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दुनिया में केवल काशी में खेली जाती है अनोखी ‘मसान होली’, जानें भगवान शिव से जुड़ा रहस्य

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 24 Feb 2026 05:40 PM IST
सार

Masaan Holi 2026: काशी की मसान होली रंगों से नहीं बल्कि चिता की भस्म से मनाई जाती है, जो जीवन की नश्वरता और मुक्ति का प्रतीक है। यह परंपरा भगवान शिव की नगरी में विशेष रूप से श्मशान घाट पर आयोजित होती है और मृत्यु के बीच जीवन के उत्सव का संदेश देती है। इस अनोखे आयोजन में आध्यात्म, आस्था और दर्शन का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

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Masaan Holi 2026 in Kashi Unique Bhasma Holi at Manikarnika Ghat and Its Deep Connection to Lord Shiva
मसान होली 2026 - फोटो : amar ujala

Masan Holi : दुनिया में जहां होली को रंगों, गुलाल और उमंग के उत्सव के रूप में जाना जाता है, वहीं वाराणसी यानी काशी में यह पर्व एक बिल्कुल अलग और अद्भुत रूप में दिखाई देता है। यहां पारंपरिक रंगों की जगह श्मशान की चिता की भस्म से होली खेली जाती है, जिसे ‘मसान होली’ कहा जाता है। यह अनोखी परंपरा काशी को अन्य सभी स्थानों से अलग पहचान देती है और इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।


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मसान होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक अर्थों से जुड़ी परंपरा है, जिसका संबंध सीधे भगवान शिव से माना जाता है। शिव, जो श्मशान वासी और वैराग्य के प्रतीक हैं, उनकी नगरी में जीवन और मृत्यु के इस अद्भुत संगम के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि मुक्ति का मार्ग है। राख उड़ाकर मनुष्य को जीवन की नश्वरता और आत्मा की अमरता का बोध कराया जाता है,यही काशी की मसान होली का गूढ़ रहस्य है।
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Masan holi 2026 - फोटो : अमर उजाला

क्या है पौराणिक मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर काशी पधारे थे। इस अवसर पर देवताओं ने गुलाल के साथ हर्षोल्लास से होली खेली। किंतु शिव के गण-भूत, प्रेत, अघोरी और अन्य श्मशानवासी भक्त—इस उत्सव में सम्मिलित नहीं हो सके। कहा जाता है कि अपने इन प्रिय गणों को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने अगले दिन श्मशान में चिता की भस्म से होली खेली। तभी से काशी में मसान होली की परंपरा चली आ रही है, जो शिव के अघोर और वैराग्य स्वरूप की प्रतीक मानी जाती है।

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Masan holi 2026 - फोटो : अमर उजाला

कब मनाई जाएगी मसान होली 2026?
काशी की मसान होली, रंगभरी एकादशी के अगले दिन मनाई जाती है। वर्ष 2026 में रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को है, इसलिए 28 फरवरी 2026 को मसान होली का आयोजन होगा। यह पर्व मुख्य होली से पहले मनाया जाता है और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष माना जाता है।

Masaan Holi 2026 in Kashi Unique Bhasma Holi at Manikarnika Ghat and Its Deep Connection to Lord Shiva
Masan holi 2026 - फोटो : अमर उजाला

कहां होती है राख की यह अनोखी होली?
सदियों से मसान होली का प्रमुख आयोजन मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर होता आया है। विशेष रूप से मणिकर्णिका घाट स्थित महाश्मशान नाथ मंदिर से इसकी शुरुआत मानी जाती है। यहां विधि-विधान से आरती और पूजन के बाद चिता की भस्म से होली खेली जाती है। यह वही स्थान है, जिसे सनातन परंपरा में मोक्ष का द्वार कहा गया है।

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Masan holi 2026 - फोटो : अमर उजाला

कैसा होता है मसान होली का दृश्य?
सुबह से ही घाटों पर श्रद्धालुओं और साधु-संतों की भीड़ उमड़ने लगती है। डमरू और नगाड़ों की ध्वनि के बीच “हर-हर महादेव” के जयकारे गूंजते हैं। एक ओर चिताएं प्रज्ज्वलित होती रहती हैं, तो दूसरी ओर भक्त भस्म उड़ाकर नृत्य करते हैं। यहां उल्लास और विरक्ति का अनोखा संगम देखने को मिलता है- मानो जीवन और मृत्यु एक साथ उपस्थित हों। सामान्य होली की चटकीली रंगत के विपरीत, यहां राख, बेलपत्र और धतूरा का महत्व होता है, जो शिव के अघोर रूप का स्मरण कराते हैं।

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