Bakrid 2026: ईद-उल-अजहा यानी बकरीद इस्लाम धर्म का एक बेहद पवित्र और अहम त्योहार माना जाता है। यह त्योहार त्याग, आस्था और अल्लाह के प्रति समर्पण का संदेश देता है। हर साल जुल-हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाए जाने वाले इस पर्व पर मुसलमान नमाज अदा करते हैं, जरूरतमंदों की मदद करते हैं और कुर्बानी की रस्म निभाते हैं। भारत में कल बकरीद मनाई जाएगी। इस दिन बकरा, भेड़, बैल, भैंस या ऊंट की कुर्बानी दी जाती है, जो हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की अल्लाह के प्रति अटूट आस्था और बलिदान की याद दिलाती है। इस्लाम में कुर्बानी केवल जानवर की बलि तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि उसके गोश्त को सही तरीके से बांटना भी जरूरी माना गया है। इसी वजह से कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटने की परंपरा निभाई जाती है, जो इंसानियत, बराबरी और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देती है।
Bakrid 2026: तीन हिस्सों में क्यों बांटा जाता है कुर्बानी का गोश्त? जानें इससे जुड़े सही नियम
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shweta Singh
Updated Wed, 27 May 2026 10:21 PM IST
सार
Eid-Al-Adha: ईद-उल-अजहा यानी बकरीद इस्लाम का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार माना जाता है जो त्याग, बलिदान और समर्पण का संदेश देता है। इस दिन नमाज अदा करने के बाद बकरा, भेड़, बैल या ऊंट जैसे जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है जिसमें एक हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए तथा तीसरा जरूरतमंद और गरीब लोगों के लिए रखा जाता है।
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