नवरात्रि में इस देवी के मंदिर में आने वाला कोई भी खाली हाथ नहीं आता, बस यहां आकर ये एक काम करना पड़ता है।
नवरात्रि 2018: देवी के इस मंदिर से कोई नहीं जाता खाली हाथ, ऐसा करने से भर जाती है सूनी गोद!
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उत्तराखंड के रुड़की में चुड़ियाला गांव स्थित प्राचीन चूड़ामणि देवी सिद्धपीठ मंदिर पर वैसे तो प्रतिदिन मां के दर्शन करने वालों का तांता लगा रहता है, लेकिन इन दिनों नवरात्रों में दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर में पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि यहां मांगी गई मुराद कभी भी खाली नहीं जाती। खासतौर पर पुत्र रत्न की प्राप्ति की कामना को लेकर यहां बड़ी दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा करने आते हैं।
मंदिर के पुजारी पंडित अनिरुद्ध शर्मा के अनुसार माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किये जाने से क्षुब्ध माता सती ने यज्ञ मे कूदकर उसे विध्वंस कर दिया था। भगवान शिव जब माता सती के मृत शरीर को ले जा रहे थे। उस समय माता सती का चूड़ामणि इस स्थान पर गिर गया था।
इसके बाद यहां माता की पिंडी स्थापित कर भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। यह प्राचीन सिद्धपीठ मंदिर कालांतर मे श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां दूरदराज से माता के दर्शन करने वालों की भीड़ लगी रहती है। इन दिनों मंदिर प्रांगण मे मेले का भी आयोजन शुरू हो जाता है।
कभी छोटे परिसर वाला मंदिर अब विशाल परिसर में भव्य मंदिर बना है। वहां कभी घनघोर जंगल हुआ करता था और जंगली जानवर खुलेआम विचरण करते रहते थे। यही नही शेरों की दहाड़ भी गुंजा करती थी। गांव के बुजुर्ग बताते है कि उनके पूर्वज इस बात की जानकारी देते थे कि शेर रोज माता की पिंडी पर शाम को मत्था टेकने आते थे ।