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हलछठ 2019: पुत्रवती महिलाओं के लिए खास है यह व्रत, संतान की रक्षा के लिए रखती हैं उपवास

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत राय Updated Wed, 21 Aug 2019 11:32 AM IST
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balram jayanti celebrate on 21st august
- फोटो : social media
हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलरामजी की जयंती मनाई जाती है। मान्यताओं के मुताबिक, भगवान विष्णु के हर अवतार के साथ शेषनाग का भी अवतार हुआ है और वे सदा विष्णु के हर अवतार के साथ रहे। द्वापर युग में भी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से पहले शेषनाग ने बलराम का अवतार लिया था। बलराम जयंती का पर्व इस साल 21 अगस्त को मनाया जाएगा। यह दिन उन महिलाओं के लिए खास होता है जो संतान प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने पर संतान की प्राप्ति होती है। 


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षष्ठी तिथि की शुभ मूहर्त 21 अगस्त यानी कि बुधवार सुबह 5.30 बजे से शुरू हो कर 22 अगस्त, वृहस्पतिवार की सुबह 7.06 बजे तक रहेगा। बलराम जयंती को हलषष्ठी और हलछठ के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि बलराम का मुख्य शस्त्र हल और मूसल है, इसलिए उन्हें हलधर भी कहा जाता है। इस दिन हल बिना चले धरती से पैदा होने वाले अन्न, भाजी खाने का महत्व है। इस दिन गाय के दूध व दही के सेवन को वर्जित माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन संतान की कामना करके जो महिलाएं व्रत रखती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं, उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है। 

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किसानों के घर में इस दिन हल की और बैल की पूजा की जाती है। महिलाएं पुत्र की रक्षा के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को पसई के चावल खाकर पारण करती हैं। इस दिन महिलाएं तालाब में उगे हुए फलों या चावल खाकर व्रत करती हैं, इस व्रत में गाय के दूध या दूध से बनी हुइ कोई भी चीज का सेवन नहीं किया जाता हैं।

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शास्त्रों के अनुसार बलराम (बलभद्र) भगवान वासुदेव के ब्यूह या स्वरूप हैं। बलराम का जन्म यदूकुल के चंद्रवंश में हुआ था। कंस ने अपनी प्रिय बहन देवकी का विवाह यदुवंशी वासुदेव से विधिपुर्वक कराया था। जब कंस अपनी बहन को रथ में बैठा कर वासुदेव के घर ले जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन की आठवीं संतान ही उसे खत्म करेगी। जिसके बाद कंस ने अपनी बहन को कारागार में बंद कर दिया था और उसके 6 पुत्रों को मार दिया, 7वें पुत्र के रूप में नाग के अवतार बलराम जी थे जिसे श्री हरि ने योगमाया से रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया। बलराम जी को शेषनाग का अवतार भी कहते हैं।

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बलराम गदा युद्ध में निपुण थे
बलराम गदायुद्ध में प्रवीण थे, घृतराष्ट्र पुत्र दुर्योधन बलरामजी का ही शिष्य था। इसी से कई बार इन्होंने जरासंध को पराजित किया था। श्रीकृष्ण के पुत्र शांब जब दुर्योधन की कन्या लक्ष्मणा का हरण करते समय कौरव सेना द्वारा बंदी कर लिए गए तो बलभद्र ने ही उन्हें छुड़ाया था।

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