बाड़मेर में थार महोत्सव 2025 के रंगारंग कार्यक्रम में पारंपरिक संस्कृति, लोक जीवन और आभूषणों की झलक के बीच नक्षत्री चौधरी और धर्मेंद्र डाबी ने अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्व के दम पर ‘थार सुंदरी 2025’ और ‘थारश्री 2025’ का ताज अपने नाम किया। प्रतियोगिता में थार की संस्कृति, परिधान और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां स्थानीय और बाहरी प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
थार महोत्सव: नक्षत्री ‘थार सुंदरी 2025’ तो धर्मेंद्र डाबी बने ‘थारश्री 2025’, दोनों ने बताई अपने मन की बात
Thar Mahotsav 2025: बाड़मेर में आयोजित थार महोत्सव में मुंबई की नक्षत्री चौधरी ने ‘थार सुंदरी 2025’ और स्थानीय मैकेनिक धर्मेंद्र डाबी ने ‘थारश्री 2025’ का खिताब जीता। दोनों ने थार की संस्कृति को सम्मानित करने और परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
मुंबई से आई नक्षत्री ने जीता सबका दिल
नक्षत्री चौधरी, जो वर्तमान में मुंबई के सोफिया कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं, खास तौर पर थार सुंदरी प्रतियोगिता में भाग लेने बाड़मेर पहुंची थीं। उन्होंने पारंपरिक राजस्थानी परिधान और करीब 30 तोले के सोने के आभूषण पहनकर मंच पर रैंप वॉक किया। नक्षत्री ने अपने आत्मविश्वास, शालीनता और सांस्कृतिक प्रस्तुति के दम पर निर्णायक मंडल को प्रभावित किया और ‘थार सुंदरी 2025’ का ताज हासिल किया।
प्रतियोगिता जीतने के बाद नक्षत्री ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि वे थार की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने में सफल रहीं। उन्होंने कहा कि हर लड़की अपने आप में खूबसूरत है। इस मंच पर आई हर प्रतिभागी शानदार थी। मैं आने वाले समय में बेटियों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहती हूं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में कपड़े, आभूषण, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को ध्यान में रखकर चयन किया गया।
मैकेनिक धर्मेंद्र डाबी बने ‘थारश्री 2025’
बाड़मेर के मोटर मैकेनिक धर्मेंद्र डाबी ने पारंपरिक वेशभूषा में तैयार होकर ‘थारश्री 2025’ का खिताब अपने नाम किया। धर्मेंद्र ने बताया कि वे पिछले डेढ़-दो साल से इस प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे थे और उनका सपना आखिरकार पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि थार श्री बनना मेरे लिए गर्व का क्षण है। मैं युवाओं से आग्रह करता हूं कि वे हमारी थार की कला, परंपरा और संस्कृति को आगे बढ़ाएं।
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धर्मेंद्र को निर्णायकों ने पोशाक, व्यक्तित्व और पारंपरिक प्रस्तुति के आधार पर विजेता घोषित किया। उनके आत्मविश्वास और लोकसंस्कृति के प्रति लगाव ने उन्हें इस खिताब तक पहुंचाया।
थार की संस्कृति का अनूठा उत्सव
कार्यक्रम के दौरान थार क्षेत्र की लोक वेशभूषा, गीत-संगीत, घुड़सवारी और लोक कलाओं का शानदार प्रदर्शन किया गया। घुड़सवारी प्रतियोगिता में बाड़मेर निवासी रूपसिंह अपने घोड़े श्याम के साथ पहुंचे और दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। पूरे आयोजन में थार की पारंपरिक पहचान और लोकसंस्कृति की झलक ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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