Shani Pradosh Vrat 2024 Date: शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत का विशेष महत्व है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। इस वर्ष का अंतिम शनि प्रदोष व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाएगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव की आराधना विशेष रूप से की जाती है, और यह पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होती है। ऐसा माना जाता है कि शनि प्रदोष व्रत के पालन से योग्य संतान की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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Shani Pradosh Vrat 2024: कब है साल का अंतिम प्रदोष व्रत? पुत्र प्राप्ति के लिए इस दिन करें शिव पूजा
Thu, 19 Dec 2024 11:41 AM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Thu, 19 Dec 2024 11:41 AM IST
सार
प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। इस वर्ष का अंतिम शनि प्रदोष व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाएगा।
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प्रदोष व्रत
- फोटो : Amar Ujala
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shani pradosh vrat
- फोटो : amar ujala
शनि प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
28 दिसंबर को व्रत की पूजा के लिए शुभ समय शाम 5:33 बजे से रात 8:17 बजे तक है। इस अवधि में भगवान शिव की आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सूर्यास्त का समय 5:33 बजे होगा, इसलिए इस समय प्रदोष काल में पूजा करना अधिक लाभकारी माना गया है।
28 दिसंबर को व्रत की पूजा के लिए शुभ समय शाम 5:33 बजे से रात 8:17 बजे तक है। इस अवधि में भगवान शिव की आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सूर्यास्त का समय 5:33 बजे होगा, इसलिए इस समय प्रदोष काल में पूजा करना अधिक लाभकारी माना गया है।
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Bhadrapad Pradosh Vrat
- फोटो : अमर उजाला
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:23 बजे से 6:18 बजे तक है, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:02 बजे से 12:44 बजे तक रहेगा। इन समयों में भी भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है।
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shiv ji
- फोटो : freepik
शनि प्रदोष व्रत के दिन नक्षत्र और योग
शनि प्रदोष व्रत के दिन अनुराधा नक्षत्र सुबह से रात 10:13 बजे तक रहेगा, जिसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र शुरू होगा। इसी दिन शूल योग सुबह से रात 10:24 बजे तक रहेगा, और उसके बाद गंड योग का निर्माण होगा। इन योगों के दौरान भगवान शिव की पूजा करना विशेष लाभकारी माना जाता है।
शनि प्रदोष व्रत के दिन अनुराधा नक्षत्र सुबह से रात 10:13 बजे तक रहेगा, जिसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र शुरू होगा। इसी दिन शूल योग सुबह से रात 10:24 बजे तक रहेगा, और उसके बाद गंड योग का निर्माण होगा। इन योगों के दौरान भगवान शिव की पूजा करना विशेष लाभकारी माना जाता है।
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शनि प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत संतान प्राप्ति की कामना के लिए विशेष फलदायी है। जो लोग संतानहीन हैं, वे विधिपूर्वक शनि प्रदोष व्रत रखते हैं और भगवान शिव की आराधना करते हैं तो उन्हें शिव कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, इस व्रत के पालन से जीवन के सभी कष्ट और संकट दूर हो जाते हैं। भोलेनाथ के आशीर्वाद से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति आती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत संतान प्राप्ति की कामना के लिए विशेष फलदायी है। जो लोग संतानहीन हैं, वे विधिपूर्वक शनि प्रदोष व्रत रखते हैं और भगवान शिव की आराधना करते हैं तो उन्हें शिव कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, इस व्रत के पालन से जीवन के सभी कष्ट और संकट दूर हो जाते हैं। भोलेनाथ के आशीर्वाद से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति आती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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