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सावन के तीसरे मंगलवार को ऐसे करें मंगला गौरी की पूजा, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की होगी प्राप्ति

Tue, 18 Aug 2026 12:43 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 18 Aug 2026 12:43 PM IST
सार

Mangala Gauri Vrat 2026: आज 18 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत है।  सावन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और मंगलवार का दिन शक्ति स्वरूपा माता गौरी की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना गया है। 

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Mangala Gauri Vrat 2026 Third Date Puja Vidhi Mantra Katha in Hindi Mangala Gauri Vrat Kab Hai
मंगला गौरी व्रत पूजा विधि और मंत्र - फोटो : AI

विस्तार

Mangala Gauri Vrat 2026: सावन में आने वाले मंगलवार को मंगला गौरी व्रत के रूप में विशेष महत्व दिया गया है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है और सुहाग, दांपत्य सुख, परिवार की खुशहाली तथा अखंड सौभाग्य की कामना से किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और मंगलवार का दिन शक्ति स्वरूपा माता गौरी की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना गया है। इसलिए इस दिन शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करने से दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
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शिव-पार्वती को अर्पित करें लाल फूल
मंगला गौरी व्रत के दिन प्रातः स्नान करके माता पार्वती और भगवान शिव का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। माता गौरी को लाल फूल, कुमकुम, अक्षत, हल्दी और सुहाग की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव का जल और दूध से अभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाएं। मान्यता है कि शिव-पार्वती की साथ में पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है।
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सुहाग की सामग्री अर्पित करना शुभ
माता गौरी को सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, कंघी, वस्त्र और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित करना मंगला गौरी व्रत में शुभ माना जाता है। पूजा के बाद इन वस्तुओं में से कुछ सामग्री किसी सुहागिन महिला को श्रद्धापूर्वक भेंट करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे सौभाग्य की वृद्धि और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना की जाती है।
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घी का दीपक जलाकर करें प्रार्थना
मंगला गौरी की पूजा में माता के सामने घी का दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करना चाहिए। इसके बाद माता पार्वती के मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि माता गौरी की आराधना मन को शक्ति देती है और परिवार के सुख-सौभाग्य के लिए की गई प्रार्थना को विशेष फल मिलता है।

भगवान शिव को बेलपत्र और जल चढ़ाएं
माता गौरी की पूजा के साथ भगवान शिव की आराधना अवश्य करनी चाहिए। शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित कर बेलपत्र चढ़ाएं और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। बेलपत्र चढ़ाते समय श्रद्धा और शुद्ध भाव रखना महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि शिव की पूजा से जीवन में शांति और सकारात्मकता आती है तथा माता पार्वती की कृपा से दांपत्य जीवन सुखमय होता है।

शिव-पार्वती से मांगें सुखी दांपत्य का आशीर्वाद
पूजा के अंत में माता गौरी और भगवान शिव के सामने अपने परिवार की सुख-शांति, पति-पत्नी के बीच प्रेम, सौभाग्य और समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए। मंगला गौरी व्रत का मूल भाव माता पार्वती की तपस्या, निष्ठा और दांपत्य समर्पण से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस दिन केवल पूजा की विधि ही नहीं, बल्कि मन में श्रद्धा, संयम और सकारात्मक भाव रखना भी महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से शिव-पार्वती की आराधना करने वाले भक्त पर उनकी कृपा बनी रहती है।

 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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