Varuthini Ekadashi Vrat Mein Kya Khaein Aur Kya Na Khaein: वरूथिनी एकादशी व्रत प्रत्येक वर्ष वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष यह व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो श्रद्धालु वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का व्रत रखते हैं उनकी हर मनोकामना पूरी होती और जीवन में हर जगह सफलता मिलती है। वैशाख का महीना भगवान विष्णु को समर्पित है। इस व्रत के नियमों को लेकर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। इसी क्रम में आइए जानते हैं कि वरूथिनी एकादशी व्रत को सफल बनाने के लिए क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।
Varuthini Ekadashi Vrat Niyam: वरूथिनी एकादशी व्रत में इन चीजों से करें परहेज, टूट सकता है उपवास
Varuthini Ekadashi Vrat Niyam: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो श्रद्धालु वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का व्रत रखते हैं, उनकी हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन में हर जगह सफलता मिलती है। वैशाख का महीना भगवान विष्णु को समर्पित है। आइए जानते हैं कि वरूथिनी एकादशी व्रत को सफल बनाने के लिए क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।
वरूथिनी एकादशी पर क्या खाएं
- अगर आप निर्जला व्रत नहीं रख रहे हैं, तो आप केले, सेब, संतरे, अंगूर, पपीता जैसे फल खा सकते हैं। ये शरीर को ऊर्जा देते हैं और पचने में हल्के होते हैं।
- घर का बना दूध, दही, छाछ और पनीर खाना अच्छा रहता है। ये शुद्ध होते हैं और व्रत के लिए उपयुक्त होते हैं।
- बादाम, किशमिश, काजू और अखरोट जैसे सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स) खाए जा सकते हैं। ये ऊर्जा बढ़ाते हैं और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखते हैं।
- आलू, शकरकंद और अरबी को हल्का पकाकर खाया जा सकता है। ये व्रत के भोजन में आम तौर पर शामिल होते हैं।
- कुट्टू का आटा और सिंघाड़े का आटा व्रत के लिए अच्छे विकल्प हैं। इनसे रोटी या पकौड़े बनाए जा सकते हैं।
- साबूदाने की खिचड़ी या उससे बने अन्य व्यंजन खाए जा सकते हैं जो व्रत के दौरान एक महत्वपूर्ण भोजन माना जाता है।
- चाय या कॉफी पी जा सकती है, लेकिन बेहतर यही है कि इसे बिना दूध और चीनी के सादा ही पिया जाए।
वरूथिनी एकादशी पर क्या न खाएं
- व्रत के दिन चावल, गेहूं और सामान्य अनाज नहीं खाने चाहिए, क्योंकि ये एकादशी के नियमों के विरुद्ध माने जाते हैं।
- दालें (मूंग दाल को छोड़कर) नहीं खानी चाहिए क्योंकि व्रत के दौरान इनका सेवन वर्जित होता है।
- मक्का, सरसों (राई) और इनसे बने खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
- रोटी, चपाती, पराठा, इडली, डोसा जैसे सामान्य भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
- व्रत के दौरान प्याज और लहसुन नहीं खाने चाहिए, क्योंकि इनमें तामसिक गुण होते हैं।
- मांस, मछली और अंडे जैसे मांसाहारी भोजन से पूरी तरह बचना चाहिए।
- बहुत ज्यादा तेल और घी में बने भोजन से बचना चाहिए क्योंकि यह व्रत की सात्विक प्रकृति को नुकसान पहुंचाता है।
वरूथिनी एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त
पहला मुहूर्त: प्रातः 5:58 बजे से 7:34 बजे तक
दूसरा मुहूर्त: प्रातः 9:10 बजे से 10:46 बजे तक
इसमें पहला मुहूर्त अमृत-सर्वोत्तम और दूसरा शुभ-उत्तम माना गया है।
स्नान का मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:28 बजे से 5:13 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त
प्रातः 11:56 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक होगा।
व्रत पारण का समय
वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण 14 अप्रैल को किया जाएगा। पारण का समय सुबह 6:54 बजे से 8:31 बजे तक रहेगा। पारण के दिन हरि वासर का समापन सुबह 6:54 बजे होगा, जिसके बाद ही व्रत खोलना शुभ माना जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।