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Holika Dahan: होलिका दहन की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए? जानें सही नियम और पूजा विधि

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 25 Feb 2026 01:25 PM IST
सार

Holika Dahan Puja Vidhi: धार्मिक मान्यता है कि यदि होलिका दहन से पहले बताए गए नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। आइए जानते हैं इस पर्व को विधि-विधान से मनाने के आवश्यक नियम।

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होलिका दहन की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए? - फोटो : Amar Ujala

Holika Dahan Parikrama Niyam: हिंदू परंपरा में होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर परिवार के सभी सदस्य मिलकर होलिका माता का विधि पूर्वक पूजन करते हैं और रात्रि में शुभ समय पर अग्नि प्रज्वलित की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि यदि होलिका दहन से पहले बताए गए नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। कई बार लोग जानकारी के अभाव में छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे उन्हें अपेक्षित आध्यात्मिक लाभ नहीं मिल पाता। आइए जानते हैं इस पर्व को विधि-विधान से मनाने के आवश्यक नियम।



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इन नियमों का रखें विशेष ध्यान - फोटो : adobe stock

इन नियमों का रखें विशेष ध्यान
परिक्रमा और अर्पण की विधि

होलिका दहन से पहले कच्चे सूत या कलावा को लपेटते हुए 5 से 7 बार परिक्रमा करनी चाहिए। अग्नि प्रज्वलित होने के बाद उसमें जौ या अक्षत अर्पित करना शुभ माना जाता है। नई फसल के दानों को अग्नि में भूनकर प्रसाद के रूप में घर लाया जाता है और परिवारजनों में बांटा जाता है।
 

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इन नियमों का रखें विशेष ध्यान - फोटो : amar ujala
वस्त्रों का चयन
इस दिन सफेद, पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना गया है। काले या चमड़े से बने वस्त्रों से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। महिलाओं को अत्यधिक भड़कीले या गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए और सादगीपूर्ण वस्त्र धारण करना उचित माना गया है।

तामसिक भोजन से परहेज
होलिका दहन के दिन मांस और मदिरा का सेवन वर्जित माना गया है। इस दिन सात्विक भोजन करना और मन, वचन व कर्म से पवित्रता बनाए रखना ही शुभ फलदायी माना जाता है।
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अग्नि के पास ठहरना और भस्म का महत्व - फोटो : adobe stock
अग्नि के पास ठहरना और भस्म का महत्व
अक्सर लोग होलिका जलाकर तुरंत घर लौट आते हैं, जबकि मान्यता है कि कुछ समय तक वहीं रुककर अग्नि की परिक्रमा करनी चाहिए। कहा जाता है कि इस अग्नि में विशेष सकारात्मक ऊर्जा होती है, जो नकारात्मक प्रभावों को नष्ट करती है। अगले दिन सुबह होलिका की राख को घर लाकर तिलक लगाने और घर के चारों कोनों में छिड़कने से वास्तु दोष दूर होते हैं और घर में शुभता बनी रहती है।
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महिलाओं के लिए विशेष सावधानी - फोटो : Amar Ujala
महिलाओं के लिए विशेष सावधानी
पूजा के समय महिलाओं को बाल खुले नहीं रखने चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि खुले बाल नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं, इसलिए पूजा के दौरान सुसज्जित और संयमित रूप में रहना चाहिए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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