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Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव पर सुंदरकांड का पाठ क्यों करना चाहिए? जानें, विधि, लाभ और नियम

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Wed, 01 Apr 2026 11:52 AM IST
सार

Hanuman Janmotsav 2026: चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसीलिए चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पूरे विधि-विधान से हनुमान जी की उपासना करने से और सुंदरकांड का पाठ करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामना पूर्ण होती है।

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Hanuman Janmotsav 2026 Sundarkand Path Rules Importance Benefits in hindi disprj
हनुमान जन्मोत्सव 2026 - फोटो : amar ujala
Hanuman Janmotsav Sundarkand Path: कल यानी 2 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाएगा। वैदिक सनातन धर्म में हनुमान जी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। हनुमान जी को 8 चिरंजीवियों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसीलिए चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पूरे विधि-विधान से हनुमान जी की उपासना करने से और सुंदरकांड का पाठ करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामना पूर्ण होती है। इसके साथ ही जीवन में धन, ऐश्वर्य, बल और बुद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि हनुमान जन्मोत्सव पर सुंदरकांड का पाठ करना क्यों फलदायी है और इस पाठ को कैसे करा जाता है।  साथ ही जानते हैं इस पाठ से जुड़े हुए नियमों के बारे में। Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव पर कैसे करें बजरंगबली को प्रसन्न ? जानें क्या करें और क्या नहीं

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सुंदरकांड रामचरितमानस का पांचवां अध्याय है। - फोटो : adobe stock

सुंदरकांड क्या है?
सुंदरकांड रामचरितमानस का पांचवां अध्याय है। इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास ने 16वीं शताब्दी में की थी। यह एकमात्र ऐसा खंड है जो पूरी तरह से हनुमान जी को समर्पित है। सुंदरकांड में हनुमान जी द्वारा माता सीता की खोज, सुरसा राक्षसी को पराजित करना, लंका प्रवेश, अशोक वाटिका  नष्ट करना और लंका दहन जैसे प्रमुख उद्धरण मिलते हैं।  प्रत्येक घटना आध्यात्मिक रूप से  प्रासंगिक और अत्यंत शक्तिशाली है, इसीलिए सुंदरकांड को एक प्रमुख योग शास्त्र भी माना जाता है।

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हनुमान जन्मोत्सव के दिन पढ़े गए सुंदरकांड के प्रत्येक श्लोक का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

सुंदरकांड का पाठ क्यों करें? 
हनुमान जयंती केवल बजरंगबली का जन्मोत्सव ही नहीं है बल्कि इसे विशेष आशीर्वाद प्राप्त करने का एक माध्यम भी माना जाता है। इस दिन सुंदरकांड का पाठ करना विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है। इसका पाठ हनुमानजी की दिव्य शक्ति का आह्वान करता है। इसके अलावा हनुमान जन्मोत्सव के दिन पढ़े गए सुंदरकांड के प्रत्येक श्लोक का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। सुंदरकांड का पाठ न केवल पापों का नाश करता है, बल्कि यह शरीर और मन के उच्च चक्रों विशेष रूप से हृदय (अनाहत) और कंठ (विशुद्धि) को जाग्रत करने में भी सहायक होता है। इसके साथ ही, यह वातावरण को सात्विक गुणों, शक्ति और सुरक्षा से भर देता है, जिससे मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान संभव हो पाता है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुंदरकांड का पाठ सुबह या शाम 4 बजे के बाद करना चाहिए। - फोटो : adobe stock

हनुमान जन्मोत्सव पर सुंदरकांड कैसे पढ़ें

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुंदरकांड का पाठ सुबह या शाम 4 बजे के बाद करना चाहिए।
  • ऐसा माना जाता है कि दोपहर 12 बजे के बाद पाठ करना शुभ नहीं होता और साधक को पूजा का फल नहीं मिलता।
  • पाठ शुरू करने से पहले, एक साफ चौकी तैयार करें और उस पर एक साफ़ लाल रंग का वस्त्र बिछा दें। 
  • फिर उस पर हनुमानजी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं।
  • सुंदरकांड का पाठ शुरू करने से पहले, श्री राम और हनुमानजी की पूजा करें। 
  • पाठ को बीच में बिना छोड़े पूरा पढ़ें और इस दौरान किसी भी विषय पर बातचीत न करें।
  • पाठ करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपके मन में कोई भी नकारात्मक विचार न आने पाए। 
  • हनुमानजी की पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने के बाद उन्हें फल, मेहंदी, बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
  • पाठ समाप्त होने के बाद हनुमानजी की आरती करना न भूलें। 
  • आरती के बाद हनुमान जी को चढ़ाए गए प्रसाद को अपने परिवार के सदस्यों के साथ बांटें।
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सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति को बुरे मार्ग को छोड़कर अच्छे मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। - फोटो : adobe stock

सुंदरकांड पढ़ने के लाभ

  • शास्त्रों के अनुसार हर मंगलवार और हनुमान जन्मोत्सव जैसे शुभ अवसरों पर सुंदरकांड का पाठ करने से साधक को हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 
  • इससे मन को शांति और आत्मा को सुकून मिलता है। 
  • सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति को बुरे मार्ग को छोड़कर अच्छे मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। 
  • साधक को अपनी कुंडली में प्रतिकूल ग्रहों के प्रभावों से भी सुरक्षा मिलती है।



 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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