Mahashivratri Par Panchakshar Stotra Ka Path: इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पवित्र पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ने वाला यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर शिव परिवार की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। देशभर के शिव मंदिरों में विशेष सजावट, रुद्राभिषेक और भव्य पूजन का आयोजन किया जाता है, जहां भक्त पूरे उत्साह से शामिल होते हैं।
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर करें शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ, जानें कैसे मिलेगा धन और सौभाग्य
Panchakshar Stotra Path: महाशिवरात्रि 2026 का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक है। इस दिन पंचाक्षर मंत्र और शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
पंचाक्षर मंत्र क्या है और क्यों है खास?
‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र को पंचाक्षर मंत्र कहा जाता है क्योंकि इसमें पांच अक्षर- ‘न’, ‘म’, ‘शि’, ‘व’, ‘य’ मौजूद हैं। यह मंत्र भगवान शिव का सबसे पवित्र और प्रभावशाली मंत्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंत्र के जाप से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और नकारात्मकता दूर होती है। मानसिक शांति, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन पाने के लिए यह मंत्र अत्यंत उपयोगी है। इसे श्रद्धा और ध्यान के साथ जपने से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता आती है, और व्यक्ति अपने कार्यों में दक्ष और सफल बनता है।
शिव पंचाक्षर स्तोत्र का महत्व
महान संत और आदिशंकराचार्य ने ‘शिव पंचाक्षर स्तोत्र’ की रचना की थी, जिसमें पंचाक्षर मंत्र की महिमा और शक्ति का विस्तार से वर्णन किया गया है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस स्तोत्र का नियमित पाठ करता है, उसे जीवन में किसी प्रकार की कमी या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन इस स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी होता है। इस दिन स्तोत्र का जाप करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी क्षेत्र- धन, स्वास्थ्य, संबंध और आध्यात्मिक उन्नति में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
पंचाक्षर मंत्र के लाभ
- नियमित रूप से ‘ॐ नमः शिवाय’ का उच्चारण करने से मन की अशांति कम होती है और जीवन के तनावों से राहत मिलती है। यह मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
- इस मंत्र का जप नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे व्यक्ति का मन और भावनाएं अधिक संतुलित रहती हैं।
- पंचाक्षर मंत्र का जाप केवल मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना गया है। इससे शरीर में ऊर्जा का संतुलन बना रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- जीवन में कठिनाइयाँ, बाधाएं या मानसिक परेशानियाँ आने पर इस मंत्र का नियमित उच्चारण मनोबल को मजबूत बनाता है और समस्याओं का समाधान जल्दी संभव होता है।
- पंचाक्षर मंत्र साधक को आध्यात्मिक रूप से प्रगति करने में मदद करता है। इसका जाप भगवान शिव के निकट लाता है और साधक के जीवन में दिव्य शक्ति और चेतना का विकास करता है।
- मंत्र का निरंतर उच्चारण जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता लाता है। व्यक्ति अपने कार्यों में दक्ष और संतुलित बनता है।
॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,
तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥१॥
मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय,
नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।
मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय,
तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥२॥
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द,
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय,
तस्मै शि काराय नमः शिवाय ॥३॥
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य,
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय,
तस्मै व काराय नमः शिवाय ॥४॥
यक्षस्वरूपाय जटाधराय,
पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय,
तस्मै य काराय नमः शिवाय ॥५॥
पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥