नंदनी माता मंदिर राजस्थान के दक्षिणांचल में निम्बाहेड़ा-दाहोद राष्ट्रीय राजमार्ग 56 पर स्थित है। बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर बड़ोदिया कस्बे के पास अरावली पर्वतमाला की ऊंची चोटी पर विराजमान यह धाम समुद्रतल से लगभग 1384 फीट (422 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से वागड़ अंचल का विस्तृत और मनोरम दृश्य दिखाई देता है, जिसके कारण इसे वागड़ का पावागढ़ भी कहा जाता है।
चैत्र नवरात्रि 2026: वागड़ का पावागढ़ कहलाने वाला नंदनी माता धाम; आस्था, इतिहास और प्राकृतिक रहस्य का संगम
Chaitra Navratri: बांसवाड़ा का नंदनी माता धाम वागड़ का पावागढ़ कहलाता है। यह धार्मिक आस्था, पौराणिक मान्यताओं और प्राकृतिक रहस्यों का केंद्र है। सुगम मार्ग और विशेष परंपराओं के कारण यह श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बना हुआ है।
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धार्मिक मान्यता और पौराणिक संदर्भ
नंदनी माता धाम को लेकर प्रचलित मान्यता के अनुसार यह द्वापर युग में कंस के हाथों मुक्त हुई शक्ति का स्थल है। लोक विश्वास है कि मां नंदनी यशोदा के गर्भ से उत्पन्न हुई थीं और कंस द्वारा मारने के प्रयास के दौरान वह उसके हाथों से मुक्त होकर आकाश मार्ग से उड़ती हुई इस पर्वत पर आकर स्थापित हुईं। इस कथा का उल्लेख दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय के 42वें श्लोक में भी मिलता है, जिससे इस स्थान की धार्मिक महत्ता और गहरी हो जाती है।
मंदिर की संरचना और आस्था का केंद्र
मुख्य मंदिर में सिंहवाहिनी, अष्टभुजाधारी मां नंदनी की श्वेत वर्ण की पाषाण प्रतिमा स्थापित है। यह धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक और भौगोलिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। यहां प्रतिवर्ष चारों नवरात्रों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
क्या कहती हैं लोककथाएं और परंपराएं?
नंदनी माता धाम से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां नंदनी बड़ोदिया के गरबा मंडलों में आई थीं, जहां कुम्हार प्रजाति के एक व्यक्ति द्वारा पहचान जानने के प्रयास पर देवी ने श्राप दिया।
इसी कारण बड़ोदिया में आज भी कुम्हार जाति के परिवार नहीं बसे हैं। इसके अलावा एक परंपरा के अनुसार मंदिर परिसर में होली प्रज्वलित होने के बाद ही बड़ोदिया और आसपास के गांवों में होली जलाई जाती है।
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