Mahashivratri 2026: हर साल महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी पर मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इस शुभ तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन हुआ था। इसलिए इस दिन की गई उपासना का फल कई गुना बढ़कर साधक को प्राप्त होता है। शास्त्रों की मानें, तो महाशिवरात्रि पर सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की हर मनोकामना करते हैं। यही नहीं देवी पार्वती भी साधक पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखती हैं। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। यह दिन साधना, तप, जप और आराधना के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बनने जा रहा है। ऐसे में शिवलिंग का अभिषेक और शिव परिवार की पूजा संपूर्ण सामग्रियों से करना और भी लाभकारी हो सकता है। आइए महाशिवरात्रि की पूजन सामग्रियों को जानते हैं...
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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर पूजा में जरूर शामिल करें ये 7 खास चीजें, प्रसन्न होंगे शंकर भगवान
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Tue, 10 Feb 2026 05:10 PM IST
सार
Mahashivratri 2026: बता दें, फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर प्रारंभ होगी। इस तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा। इसलिए महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मान्य होगी।
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Mahashivratri
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Mahashivratri 2026
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महाशिवरात्रि 4 प्रहर पूजा मुहूर्त
- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 06:39 से 09:45
- रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय -शाम 09:45 से 12:52
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - सुबह 12:52 से 03:59
- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - सुबह 03:59 से 07:06
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महाशिवरात्रि 2026
- फोटो : Amar Ujala
महाशिवरात्रि 2026 संयोग
- महाशिवरात्रि के दिन सुबह 7 बजे से लेकर शाम 7 बजकर 48 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा।
- उत्तराषाढा नक्षत्र शाम 7. 48 तक रहने वाला है।
- व्यतीपात योग पूरे दिन बना रहेगा।
- निशिता काल रात 11 बजकर 52 मिनट से लेकर रात 12:42 तक रहेगा।
- अमृतकाल दोपहर 12:59 से 14:41 तक रहेगा।
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Mahashivratri 2026
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पूजन सामग्री
- शहद, चीनी, गुड़, शक्कर, तिल,
- दही, मिट्टी के दीपक, भस्म, केसर, तिल, जौ
- पीली सरसों, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के फूल
- शिव परिवार की तस्वीर, शिवलिंग, नारियल
- रक्षासूत्र, कुमकुम, सिंदूर,अक्षत , केसर, लौंग
- भगवानों के वस्त्र, सुपारी
- इलायची, आभूषण
- जनेऊ,गुलाब जल,
- मिठाई और फल, आम का पल्लव, सुपारी
- पीला कपड़ा, हवन सामग्री
- गाय का दूध,पान के पत्ते
- दान के लिए सफेद चीजें और सामग्री
- गाय का दूध, गुलाब जल, इत्र
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Shiv Ji Ki Aarti
- फोटो : Amar Ujala
शिव जी की आरती
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।