Jyeshtha Month Daan Samagri: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ साल का तीसरा महीना होता है, जो आमतौर पर मई और जून के बीच आता है। यह समय भीषण गर्मी का होता है, इसलिए इस माह में किए गए दान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दौरान जरूरतमंदों की मदद करने से न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी बढ़ती है। यही वजह है कि लोग इस महीने में घर के बाहर प्याऊ लगवाते हैं, ताकि राहगीरों को ठंडा पानी मिल सके। साथ ही पंखे, चप्पल और अन्य जरूरी चीजों का दान भी शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ माह में किन वस्तुओं का दान करना लाभकारी माना गया है।
Jyeshtha Month Daan: ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में करें इन चीजों का दान, श्रीहरि बरसाएंगे सुख-समृद्धि की वर्षा
Jyeshtha Month Daan: ज्येष्ठ का महीना मई और जून के बीच आता है। यह समय भीषण गर्मी का होता है, इसलिए इस माह में किए गए दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान जरूरतमंदों की मदद करने से न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी बढ़ती है।
जल दान का महत्व
ज्येष्ठ की तपती गर्मी में पानी का दान सबसे श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है कि प्यासे को जल पिलाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस माह में किया गया जल दान बड़े यज्ञों के समान फल देता है। ऐसे में राह चलते लोगों के लिए प्याऊ की व्यवस्था करना, घर की छत पर पक्षियों के लिए पानी रखना और मिट्टी के घड़े दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इससे कुंडली में चंद्र और शुक्र ग्रह मजबूत होते हैं।
सत्तू, गुड़ और फलों का दान
गर्मी से राहत देने वाली चीजों का दान इस महीने खास फलदायी माना जाता है। सत्तू, गुड़, आम, तरबूज, खरबूजा और नारियल पानी जैसी ठंडी तासीर वाली वस्तुएं दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती।
राहत देने वाली चीजों का दान
ज्येष्ठ माह में जरूरतमंदों को ऐसी वस्तुएं देना, जो गर्मी से बचाव करें, बेहद पुण्यकारी माना गया है। जैसे छाता, जूते-चप्पल, हाथ के पंखे या सूती कपड़े दान करना। ये चीजें दूसरों को राहत देने के साथ-साथ दान करने वाले के जीवन में भी सकारात्मकता लाती हैं।
इन तिथियों पर करें विशेष दान
इस महीने में खास तौर पर एकादशी और पूर्णिमा के दिन दान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इन तिथियों पर किया गया दान पितरों तक पहुंचता है और पितृ दोष को शांत करने में सहायक होता है।
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