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नए जिलों पर सियासत तेज: सुधीर शर्मा ने कसा तंज, बोले-'घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने'

Thu, 15 Oct 2026 05:25 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 15 Oct 2026 05:25 PM IST
सार

प्रदेश सरकार की ओर से नए जिलों के गठन के लिए आयोग बनाने की चर्चा के बीच भाजपा नेता ओर धर्मशाला से विधायक सुधीर शर्मा ने सरकार की मंशा, आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं।

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Sudhir Sharma takes a dig, remarking—"Nothing to eat at home, yet off she goes to roast grain
सुधीर शर्मा। - फोटो : संवाद

नए जिलों के गठन की चर्चा के बीच धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हमीरपुर छात्र एसोसिएशन के हमीर संगम कार्यक्रम में सुधीर शर्मा ने नए जिलों के गठन की चर्चा को जनता का ध्यान भटकाने का शगूफा करार दिया। उन्होंने कहा कि 'घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने।' सुधीर ने कहा कि प्रदेश पहले ही वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में नए जिले बनाने के बजाय मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और सरकारी कामकाज में तेजी लाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नए जिलों के गठन से प्रदेश पर कई सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के सामने बुनियादी विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटाने की चुनौती है, तो नए जिलों के गठन के लिए पैसा कहां से आएगा।

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Sudhir Sharma takes a dig, remarking—"Nothing to eat at home, yet off she goes to roast grain

भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार नए जिलों की चर्चा के जरिये जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि लोग महीनों तक इसी बहस में उलझे रहेंगे कि कौन-सा नया जिला बनेगा, उनका क्षेत्र किस जिले में शामिल होगा और उन्हें किस जिला मुख्यालय में जाना पड़ेगा। उनके अनुसार, करीब छह महीने तक चलने वाली इस चर्चा के बीच प्रदेश की आर्थिक स्थिति, विकास कार्यों और आम जनता की समस्याओं से जुड़े मुद्दे पीछे छूट सकते हैं।

 

Sudhir Sharma takes a dig, remarking—"Nothing to eat at home, yet off she goes to roast grain

सुधीर ने कहा कि प्रदेश में सड़कों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई चुनौतियां हैं। जब सड़कों के गड्ढे भरने जैसे जरूरी कार्यों के लिए धन की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार को नए जिलों के गठन पर होने वाले खर्च का भी आकलन करना चाहिए। भाजपा विधायक ने कांग्रेस सरकार की दस चुनावी गारंटियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी वादों को पूरा करने में नाकाम रही है और अब नए जिलों की चर्चा के जरिये जनता का ध्यान दूसरी ओर मोड़ने की कोशिश कर रही है।

 

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नए जिले नहीं, स्मार्ट वर्किंग की जरूरत
सुधीर ने कहा कि मौजूदा दौर में प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नए जिले बनाना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ स्मार्ट वर्किंग को बढ़ावा देने की जरूरत है, ताकि लोगों को छोटे-छोटे सरकारी कामों के लिए कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने कहा कि सरकारी फाइलों का निपटारा समयबद्ध तरीके से होना चाहिए और नागरिकों को सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध करवाई जानी चाहिए।

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