Kokila Vrat 2026 Kab Hai: आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि पर रखा जाने वाला कोकिला व्रत धार्मिक आस्था और परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं और विवाह योग्य युवतियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और स्थिरता बनी रहती है, वहीं पति की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी पूर्ण होती है। अविवाहित लड़कियां इस व्रत को मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। कुछ क्षेत्रों में यह व्रत आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर श्रावण पूर्णिमा तक पूरे एक महीने तक भी किया जाता है।
Kokila Vrat 2026: सुहागिनों और कुंवारी लड़कियों के लिए क्यों खास है कोकिला व्रत? जानें पूजा विधि, कथा और महत्व
Kokila Vrat 2026: कोकिला व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं और विवाह योग्य युवतियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं इस साल कोकिला व्रत कब रखा जाएगा और इसका महत्व क्या है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोकिला व्रत कब है?
साल 2026 में कोकिला व्रत की तिथि पंचांग के अनुसार 28 जुलाई, मंगलवार को पड़ेगी। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 28 जुलाई की शाम 6 बजकर 18 मिनट से होगा और इसका समापन 29 जुलाई को रात 8 बजकर 5 मिनट पर होगा। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए व्रत 28 जुलाई को ही रखा जाएगा, जिसे शुभ माना गया है।
पूजा का समय
पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष रूप से शुभ समय माना जाता है। 28 जुलाई 2026 को प्रदोष काल शाम 7 बजकर 15 मिनट से रात 9 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकते हैं। इस समय की गई पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।
कोकिला व्रत की कथा
कोकिला व्रत के पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार, एक समय माता पार्वती को श्राप के कारण कोयल का रूप धारण करना पड़ा था। इस अवस्था में भी उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप और भक्ति जारी रखी। उनकी अटूट साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और श्राप से मुक्त किया। इसके पश्चात माता पार्वती ने अपना दिव्य स्वरूप पुनः प्राप्त किया और भगवान शिव के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ। इसी कथा के कारण इस व्रत को “कोकिला व्रत” कहा जाता है।
कोकिला व्रत का महत्व
यह व्रत विशेष रूप से अविवाहित कन्याओं के लिए शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो युवतियां इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं, उन्हें योग्य और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त हो सकता है। भगवान शिव और माता पार्वती को आदर्श दंपति के रूप में देखा जाता है, इसलिए उनकी आराधना से वैवाहिक जीवन सुखमय होने की कामना की जाती है।
वहीं, विवाहित महिलाओं के लिए भी यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन महिलाएं अपने पति के स्वास्थ्य, लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। धार्मिक विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा से किया गया यह व्रत दांपत्य जीवन की कठिनाइयों को कम करने में सहायक होता है और वैवाहिक संबंधों में प्रेम और समझ को मजबूत बनाता है।
Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा पर कैसे करें व्रत और दान? जानें महत्व और घर पर पूजा की सरल विधि
Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा के अवसर पर राशि अनुसार दें गुरु को खास उपहार, खुलेंगे उन्नति के द्वार
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।