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Adhik Maas Pradosh Vrat: अधिकमास का पहला प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Thu, 28 May 2026 06:49 AM IST
सार

Pradosh Vrat: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। अधिकमास का पहला गुरु प्रदोष व्रत 28 मई को पड़ रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल में शिवजी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कारोबार में उन्नति के योग बनते हैं। साथ ही यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति में भी सहायक माना जाता है।

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Adhik Maas Pradosh Vrat 2026 Know Shubh Muhurat Puja Vidhi and Significance
अधिक मास प्रदोष व्रत - फोटो : amar ujala

Adhik Maas Pradosh Vrat: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है जो भगवान शिव को समर्पित होता है। यह व्रत महीने में दो बार आता है कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है। कारोबार में उन्नति होती है और शिव कृपा सदैव बनी रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला भी माना जाता है। जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है उसके अनुसार उसका नाम रखा जाता है। अधिकमास में आने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। इसी क्रम में 28 मई को अधिकमास का पहला गुरु प्रदोष व्रत पड़ रहा है। जिसमें प्रदोष काल में भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। इस व्रत के शुभ मुहूर्त विधि और महत्व को विस्तार से जानना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।


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प्रदोष व्रत की तिथि - फोटो : adobe stock

प्रदोष व्रत की तिथि
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 मई को सुबह 07 बजकर 56 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 29 मई को सुबह 09 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए अधिकमास का पहला गुरु प्रदोष व्रत 28 मई गुरुवार को रखा जाएगा।

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प्रदोष काल शाम 07 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर रात 09 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। - फोटो : freepik

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
इस दिन प्रदोष काल शाम 07 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर रात 09 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। यही समय भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। भक्त इसी अवधि में शिव आराधना कर सकते हैं।

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प्रदोष व्रत का महत्व - फोटो : freepik

प्रदोष व्रत का महत्व
गुरु प्रदोष व्रत को ज्ञान, धन, संतान सुख और वैवाहिक जीवन में शांति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से विशेष फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति भी मजबूत होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

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व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव का ध्यान करें और दिन की शुरुआत भक्ति भाव से करें। - फोटो : Instagram

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले स्नान करें और शरीर को शुद्ध करें।
  • स्वच्छ, साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें ताकि मन शांत और पवित्र रहे।
  • व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव का ध्यान करें और दिन की शुरुआत भक्ति भाव से करें।
  • पूरे दिन सात्विक आचरण का पालन करें और मन को शांत बनाए रखें।
  • भगवान शिव या शिवलिंग की विधिवत पूजा की तैयारी करें और पूजा स्थल को साफ करें।
  • शिवलिंग पर श्रद्धा भाव से बेलपत्र अर्पित करें, जो अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • जल, दूध, दही, शहद, घी, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर विधिपूर्वक अभिषेक करें।
  • पूजा के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और मन को एकाग्र रखें।
  • दिनभर व्रत का पालन करते हुए अनावश्यक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • शाम के प्रदोष काल में दोबारा स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पुनः भगवान शिव की पूजा करें और शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
  • भगवान शिव को फल, मिठाई और अन्य सात्विक भोग अर्पित करें।
  • गुरु प्रदोष व्रत की कथा को ध्यानपूर्वक और श्रद्धा के साथ सुनें या पढ़ें।
  • अंत में भगवान शिव की आरती करें और पूजा का समापन करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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