फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Pitru Rin Upay: लाल किताब में पितृ ऋण क्या होता है और कैसे मिलती है इससे मुक्ति, जानें किस्मत बदलने वाला उपाय

Tue, 16 Dec 2025 05:34 PM IST
ज्योति मेहरा शैली प्रकाश
शैली प्रकाश Published by: ज्योति मेहरा Updated Tue, 16 Dec 2025 05:34 PM IST
सार

Pitru Rin Upay In Hindi: पितृ ऋण वह अदृश्य बोझ है जो पिछली पीढ़ियों के कर्मों या आपके द्वारा किए गए कुछ विशेष कार्यों के कारण वर्तमान जीवन पर पड़ता है। आइए, समझते हैं कि यह 'पितृ ऋण' क्या है और कैसे आप अपनी किस्मत को बदलकर इससे मुक्ति पा सकते हैं।

विज्ञापन
lal kitab remedies for pitra rin kundli mein pitra rin kya hota hai pitra rin ke upay in hindi
लाल किताब पितृ ऋण से मुक्ति के महा उपाय - फोटो : Amar Ujala

Lal Kitab Remedies For Pitra Rin: लाल किताब में मुख्य रूप से 9 तरह के ऋण बताए गए हैं। पितृ ऋण, मातृ ऋण, पुत्री ऋण, स्वयं ऋण, पत्नी ऋण, सम्बंधी ऋण, जालिमाना ऋण, अजन्मा ऋण और कुदरती ऋण। लाल किताब की गहन अवधारणाओं में, व्यक्ति के जीवन में आने वाले उतार-चढ़ावों के लिए 'ऋण' की संकल्पना बहुत महत्वपूर्ण है। इनमें सबसे प्रमुख और निर्णायक माना जाता है 'पितृ ऋण'। यह केवल कर्मों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह वह अदृश्य बोझ है जो पिछली पीढ़ियों के कर्मों या आपके द्वारा किए गए कुछ विशेष कार्यों के कारण वर्तमान जीवन पर पड़ता है। आइए, समझते हैं कि यह 'पितृ ऋण' क्या है और कैसे आप अपनी किस्मत को बदलकर इससे मुक्ति पा सकते हैं।



Astro Tips: नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करती हैं महिलाओं की ये आदतें, रात में सोने से पहले न करें ये काम

lal kitab remedies for pitra rin kundli mein pitra rin kya hota hai pitra rin ke upay in hindi
कुंडली में पितृ ऋण की पहचान - फोटो : अमर उजाला
कुंडली में पितृ ऋण की पहचान
  1. लाल किताब के अनुसार, पितृ ऋण को मुख्य रूप से दो जटिल स्थितियों से पहचाना जाता है, जिसमें शुभ ग्रह बृहस्पति (गुरु) और तर्क के कारक ग्रह बुध की स्थिति निर्णायक होती है। लाल किताब के अनुसार जब किसी कुंडली में शुक्र, बुध या राहू दूसरे, पांचवें, नौवें अथवा बारहवें भाव में हों तो जातक पितॄ ऋण से पीड़ित होता है।
  2. जब आपकी कुंडली में देवगुरु बृहस्पति अपनी स्वाभाविक शुभ स्थिति (पक्के घर 2, 5, 9, 12) से हटकर 3, 6, 7, 8, या 10वें भाव में बैठ जाते हैं, तो यह स्थिति भी पितृ ऋण का आधार बनती है। इस ऋण की पुष्टि तब होती है, जब: गुरु के शुभ घर (2, 5, 9, 12) में बुध, शुक्र, शनि, राहु या केतु जैसे क्रूर अथवा विरोधी ग्रह बैठ जाते हैं। इसके अलावा, जब पांचवें, नौवें या बारहवें भाव में शुक्र, बुध, राहु अकेले हों या युति बनाकर बैठें, तो जातक पर पितृ-ऋण का प्रभाव माना जाता है।
  3. पितृ ऋण बनने की एक और महत्वपूर्ण स्थिति में, बुध ग्रह मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है। यदि कुंडली के नवम भाव (भाग्य भाव) में कोई भी ग्रह स्थित हो, और उस नवमस्थ ग्रह की राशि में कहीं भी बुध ग्रह बैठा हो, तो यह भी पितृ ऋण का एक गंभीर संकेत होता है।
lal kitab remedies for pitra rin kundli mein pitra rin kya hota hai pitra rin ke upay in hindi
पितृ ऋण के कारण - फोटो : Adobe Stock
पितृ ऋण के कारण
  1. पूर्व जन्मों या पिछली पीढ़ी के कुछ अनसुलझे कर्म जो ऋण के रूप में वर्तमान जीवन में सामने आते हैं।
  2. बड़ (बरगद), पीपल, नीम, और तुलसी जैसे पवित्र माने जाने वाले सात प्रमुख वृक्षों को काटना या कटवाना।
  3. घर या कुलभूमि के पास किसी भी मंदिर या देव स्थान में तोड़फोड़ करना, या उनकी पवित्रता भंग करना।
  4. पिता, दादा, नाना, कुल पुरोहित, या विद्वान पंडितों का अपमान करना या उनके साथ दुर्व्यवहार करना। कुल पुरोहित बदलान। 
विज्ञापन
विज्ञापन
lal kitab remedies for pitra rin kundli mein pitra rin kya hota hai pitra rin ke upay in hindi
लाल किताब पितृ ऋण से मुक्ति के उपाय - फोटो : amar ujala
मुक्ति के महा उपाय
लाल किताब पितृ ऋण को 'पितृ दोष' के समान ही मानती है, जिसके निवारण में सूर्य (पिता और आत्मा का कारक) की शक्ति का उपयोग किया जाता है। यह समाधान व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का सामूहिक कर्तव्य होता है।
  • सामूहिक धन दान: परिवार के सभी सदस्य अपनी आय या सामर्थ्य के अनुसार बराबर मात्रा में धन एकत्रित करें। इस एकत्रित धन को किसी मंदिर (विशेषकर गुरु स्थान) में दान करें। दान करने के बाद दंडवत होकर क्षमा मांगे। यह सामूहिक प्रयास परिवार पर आए ऋण के बोझ को हल्का करता है।
विज्ञापन
lal kitab remedies for pitra rin kundli mein pitra rin kya hota hai pitra rin ke upay in hindi
लाल किताब पितृ ऋण से मुक्ति के उपाय - फोटो : amar ujala
  • सूर्य की उपासना: सूर्य का उपाय करने से पितृ शांति मिलती है। रोज सुबह सूर्य को जल अर्पित करें।
  • पीपल सिंचन: पीपल के वृक्ष को लगातार 43 दिनों तक जल अर्पित करें। पीपल में पितरों का वास माना जाता है, और इसे सींचना पितरों को शांत करने का सबसे सरल और शक्तिशाली माध्यम है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed