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उज्जैन: महाशिवरात्रि पर रात्रि में हुई महापूजा, सुबह महाकाल को सजाया सवा मन फूलों का सेहरा, दोपहर में हुई भस्मारती

Wed, 02 Mar 2022 04:44 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Wed, 02 Mar 2022 04:44 PM IST
सार

महाशिवरात्रि पर महानिशाकाल में भगवान महाकाल की महापूजा हुई। अगले दिन सुबह महाकाल को सवा मन फूलों का सेहरा सजाया। भक्तों ने दर्शन किए। दोपहर 12 बजे भस्मारती हुई। साल में एक ही बार ऐसा होता है जब भस्मारती दोपहर में होती है। 

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Ujjain: On Mahashivratri, Mahapuja took place in the night, Mahakal was decorated with flowers in the morning, in the afternoon incineration took place.
भगवान महाकाल को सजाया फूलों का सेहरा - फोटो : सोशल मीडिया
महाशिवरात्रि पर महाकाल के दर्शन करने के लिए लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। देर रात को महापूजा की गई। भगवान महाकाल को सवा मन फूलों का सेहरा सजाया।  सुबह सप्त धान्य अर्पण किए गए थे। महाशिवरात्रि के अगले दिन भस्मारती दोपहर 12 बजे हुई। साल में एक बार ही ऐसा होता है जब तड़के की जाने वाली भस्मारती दोपहर में होती है।

 
Ujjain: On Mahashivratri, Mahapuja took place in the night, Mahakal was decorated with flowers in the morning, in the afternoon incineration took place.
भक्तों ने किए फूलों से सजे सेहरे के दर्शन - फोटो : सोशल मीडिया

दरअसल, महाशिवरात्रि पर महाकाल की नगरी में उत्साह और उल्लास छाया रहा। तड़के 3 बजे मंदिर के पट खोले गए थे, जिसके बाद भस्मारती हुई। इसके बाद आमजनों का प्रवेश शुरू हुआ और देर रात तक करीब पांच लाख से ज्यादा भक्तों ने महाकाल के दर्शन किए। शिवरात्रि की संध्या को ही उज्जैन दीपों की रोशनी से जगमगाया। शहर में 21 लाख दीप जलाए गए। शिप्रा नदी के विभिन्न घाटों पर 11 लाख से ज्यादा दीप जलाए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी सपत्नीक इस दीपोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए। उज्जैन का यह रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज हुआ। इससे पहले यह रिकॉर्ड अयोध्या के नाम था जहां एक साथ नौ लाख से अधिक दीये जलाए गए थे।
Ujjain: On Mahashivratri, Mahapuja took place in the night, Mahakal was decorated with flowers in the morning, in the afternoon incineration took place.
शिवरात्रि के अगले दिन दोपहर में हुई भस्मारती - फोटो : सोशल मीडिया

सुबह हुए मुकुट के दर्शन, दोपहर में भस्मारती
बुधवार तड़के पुजारियों ने भगवान का अभिषेक पूजन कर बिल्व पत्र, कमल पुष्प, सप्तधान्य अर्पित किया। इसके बाद सवा मन फूल व फलों से बना पुष्प मुकुट (सेहरा) सजाया। भगवान को मिष्ठान, फल, सूखे मेवे का महाभोग लगाया और आरती की। बुधवार दोपहर 12 बजे महाकाल की भस्मारती हुई। साल में एक बार ऐसा होता है जब शिवरात्रि के अगले दिन दोपहर में भस्मारती होती है। बुधवार सुबह 6 बजे से 11 बजे तक भक्तों ने महाकाल के मुकुट के दर्शन किए। बाद में मुकुट उतारा गया और इसके फूलों का प्रसाद स्वरूप वितरित किया। बताया जाता है कि भगवान महाकाल के पुष्प मुकुट के फूल घर में रखने से संपन्नता बनी रहती है। जिन कन्याओं के मांगलिक कार्य में रुकावट आ रही है, वे  पुष्प मुकुट के फूलों को अपने पास रखें तो उनके विवाह के योग शीघ्र बन जाते हैं।
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महाशिवरात्रि की रात्रि में हुई महापूजा - फोटो : सोशल मीडिया

महानिशाकाल में हुई महापूजा
दीपोत्सव कार्यक्रम के बाद रात 11 बजे से महाकाल की महापूजा शुरू की गई। महानिशाकाल में यह पूजा हुआ। कोटितीर्थ कुंड के समीप स्थित कोटेश्वर महादेव की पूजा अर्चना के साथ महापूजा शुरू हुई। कोटेश्वर महादेव की पूजा के बाद मंगलवार रात 12 बजे से गर्भगृह में पूजन का क्रम शुरू हुआ। सबसे पहले पुजारियों ने भगवान महाकाल का पंचामृत, फलों के रस, सुगंधित द्रव्य से अभिषेक किया। इसके बाद भूशुद्धि, भूतशुद्धि पूजा की गई। शिव सहस्त्र नामावली से भगवान को सवा लाख बिल्व पत्र अर्पित किए गए। चंदन का लेपन कर सप्तधान्य का मुखारविंद धारण कराया गया तथा सात प्रकार के धान्य अर्पित किए गए। महाभोग लगाकर आरती की गई। 
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भस्मारती के बाद महाकाल का अर्द्धनारीश्वर स्वरूप में किया श्रृंगार - फोटो : सोशल मीडिया
महाशिवरात्रि पर्व के दूसरे दिन दोपहर में भस्मारती के बाद महाकाल का अर्द्धनारीश्वर स्वरूप में श्रृंगार किया गया।  दोपहर में भस्मार्ती के बाद मंदिर समिति की ओर से महाकाल प्रवचन हॉल में पालणा भोजन के साथ ही महाशिवरात्रि पर्व का समापन हुआ।  आम दर्शनार्थियों के दोपहर 2:30 बजे से दर्शन व्यवस्था फिर शुरू हो गई। इस दौरान कलेक्टर आशीष सिंह, एसपी सत्येन्द्र कुमार शुक्ल सहित मंदिर प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती बुधवार को दोपहर में होने वाली भस्म आरती में शामिल हुई। इस दौरान उन्होंने गर्भ गृह में पूजन अर्चन कर जल चढ़ाया। और नंदी हाल में बैठकर भस्म आरती के दर्शन किये। 
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