भगवती दुर्गा के आगमन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। देवी को खुश करने में पूजन-अर्चना के आलावा उनके भोग का भी विशेष महत्व होता है। ऐसे में जरूरी है कि नवरात्रि के दिन और उनसे सम्बंधित देवी मां की पसंद के हिसाब से ही भोग अर्पित किए जाएं। ऐसा करने से पूजा के फल में बहुत वृद्धि होती है।
पहले दिन घी
नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। शंकरजी की पत्नी एवं नव दुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री दुर्गा का महत्व और शक्तियां अनंत है। इस दिन मां को घी का भोग लगाने से भक्त निरोगी रहते हैं और उनके सारे दुःख ख़त्म होते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर पसंद है
नवरात्रि के दूसरे दिन मां के ब्रह्मचारिणी रूप की आराधना का विधान है। लम्बी उम्र की कामना के लिए मां को शक़्कर, सफेद मिठाई एवं मिश्री का भोग लगाया जा सकता है।
मां चंद्रघंटा के लिए दूध
नवरात्रि के तीसरे दिन यानि तृतीया को दुर्गाजी के चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है। मां के इस रूप को दूध, मेवायुक्त खीर या फिर दूध से बनी मिठाईयों का भोग लगाकर मां की कृपा पा सकते हैं। भक्तों को समस्त दुखों से मुक्ति मिलती हैं।
मालपुआ से खुश होंगी मां कुष्मांडा
नवरात्रि के चौथे दिन मां के कुष्मांडा रूप की पूजा होती हैं। देवी के इस रूप की कृपा से निर्णंय लेने की क्षमता में वृद्धि एवं मानसिक शक्ति अच्छी रहती हैं। इस तिथि को मालपुआ का भोग लगाना अच्छा होता हैं। भोग लगाने के बाद उसे बच्चों में वितरित करने से पुण्य फलों में वृद्धि होती हैं।