इंदौर: आखिर क्यों व्यापारियों के लाड़ले बन गए शिवराज, जानिए क्यों आया मुख्यमंत्री को गुस्सा और क्यों घबराए अफसर
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान डेढ़ दशक से ज्यादा समय से मप्र के मुख्यमंत्री हैं और मप्र और यहां के बाशिंदों की नब्ज को अच्छे से समझते हैं। सत्ता और संगठन में तालमेल की बात हो या प्रशासनिक कसावट के तरीके, हर मामले में शिवराज माहिर हैं।
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कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा था कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गत दिवस व्यापारियों द्वारा की गई शिकायतों संबंधी ख़बरों पर गहरी नाराज़गी जताई थी। उन्होंने कहा था कि इंदौर में सियागंज क्षेत्र व्यापार की रीढ़ है। इंदौर के व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए। उनके व्यापार में कोई अवरोध नहीं होना चाहिए। कलेक्टर श्री सिंह ने स्पष्ट किया कि व्यापार में यदि कहीं कोई दिक़्क़त आ रही है तो उन्हें परस्पर समन्वय से दूर किया जाएगा। कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा अगर गलतियां की गई हैं तो उसे समूचे तंत्र से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
व्यापारियों की ओर से रमेश खंडेलवाल ने कहा कि पुलिस द्वारा आए दिन व्यापारियों से सैंपलिंग के नाम पर परेशानी पैदा की जाती है। व्यापारियों का कहना था कि पुलिस को सैंपलिंग का अधिकार नहीं है। यह अधिकार खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के पास है। व्यापारियों द्वारा बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा सैंपलिंग के नाम पर धौंस दी जाती है और व्यापारियों को थाने में बैठाया जाता है। इस पर प्रभारी पुलिस कमिश्नर मनीष कपूरिया ने बैठक में कहा कि इन सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। संवाद उच्च स्तर पर रखा जाएगा और व्यापारियों को कोई भी असुविधा नहीं होने दी जाएगी। संभागायुक्त डॉ. पवनकुमार शर्मा ने कहा था कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि इंदौर में व्यापार जगत को शासन-प्रशासन का पूरा संरक्षण सुनिश्चित होना चाहिए। इस संबंध में दोषियों को चिन्हित भी किया जाएगा।
मातहतों के साथ टीआई को भी मिली सजा
बैठक हुई और इसका नतीजा भी निकला। जिन पुलिसकर्मियों की गलती पाई गई उन पर गाज गिरी। एक थाना प्रभारी को भी लाइन अटैच किया गया। सूत्रों के मुताबिक शिकायत के बाद जांच में पाया गया कि कुछ पुलिसकर्मी अनधिकृत रूप से व्यापारियों की दुकानों में सैंपलिंग के बहाने जाते थे और परेशान करते थे। इनमें आरक्षक से लेकर प्रधान आरक्षक और एसआई तक शामिल थे। इस पर इनको लाइन अटैच किया। थाना प्रभारी को भी सजा मिली क्योंकि यह माना गया कि थाना प्रभारी अधीनस्थों पर अंकुश नहीं लगा सके जिस कारण पुलिस की छवि खराब हुई। टीआई को भी लाइन हाजिर कर दिया गया।
व्यापारियों के लाड़ले बन गए शिवराज
पुलिस-प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से व्यापारी खुश हो गए। इतने खुश हुए कि जब मंगलवार रात को सीएम शिवराज सिंह चौहान इंदौर पहुंचे तो व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि इतनी जल्दी उनके निर्देश पर कार्रवाई भी हो गई। सियागंज व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने इस बात के लिए मुख्यमंत्री का आभार माना कि उनकी वाजिब शिकायत पर उन्होंने तुरंत ही संज्ञान लिया और दोषियों पर कार्रवाई भी करवा दी। इससे व्यापारियों का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने भरोसा भी दिलाया कि इंदौर को व्यापार-व्यवसाय के मामले में भी नंबर वन बनाएंगे। जवाब में मुख्यमंत्री ने भी कहा कि यदि कोई अधिकारी परेशान करता है तो सीधे उन्हें बताया जाए। सीएम के ये कहने के बाद व्यापारियों के लिए सीएम किसी टाइगर से कम नहीं थे जिनके कारण व्यापारियों की बड़ी परेशानी हल हो गई। कई समय से जिस समस्या से जूझ रहे थे वह सीएम की थोड़ी सी नाराजगी से सुलझ गई और इसीलिए इंदौर के व्यापारी सीएम की प्रशंसा कर नहीं थक रहे। बार-बार उनको धन्यवाद दे रहे हैं। यह बात इंदौर भी जान रहा है और इंदौर के मार्फत मप्र भी कि आखिर क्यों सीएम व्यापारियों के लाड़ले बन गए।
सीहोर के सहारे विजयवर्गीय का लेटरवॉर
अब बात करते हैं भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पत्र की। सीहोर में पं. प्रदीप मिश्रा की कथा निरस्त हुई तो विजयवर्गीय ने सीएम शिवराज को पत्र लिखा। पत्र में सीहोर प्रशासन पर गुस्सा जाहिर किया और सीएम से कहा कि बीते 17 सालों से आप इस प्रदेश के मुखिया हैं। ऐसी कौनसी विपदा आ गई कि पं. प्रदीप मिश्रा पर इतना दबाव बनाना पड़ा कि उन्हें भारी मन से कथा समाप्त करनी पड़ी। सीएम से सवाल किए कि शिवराज जी ऐसे कई अनगिनत सवाल हैं जिनका जवाब नहीं मिल रहा है। अकर्मण्य प्रशासन का असर आपकी छवि पर पड़ रहा है। और भी कई बातें इस पत्र में लिखी। राजनीतिक जानकार इस पत्र को प्रशासन के माध्यम से सीएम पर ही राजनीतिक अटैक करना बता रहे हैं क्योंकि अंततः प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान हैं और सीहोर उनका गृह जिला है। बगैर हाईलेवल की चर्चा के लोकल लेवल पर अधिकारी इस तरह का निर्णय ले ले यह समझ नहीं आता। चूंकि कैलाश विजयवर्गीय और शिवराज सिंह चौहान की राजनीतिक अदावत भी बरसों से जारी है और कई किस्से भी सामने आते रहते हैं। अब सीहोर प्रकरण के सहारे विजयवर्गीय ने जरूर लेटर वॉर का उपयोग किया है लेकिन सीएम इसे किस तरह से जवाब देते हैं इसका हर कोई इंतजार कर रहा है।
