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जवानी का सुख या फांसी का दुख, ईरानी जेल में यही सोचती हैं लड़कियां

Fri, 29 Jan 2016 01:33 PM IST
Updated Fri, 29 Jan 2016 01:33 PM IST
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जवानी का सुख या फांसी का दुख, ईरानी जेल में यही सोचती हैं लड़कियां

Iranian women and juveniles in prisons

जेल के अंदर की जिंदगी हर आम कैदी के लिए कठिन ही होती है लेकिन जब बात ईरान जैसे देश की हो तो सोचा जा सकता है कि सख्ती के कितने कानून होंगे। ऐसे में वहां महिला मुजरिमों की जिंदगी कैसी होती है, किन स्थितियों में उन्हें रहना पड़ता है, सोच भी नहीं सकते।

जवानी का सुख या फांसी का दुख, ईरानी जेल में यही सोचती हैं लड़कियां

Iranian women and juveniles in prisons

ईरान के जेलों में कई छोटी-छोटी नाबालिग लड़कियां भी कैद हैं। इनके ऊपर मर्डर, ड्रग्स तस्करी और हथियारों की चोरी जैसे मामले दर्ज हैं। लेकिन इनके लिए भी चुनौतियां कम नहीं है। घंटों खाने के लिए लाइन लगाना, गंदगी में नवजात बच्चों को पालना इनके लिए आसान नहीं होता।

जवानी का सुख या फांसी का दुख, ईरानी जेल में यही सोचती हैं लड़कियां

Iranian women and juveniles in prisons

ईरान दुनिया का दूसरा ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा मौत की सजा सुनाई जाती है। महिला मुजरिमों को भी उनके जुर्म के लिए फांसी की सजा दी जाती है जबकि इनमें से कईयों को उचित सुनवाई का भी मौका नहीं मिलता। जबरन जुर्म कबूल करवाया जाता है और टॉर्चर किया जाता है।

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जवानी का सुख या फांसी का दुख, ईरानी जेल में यही सोचती हैं लड़कियां

Iranian women and juveniles in prisons

नाबालिग लड़कियों को जुविनाइल जेल में रखा जाता है और इनमें से ज्यादातर को 18 साल की होते ही मौत की सजा दे दी जाती है। पिछले साल देश में 830 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी, जिनमें से चार नाबालिग थे।

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Iranian women and juveniles in prisons

17 साल की मुजरिम महसा को चाकू घोंप कर अपने पिता के कत्ल के आरोप में जेल हुई थी। उसके भाइयों ने उसके लिए मौत की सजा की मांग की है। ऐसे ही 16 साल की नाजनीन को 6 महीने पहले 621 ग्राम कोकेन के साथ पकड़े जाने के जुर्म में सजा हुई थी। उसे इंतजार है कि न्यायाधीश आखिर क्या फैसला लेंगे।

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