शक्ति के दम पर तीनों लोकों पर अपना दबदबा कायम करने वाला लंकापति रावण अपनी एक गलती की वजह से इस चमत्कारी शिवलिंग के आगे हार गया था। यही नहीं उसकी एक इच्छा भी अधूरी रह गई थी। आइए जानते हैं इस शिवलिंग की पूरी कहानी-
इस चमत्कारी शिवलिंग के आगे हार गया था लंकापति रावण
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कहते हैं कि रावण तीनों लोकों पर अपना राज कायम करने के लिए कैलाश पर्वत पर तपस्या कर रहा था। भगवान शिव को खुश करने के लिए इसने कई वर्षों तक कठोर तपस्या की। आखिरकार जब भोलेनाथ प्रसन्न नहीं हुए तो रावण ने अपने 10 सिर हवन में काटकर चढ़ा दिए थे।
इसके बाद भगवान भोलेनाथ रावण की तपस्या से खुश हुए और वरदान देने के लिए प्रकट हुए। भोलेनाथ ने रावण के सारे सिर उसे वापस दे दिए। यही नहीं भोलेनाथ ने रावण को असीम शक्तियां भी दी जिससे वह परम शक्तिशाली बन गया था।
इसी दौरान रावण ने अपनी एक और इच्छा जताई। उसने कहा कि वह भगवान शिव को लंका ले जाना चाहता है। भगवान शिव ने उसकी ये इच्छा भी पूरी की और शिवलिंग में परिवर्तित हो गए। मगर उन्होंने कहा कि वह जहां मंदिर बनवाएगा वहीं, इस शिवलिंग को जमीन पर रखे।
रावण भी कैलाश से लंका के लिए चल पड़ा। मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था। वह अभी हिमालय से गुजर ही रहा था कि रास्ते में उसे लघुशंका जाना पड़ा। वह बैजनाथ में रुका और यहां भेड़ें चरा रहे एक गडरिए को देखा।