Traditional Festivals of South India: दक्षिण भारत में कई ऐसे पारंपरिक व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं, जो अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विशिष्टता के कारण उत्तर भारत में प्रचलित नहीं हैं। यह त्योहार दक्षिण भारतीय राज्यों में तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश में प्रचलित हैं जो मुख्य रूप से इन्हीं राज्यों में मनाए जाते हैं। ऐसे ही 16 प्रमुख व्रत एवं त्योहारों को जानिए विस्तार से।
South Indian Festivals: दक्षिण भारत के 16 अनोखे व्रत-त्योहार, उत्तर भारत में नहीं हैं इतने प्रचलित
16 Famous Festivals of South India: आइए जानते हैं दक्षिण भारत के 16 प्रमुख व्रत एवं त्योहारों को जिनके बारे में उत्तर भारत में कम लोग ही जानते हैं।
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2. ओणम (Onam - केरल)
महत्व: यह केरल का सबसे बड़ा और प्रमुख सांस्कृतिक त्योहार है, जो राजा महाबली के स्वागत में मनाया जाता है।
विशेषता: यह 10 दिनों तक चलने वाला फसल उत्सव है। इस दौरान घरों के बाहर 'पुक्कलम' (फूलों की रंगोली) बनाई जाती है, 'ओणसाद्या' (26 से अधिक व्यंजनों का पारम्परिक भोजन) परोसा जाता है और प्रसिद्ध 'वल्लमकली' (सर्प नौका दौड़ का आयोजन होता है।
3. वरमहालक्ष्मी व्रत (Varamahalakshmi Vratam - कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना)
महत्व: श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पहले आने वाले शुक्रवार को सुहागिन महिलाओं द्वारा यह व्रत रखा जाता है।
विशेषता: यह उत्तर भारत के 'करवा चौथ' की भांति दक्षिण भारत में अत्यंत लोकप्रिय है। इसमें माता लक्ष्मी के स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया जाता है और एक कलश (नारियल और वस्त्रों से सज्जित) स्थापित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
4. थिरुवाथिरा (Thiruvathira - केरल)
महत्व: यह धनु (धनुष) मास में मनाया जाने वाला भगवान शिव का पावन पर्व है।
विशेषता: यह मुख्यतः महिलाओं का त्योहार है। इस दिन महिलाएं रात भर जागकर भगवान शिव की पूजा करती हैं, पारंपरिक 'तिरुवाथिरकली' लोकनृत्य करती हैं और 'कवथु' व 'किज़ंगु' (कंदमूल) से बने विशेष सात्विक व्यंजन ग्रहण करती हैं।
5. बोनालू (Bonalu - तेलंगाना)
महत्व: यह आषाढ़ महीने में मनाया जाने वाला देवी महाकाली का एक प्रमुख लोक-उत्सव है।
विशेषता: महिलाएं मिट्टी के घड़ों (पोत) में चावल, गुड़, दूध और हल्दी से प्रसाद पकाकर, उस घड़े को नीम की पत्तियों और दीये से सजाकर सिर पर रखकर मंदिर तक यात्रा निकालती हैं।