शादियों के मुहूर्त शुरू होने वाले हैं। ऐसे में लोग ज्योतिषियों के पास कुंडली मिलान के लिए पहुंच रहे हैं। कुंडली मिलान करवाते समय तीन बातों का ध्यान रखें। पहला ग्रह मिलान, दूसरा नाड़ी दोष और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण राशि मिलान में नवांश कुंडली का मिलान। इससे रिश्ता तो अटूट रहेगा ही आपका जीवन भी कष्टों से मुक्त होगा।
शिमला के ठियोग निवासी दिलाराम शास्त्री के अनुसार मिलान में आम तौर पर ज्योतिषी नवांश कुंडली की उपेक्षा कर रहे हैं। 20 साल पहले हिमाचल में नवांश मिलान का भी खूब चलन था, लेकिन अब यह पहले जैसा नहीं है।
ज्योतिष वेद का प्रामाणिक एवं तर्कसंगत अंग है। इसमें नवांश कुंडली की विशेषतया विवाह मिलान एवं विवाह मुहूर्त में सर्वाधिक उपयोगिता है। अष्टकूटों में भकूट दोष विवाह मिलान में सर्वाधिक दोषपूर्ण माना जाता है, लेकिन अगर राशि स्वामी की मैत्री हो तो ग्राह्य माना जाता है। यदि वर-वधू की कुंडलियों में राशीश शत्रुता हो तो इस स्थिति में राशियों के नवांश स्वामी मित्र राशि हो तो यह दोष समाप्त हो जाता है।
इतना ही नहीं गण, राशि, योनि, तारा आदि दोष भी समाप्त हो जाते हैं। किसी भी राशि या लग्न के नौवें भाग को नवांश कहते हैं। नवांश कुंडली से अभिप्राय किसी भी राशि या लग्न का नौवें भाग से है। विवाह मुहूर्त की लग्न पत्रिका के शोधन में विवाह लग्न में नवांश का विशेष महत्व है। प्राय: विवाह मुहूर्त में नवांश के गणित की जटिल प्रक्रिया एवं अनभिज्ञता के कारण विवाह लग्न में इसकी उपेक्षा हो रही है।
विवाह लग्नों की समयावधि भिन्न-भिन्न लग्नों के अनुसार एक घंटे 30 मिनट से दो घंटे 20 मिनट होती है। यह सारा समय कन्या संप्रदान के लिए ग्राह्य नहीं है, अपितु शास्त्रोक्त नवांश के अनुसार ठीक समय 10 से 15 मिनट तक का होता है। इसे विवाह लग्न के नवांश की संज्ञा दी गई है।