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Pradosh Vrat: कल रवि प्रदोष व्रत में करें इस मंत्र और चालीसा का पाठ, जानें प्रदोष काल और पूजा विधि

Sat, 11 Jul 2026 12:01 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Sat, 11 Jul 2026 12:01 PM IST
सार

Ravi Pradosh Vrat: आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जुलाई 2026, रविवार को पड़ रही है। ऐसे में इस दिन रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। आइए जानते हैं इस दिन प्रदोष काल का समय, पूजा विधि मंत्र और चालीसा।

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Ravi Pradosh Vrat Puja Vidhi shiv mantra in hindi shiva chalisa lyrics in hindi
रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि, मंत्र और चालीसा - फोटो : AI

Ravi Pradosh Vrat: कल यानी 12 जुलाई 2026, रविवार के दिन रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव आराधना करने पर व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। रवि प्रदोष के दिन भगवान शिव के साथ-साथ सूर्य देव की उपासना भी विशेष फलदायी मानी जाती है। इस व्रत के प्रभाव से पितृ दोष से राहत मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही, यह व्रत उत्तम स्वास्थ्य, लंबी आयु और समाज में मान-सम्मान प्राप्त करने के लिए भी लाभकारी माना गया है।

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प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock

प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त

  • पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 12 जुलाई को प्रातः 02:04 बजे होगा और इसका समापन उसी दिन रात्रि 10:29 बजे होगा। 
  • प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व होता है। 
  • इस दिन पूजा का शुभ समय शाम 7:20 बजे से रात 9:30 बजे तक रहेगा। 
  • इस अवधि में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
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रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि - फोटो : adobe stock

रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • प्रदोष व्रत के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
  • फिर भगवान शिवलिंग का अभिषेक गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से करें, अंत में शुद्ध जल अर्पित करें।
  • अभिषेक के पश्चात शिवलिंग पर बेलपत्र, सफेद पुष्प, चंदन, धतूरा, आक के फूल और फल अर्पित करें।
  • इसके बाद शिवलिंग के समीप घी का दीपक और धूप जलाएं।
  • पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करें तथा महामृत्युंजय मंत्र का भी उच्चारण करें।
  • इसके साथ ही शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र और रुद्राष्टकम का पाठ करें।
  • अंत में भगवान शिव की आरती कर उनसे सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें।
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भगवान शिव के मंत्र - फोटो : adobe stock
भगवान शिव के मंत्र
  • ॐ नमः शिवाय
  • ॐ नमो भगवते रुद्राय॥
  • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
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भगवान शिव के मंत्र - फोटो : adobe stock

शिव चालीसा
॥दोहा॥

जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम,देहु अभय वरदान॥

॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला।सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके।कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये।मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी।बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ।या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा।तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी।देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ।लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा।सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी।पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद माहि महिमा तुम गाई।अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई।नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी।कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई।कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी।करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।संकट ते मोहि आन उबारो॥

मात-पिता भ्राता सब होई।संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।आय हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं।जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन।मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।शारद नारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय।सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई।ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र होन कर इच्छा जोई।निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे।ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे।अन्त धाम शिवपुर में पावे॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥ दोहा ॥
नित्त नेम उठि प्रातः ही,पाठ करो चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश॥

मगसिर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान।
स्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण॥

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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