Rangbhari Ekadashi 2026: रंगभरी एकादशी हिंदू धर्म का मुख्य पर्व है, जिसे आमलकी एकादशी भी कहते हैं। मान्यता है कि, इस दिन विष्णु जी के साथ-साथ शिव परिवार की उपासना करने से साधक के जीवन में सुख-सौभाग्य बढ़ता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, इस शुभ तिथि पर विवाह के बाद शिव और पार्वती का प्रथम आगमन काशी में हुआ था। इसलिए रंगभरी एकादशी की विशेष रौनक काशी में देखने को मिलती हैं। इसी दिन से काशी में होली का उत्सव भी प्रारंभ हो जाता है। इसके अलावा इस शुभ अवसर पर सभी शिवभक्त श्रद्धा भाव से शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि, साल 2026 में यह एकादशी कब मनाई जाएगी।
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Rangbhari Ekadashi 2026: 26 या 27 फरवरी कब है रंगभरी एकादशी ? जानें तिथि-मुहूर्त और महत्व
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Tue, 24 Feb 2026 02:36 PM IST
सार
Rangbhari Ekadashi 2026: रंगभरी एकादशी को आमलकी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन मुख्य रूप से भगवान शिव और विष्णु जी की उपासना की जाती है। इससे प्रभु शीघ्र प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं
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Rangbhari Ekadashi 2026
- फोटो : अमर उजाला
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Rangbhari Ekadashi 2026
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रंगभरी एकादशी 2026
- इस साल रंगभरी एकादशी 27 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।
- पूजा के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 16 मिनट से लेकर 1 बजकर 02 मिनट तक रहने वाला है।
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:17 बजे से 6:05 बजे तक रहेगा।
- इस तिथि पर आर्द्रा नक्षत्र और आयुष्मान का विशेष संयोग रहेगा।
- रंगभरी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी को सुबह 6:47 से 9:06 तक की बीच के समय में किया जा सकता है।
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Rangbhari Ekadashi 2026
- फोटो : freepik
रंगभरी एकादशी पर क्या करें
- रंगभरी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और शिव जी की पूजा करनी चाहिए।
- आंवले की पेड़ की उपासना व परिक्रमा करना शुभ होता है।
- देवी पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करें। इससे वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है।
- शिवलिंग पर जलाभिषेक करना चाहिए।
Rangbhari Ekadashi 2026
- फोटो : freepik
- महादेव को 11 बेलपत्र चढ़ाएं और शिवलिंग पर गेहूं भी अर्पित कर दें।
- रंगभरी एकादशी पर लक्ष्मी जी को फूल अर्पित करें और सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
- विष्णु जी की पूजा करें और प्रभु को गुड़, चना, केला और केसर खीर का भोग लगा दें।
- शिव परिवार की आरती करें और सफेद चीजों का दान करें। इससे मानसिक शांति बनी रहती हैं।
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Rangbhari Ekadashi 2026
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शिव जी की आरती
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
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