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Mathura Vrindavan Holi 2026: मथुरा-वृंदावन में कब से शुरू होली? लड्डू होली से लट्ठमार तक जानें सभी की तारीखें
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्वेता सिंह
Updated Tue, 24 Feb 2026 04:43 PM IST
सार
Braj Ki Holi: होली फाल्गुन पूर्णिमा से शुरू होकर दो प्रमुख चरणों होलिका दहन और रंग वाली होली में मनाई जाती है। ब्रज क्षेत्र में यह उत्सव कई दिनों तक चलता है और धार्मिक आस्था से जुड़ा होता है। मथुरा, वृंदावन और बरसाना में पारंपरिक होली जैसे लड्डू होली, लट्ठमार होली और फूलों की होली देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। यह पर्व प्रेम, भक्ति, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है।
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ब्रज की होली
- फोटो : amar ujala
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Mathura Vrindavan Holi 2026: होली भारत के सबसे आनंदमय और रंगों से सराबोर त्योहारों में से एक है, जो प्रेम, उल्लास और आपसी भाईचारे का संदेश देता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा से आरंभ होने वाला यह पर्व पहले दिन होलिका दहन और दूसरे दिन रंगों की होली के रूप में मनाया जाता है। यह सिर्फ रंग खेलने का त्योहार नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय और भक्ति भाव की अभिव्यक्ति का भी प्रतीक है।
बरसाना की लड्डू होली – 25 फरवरी 2026, बुधवार
बरसाना में होली की शुरुआत लड्डू होली से होती है। यह उत्सव श्री लाडली जी मंदिर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन पुजारी और भक्त एक-दूसरे पर लड्डू बरसाकर होली की शुभ शुरुआत करते हैं। मान्यता है कि यह परंपरा राधा रानी की नगरी में प्रेम और स्नेह के प्रतीक के रूप में निभाई जाती है। वातावरण भक्ति गीतों और राधा-कृष्ण के जयकारों से गूंज उठता है।
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लट्ठमार होली
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बरसाना की लट्ठमार होली – 26 फरवरी 2026, गुरुवार
लड्डू होली के अगले दिन बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली खेली जाती है। इस दिन नंदगांव से आए पुरुषों पर बरसाना की महिलाएं परंपरागत लाठियों से प्रहार करती हैं, जबकि पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं। यह रस्म राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी मानी जाती है। इसके अगले दिन नंदगांव में भी इसी परंपरा को निभाया जाता है, जहां रंग और उमंग का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है।
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वृंदावन की फूलों वाली होली
वृंदावन की फूलों वाली होली – 28 फरवरी 2026, शनिवार
28 फरवरी को वृंदावन में फूलों वाली होली खेली जाएगी। यह विशेष आयोजन बांके बिहारी मंदिर में होता है, जहां भक्तों पर रंगों की जगह पुष्प वर्षा की जाती है। उसी दिन रंगभरी एकादशी का पर्व भी मनाया जाएगा, जिसमें देवी-देवताओं को गुलाल अर्पित किया जाता है। वृंदावन में विधवाओं की होली भी इसी दिन आयोजित होती है, जो सामाजिक समरसता और नई शुरुआत का संदेश देती है।
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गोकुल में छड़ीमार होली
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गोकुल की छड़ी मार होली – 1 मार्च 2026, रविवार
गोकुल में छड़ी मार होली 1 मार्च को मनाई जाएगी। यह उत्सव नन्दभवन से प्रारंभ होता है, जहां ठाकुर जी को भोग अर्पित करने के बाद आयोजन शुरू होता है। इस परंपरा में लाठियों की बजाय छड़ी का उपयोग किया जाता है, जो इसे बरसाना की लट्ठमार होली से अलग बनाता है। यहां भी राधा-कृष्ण की लीलाओं का स्मरण करते हुए उत्सव मनाया जाता है।
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