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Lakshmi Chalisa: मां लक्ष्मी की चालीसा से दूर होगी दरिद्रता, कभी नहीं होगा धन का अभाव

धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Thu, 07 Jul 2022 10:18 AM IST
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मां लक्ष्मी की चालीसा से दूर होगी दरिद्रता - फोटो : iStock

Lakshmi Chalisa: हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन धन-वैभव की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। शुक्रवार के दिन लोग विशेष रूप से मां वैभव लक्ष्मी का व्रत रखते हैं और पूजा करते हैं। इस दिन विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करने से उनका आर्शीवाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि प्रत्येक शुक्रवार को देवी लक्ष्मी की पूजा और मंत्र का जाप करने से व्यक्ति के घर में कभी धन का अभाव नहीं रहता है। इसके अलावा मां लक्ष्मी की मूर्ति या प्रतिमा के सामने घी का दीपक जला कर लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से घर में धन-धान्य और सौभाग्य का आगमन होता है। यहां लक्ष्मी चालीसा की लिरिक्स दी जा रही है, जिसके जरिए आप इसका पाठ आसानी से कर सकते हैं... 


श्री लक्ष्मी चालीसा


॥ दोहा ॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥
सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।
ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार॥

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मां लक्ष्मी की चालीसा से दूर होगी दरिद्रता - फोटो : iStock


श्री लक्ष्मी चालीसा

तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदंबा सबकी तुम ही हो अवलंबा॥1॥

तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥2॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥3॥

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मां लक्ष्मी की चालीसा से दूर होगी दरिद्रता - फोटो : iStock

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥4॥

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥5॥

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥6॥

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मां लक्ष्मी की चालीसा से दूर होगी दरिद्रता - फोटो : iStock

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥7॥

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥8॥

तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥9॥

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मां लक्ष्मी की चालीसा से दूर होगी दरिद्रता - फोटो : iStock

ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥10॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥11॥

पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥12॥

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