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Kalashtami 2026: माघ मास की कालाष्टमी कब है? जानें शुभ तिथि और महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 09 Jan 2026 04:19 AM IST
सार

Kalashtami Shubh Muhurat: जानें माघ मास कालाष्टमी 2026 की तिथि, पूजा विधि, मंत्र और महत्व। इस दिन भैरव भगवान की उपासना से जीवन के भय और दुख दूर होते हैं।

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Magh Maas Kalashtami 2026 Date Puja Vidhi Mantra and Significance
Kalashtami 2026 - फोटो : Amar Ujala

Magh Maas Kalashtami 2026: माघ मास की कालाष्टमी का व्रत विशेष रूप से माघ महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। कालाष्टमी हर महीने मनाई जाती है, लेकिन माघ मास की कालाष्टमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अधिक माना जाता है। इस दिन को भैरव अष्टमी भी कहा जाता है और मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप श्रीभैरव की विशेष पूजा करने से साधक को मानसिक और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास कालाष्टमी का व्रत और विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में व्याप्त भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। भैरव भगवान की कृपा से भक्तों को साहस, सुरक्षा और स्थिरता की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं कि माघ मास कालाष्टमी कब मनाई जाएगी, इस दिन पूजा की सही विधि क्या है, कौन-से मंत्रों का जाप करना शुभ रहता है और इस व्रत का धार्मिक महत्व क्या है।
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Magh Maas Kalashtami 2026 Date Puja Vidhi Mantra and Significance
माघ मास कालाष्टमी कब है ? - फोटो : adobe stock

माघ मास कालाष्टमी कब है ?

माघ मास कालाष्टमी का व्रत इस बार माघ महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाएगा। इस वर्ष कालाष्टमी की तिथि 10 जनवरी, शनिवार को सुबह 8:24 बजे से प्रारंभ होगी और अगले दिन 11 जनवरी, रविवार को दोपहर 11:21 बजे तक रहेगी।उदय तिथि के अनुसार, इस बार कालाष्टमी का व्रत 10 जनवरी को रखा जाएगा। इस दिन भगवान भैरव की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से जीवन के सभी संकट, भय और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। इसके अलावा, शनिवार के दिन पड़ने वाली कालाष्टमी का प्रभाव विशेष रूप से अधिक शुभ माना जाता है।

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Magh Maas Kalashtami 2026 Date Puja Vidhi Mantra and Significance
पूजा के समय बाबा कालभैरव के मंत्रों का 108 बार जाप करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है। - फोटो : Amar Ujala

किस विधि से करें कालाष्टमी का पूजन?

  • कालाष्टमी की पूजा घर में ही की जा सकती है। सबसे पहले अपने मंदिर या पूजा स्थान में एक लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। इसके ऊपर भगवान शिव, माता पार्वती और बाबा कालभैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • अब चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें और भगवान को ताजे फूल या फूलों की माला अर्पित करें। इसके बाद नारियल, गेरुआ, इमरती और अन्य धार्मिक सामग्री चढ़ाएं और चौमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाने के बाद धूप और दीपक दिखाएं और सभी उपस्थित लोगों का कुमकुम या हल्दी से तिलक करें।
  • पूजा के दौरान भगवान शिव, माता पार्वती और कालभैरव की एक-एक करके आरती करें। इसके बाद भैरव चालीसा और शिव चालीसा का पाठ करें। आप चाहें तो बटुक भैरव पंजर कवच का पाठ भी कर सकते हैं।
  • पूजा के समय बाबा कालभैरव के मंत्रों का 108 बार जाप करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है। व्रत पूर्ण होने के बाद काले कुत्ते को दूध पिलाएं और दिन के अंत में उनकी भी पूजा करें।
  • रात में सरसों के तेल, काले तिल और दीपक से कालभैरव की विशेष पूजा करने और रात्रि जागरण करने से व्रत का फल और अधिक उत्तम माना जाता है।

 

Magh Maas Kalashtami 2026 Date Puja Vidhi Mantra and Significance
कालाष्टमी व्रत का मंत्र - फोटो : Amar Ujala

कालाष्टमी व्रत का मंत्र

 

अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम,

भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि।

 

 

ओम भयहरणं च भैरव:।

ओम भ्रं कालभैरवाय फट।

ओम कालभैरवाय नम:।

ओम ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।

 

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कालाष्टमी का दिन भगवान भैरव को समर्पित माना जाता है। - फोटो : instagram

कालाष्टमी का महत्व

कालाष्टमी का दिन भगवान भैरव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से नकारात्मक शक्तियां, भय, कष्ट और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, कालाष्टमी के व्रत से कुंडली में अशुभ ग्रहों के प्रभाव कम हो सकते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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