नवरात्रि का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व होता है। हर वर्ष 2 मुख्य नवरात्रि और 2 गुप्त नवरात्रि होते है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर से 7 अक्टूबर तक रहेंगे। वैसे तो मां के मंदिरों में काफी भारी मात्रा में भक्तों की तादाद देखने को मिलती है। परंतु नवरात्रि के नौ दिनों में मां के 51 शक्तिपीठों के दर्शन का विशेष महत्व है। नवरात्रि में इन शक्तिपीठ मंदिरों के दर्शन मात्र से सभी मनोकमनाएं पूर्ण हो जाती है। आइए जानते हैं माता के 51 शक्तिपीठों के बारे में...
29 सितंबर से शुरू होंगे शारदीय नवरात्रि, जानें 51 शक्तिपीठों के नाम
कालीपीठ- कालिका कोलकाता ,कामगिरि- कामाख्या असम, तारा तेरणी भुवनेश्वर, पडा बिमला उड़ीसा, किरीट- विमला पश्चिम बंगाल, उमा उत्तरप्रदेश, करवीरपुर या शिवहरकर महाराष्ट्र , श्रीपर्वत- श्रीसुंदरी कश्मीर, वाराणसी- विशालाक्षी उत्तरप्रदेश, सर्वेशेल या गोदावरीतीर आंध्रप्रदेश, विरजा- विरजाक्षेत्र उड़ीसा, मानसा-दाक्षायणी तिब्बत, महामाया नेपाल, हिंगलाज पकिस्तान, सुगंधा-सुनंदा बांग्लादेश, महामाया कश्मीर
ज्वालामुखी- सिद्धिदा (अंबिका)हिमाचल प्रदेश, वैद्यनाथ-जयदुर्गा झारखंड, गंडकी नेपाल, बहुला (चंडिका) बंगाल, उज्जयिनी-मांगल्य चंडिका बंगाल, त्रिपुर सुंदरी त्रिपुरा, चट्टल -भवानी बांग्लादेश, त्रिस्रोता-भ्रामरी पश्चिमबंगाल, प्रयाग-ललिता उत्तर प्रदेश, जयंती आसाम, युगाद्या-भूतधात्री पश्चिम बंगाल, कन्याश्रम-सर्वाणी कन्याकुमारी, कुरुक्षेत्र- सावित्री हरियाणा, मणिदेविक-गायत्री अजमेर, श्रीशैल- महालक्ष्मी बांग्लादेश, कांची- देवगर्भा बोलीपुर
पंचसागर- वाराही उत्तर प्रदेश, करतोयातट-अपर्णा ढाका, विभाष-कपालिनी पश्चिम बंगाल, कालमाधव-देवी काली मध्यप्रदेश, शोणदेश-नर्मदा (शोणाक्षी) मध्यप्रदेश, रामगिरि-शिवानी उत्तरप्रदेश, शुचि-नारायणी तमिलनाडु, प्रभास-चंद्रभागा गुजरात, भैरवपर्वत-अवंती मध्यप्रदेश, जनस्थान-भ्रामरी महाराष्ट्र, रत्नावली-कुमारी कोलकाता, मिथिला- उमा (महादेवी) भारत-नेपाल सीमा पर, नलहाटी- कालिका पश्चिम बंगाल, देवघर- बैद्यनाथ झारखंड
इस नवरात्री कराएं 9 दिन का अनुष्ठान , माँ दुर्गा के आशीर्वाद से होगी सभी मनोकामनाएं पूरी
