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जेल की कहानी, कैदी की जुबानी: मुरैना की अंबाह जेल में चलती है वसूली, जो न दे उसे पीटा जाता है
Thu, 03 Mar 2022 12:39 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 03 Mar 2022 12:39 PM IST
सार
मुरैना जिले की अंबाह जेल में रुपयों के लिए कैदियों के साथ हो रहे जानवरों से भी बदतर बर्ताव का खुलासा जेल से छूटे एक व्यक्ति ने किया है। उसने मप्र के गृहमंत्री, जेल मंत्रालय और मानव अधिकार आयोग को इस संबंध में शिकायती पत्र भेजा है। साथ ही वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला है।
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अंबाह जेल के कैदी ने जेल में हो रहे अत्याचार की शिकायत की है।
- फोटो : अमर उजाला
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मुरैना जिले की अंबाह जेल में रुपयों के लिए कैदियों के साथ हो रहे जानवरों से भी बदतर बर्ताव का खुलासा जेल से छूटे एक व्यक्ति ने किया है। उसने मप्र के गृहमंत्री, जेल मंत्रालय और मानव अधिकार आयोग को इस संबंध में शिकायती पत्र भेजा है। साथ ही वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला है।
आरोपी लाला उर्फ मोहन तोमर ने वीडियो बनाकर जेल के कारनामे उजागर किए हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
आरोपी ने शिकायत पत्र में बताया कि जो भी अपराध किए हैं मुझे न्यायालय जो भी न्याय का दंड देगा मुझे मंजूर होगा लेकिन जेल में मेरे मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। मेरे प्राण पर संकट है। प्रहरी रामशंकर कोरकु जेल का रसूखदार सिपाही होने से मेरी जान कभी भी जा सकती है।
आरोपी ने बताया कि जेलर ने चार महीने पहले जेल में बन्द कैदी से इन्वेंटर की बैटरी की मांग भी की थी। जेल में बन्द कैदी ने अपने परिजनों से कह कर जेलर को इनवर्टर की बैटरी दिलवाई। इसके पैसे कैदी ने अपने दोस्त से लिए, उसके बाद परिजनों ने बताया कि जेलर द्वारा दस हजार की मांग की जा रही थी। जब पैसों की मांग पूरी नहीं की उसके बाद अम्बाह कैदी का जिला जेल मुरैना में ट्रांसफर करवा दिया गया जो शिकायत पत्र में लिखा है। कैदी ने बाहर आने के बाद बताया कि बैटरी के लिए दस हजार का भुगतान फोन पे के माध्यम से किया था, जिस दुकानदार से बैटरी खरीदी थी उसका बिल क्रमाक नम्बर 1936 दिनांक 13 नवम्बर 2021 है।
आरोपी ने बताया कि जेलर ने चार महीने पहले जेल में बन्द कैदी से इन्वेंटर की बैटरी की मांग भी की थी। जेल में बन्द कैदी ने अपने परिजनों से कह कर जेलर को इनवर्टर की बैटरी दिलवाई। इसके पैसे कैदी ने अपने दोस्त से लिए, उसके बाद परिजनों ने बताया कि जेलर द्वारा दस हजार की मांग की जा रही थी। जब पैसों की मांग पूरी नहीं की उसके बाद अम्बाह कैदी का जिला जेल मुरैना में ट्रांसफर करवा दिया गया जो शिकायत पत्र में लिखा है। कैदी ने बाहर आने के बाद बताया कि बैटरी के लिए दस हजार का भुगतान फोन पे के माध्यम से किया था, जिस दुकानदार से बैटरी खरीदी थी उसका बिल क्रमाक नम्बर 1936 दिनांक 13 नवम्बर 2021 है।
कैदी ने मानव अधिकार आयोग को पत्र लिखा है। साथ ही ट्रांजैक्शन का स्क्रीन शॉट दिया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
रुपये दो और सुविधाएं लो
मोहन तोमर ने इस बात का खुलासा किया है कि जेल में मौजूद कैदी को मोबाइल और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। अभी अम्बाह जेल में 4 से 5 मोबाइल कैदी के पास मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि जेल में मोटी रकम देकर कैदी को सुविधाएं मिल रही हैं। चार दिन पहले एक कैदी ओर महिला का ऑडियो भी वायरल हुआ था। मोहन तोमर ने मानव अधिकार आयोग के लिखे पत्र में बताया है कि जेल में बंद कैदियों को हर सुविधा लेने के लिए पैसा देना पड़ता है। अच्छा खाना चाहिए तो उसका पैसा, कोई सामान बाहर से मंगाना हो तो उसका अलग से पैसा लगता है। बीमार होने पर जेलर इलाज नहीं कराते हैं। जो कैदी शिकायत करते हैं, उनकी जेलर डण्डों से बेरहमी से पिटाई करते हैं।
प्रहरी रामशंकर और मुख्य प्रहरी शिरोमणि पर कार्रवाई करने की बात पत्र में कही है। प्रहरी रामशंकर कोरकु, प्रहरी शिरोमणि सिंह एवं प्रहरी रामप्रताप सिंह भदोरिया सभी दस साल से अंबाह जेल पर पदस्थ हैं। पूर्व में भी इनकी कई बार शिकायत हो चुकी है। ना ही इनका ट्रांसफर किया जाता है ना इनके खिलाफ कोई कार्रवाई होती है, क्योंकि ये लोग जेल में पैसा वसूली का काम करते हैं। आरोपी ने जेल में बन्द होने के बाद किन किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा और जेल में कैदियों के साथ क्या-क्या किया जाता है। जेल में दाल-रोटी से लेकर मिलने बाली चाय तक के रेट का खुलासा किया है। इस संबंध में जेलर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, पर संपर्क नहीं हो सका।
मोहन तोमर ने इस बात का खुलासा किया है कि जेल में मौजूद कैदी को मोबाइल और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। अभी अम्बाह जेल में 4 से 5 मोबाइल कैदी के पास मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि जेल में मोटी रकम देकर कैदी को सुविधाएं मिल रही हैं। चार दिन पहले एक कैदी ओर महिला का ऑडियो भी वायरल हुआ था। मोहन तोमर ने मानव अधिकार आयोग के लिखे पत्र में बताया है कि जेल में बंद कैदियों को हर सुविधा लेने के लिए पैसा देना पड़ता है। अच्छा खाना चाहिए तो उसका पैसा, कोई सामान बाहर से मंगाना हो तो उसका अलग से पैसा लगता है। बीमार होने पर जेलर इलाज नहीं कराते हैं। जो कैदी शिकायत करते हैं, उनकी जेलर डण्डों से बेरहमी से पिटाई करते हैं।
प्रहरी रामशंकर और मुख्य प्रहरी शिरोमणि पर कार्रवाई करने की बात पत्र में कही है। प्रहरी रामशंकर कोरकु, प्रहरी शिरोमणि सिंह एवं प्रहरी रामप्रताप सिंह भदोरिया सभी दस साल से अंबाह जेल पर पदस्थ हैं। पूर्व में भी इनकी कई बार शिकायत हो चुकी है। ना ही इनका ट्रांसफर किया जाता है ना इनके खिलाफ कोई कार्रवाई होती है, क्योंकि ये लोग जेल में पैसा वसूली का काम करते हैं। आरोपी ने जेल में बन्द होने के बाद किन किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा और जेल में कैदियों के साथ क्या-क्या किया जाता है। जेल में दाल-रोटी से लेकर मिलने बाली चाय तक के रेट का खुलासा किया है। इस संबंध में जेलर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, पर संपर्क नहीं हो सका।
