई टाइगर रिजर्व में बाघों की आईडी बनाने का काम बंद हैं। हाल ही में जारी विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार अकेले बांधवगढ़ में 50 से ज्यादा बाघ बिना आईडी के विचरण कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश सरकार हर साल बाघों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती हैं, लेकिन उसके बावजूद प्रदेश में बाघ दम तोड़ रहे हैं। राज्य सरकार ने 2018-19 में बाघों के संरक्षण, सुरक्षा और निगरानी में 283 करोड़ रुपये, 2019-20 में 220 करोड़ और 2020-21 और 2021-22 में क्रमशः 264 करोड़ और 128 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
बिना आईडी के हो रही निगरानी
राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा में करोड़ों का बजट व्यय करने के बाद भी 2017 के बाद प्रदेश में बाघों की आईडी नहीं बनी है। आईडी के जरिए ही वन विभाग बाघों की निगरानी करता है, लेकिन 2017 के बाद प्रदेश के कई टाइगर रिजर्व में बाघों की आईडी बनाने का काम बंद हैं। हाल ही में जारी विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार अकेले बांधवगढ़ में 50 से ज्यादा बाघ बिना आईडी के विचरण कर रहे हैं।
2018 की गणना के अनुसार प्रदेश में 526 बाघ हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
टाइगर रिजर्व में क्षमता से अधिक बाघ
मध्य प्रदेश के बाघ संरक्षित क्षेत्रों में क्षमता से ज्यादा बाघों का होना भी मौतों का एक बड़ा कारण है। बाघों के आपसी संघर्ष और जंगल से रिहायशी इलाकों में भटकने से रोकने के लिए बाघ कॉरिडोर बनाने की जरूरत है। प्रदेश के टाइगर रिजर्व में वर्तमान में क्षमता से डेढ़ से दो गुना तक बाघ हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की क्षमता 75 बाघ की है, लेकिन यहां 124 बाघ (2018 की गणना) हैं। कान्हा टाइगर रिजर्व की क्षमता 70 के मुकाबले यहां 108 बाघ हैं। यही स्थिति पेंच (82) और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (50) की है। सिर्फ संजय दुबरी टाइगर रिजर्व सीधी ही ऐसा है, जहां महज छह बाघ हैं।
मध्य प्रदेश में है 7 टाइगर प्रोजेक्ट
टाइगर स्टेट एमपी में वर्तमान में 7 टाइगर प्रोजेक्ट हैं, जिनमें कान्हा किसली, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, पन्ना राष्ट्रीय उद्यान, बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान, रातापानी अभ्यारण्य शामिल हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा बाघ कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान में हैं वहीं बंगाल टाइगर की जनसंख्या घनत्व के मामले में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व दुनिया में पहले स्थान पर है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश में 10 साल में 254 से ज्यादा बाघ दम तोड़ चुके हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
बड़ी संख्या में आते हैं पर्यटक
मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व में सैलानियों को आसानी से बाघों का दीदार हो जाता है, जिसके चलते यहां देश के साथ ही विदेश से भी पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। टाइगर रिजर्व से हर साल सरकार को अच्छी खासी आमदनी होती है।
