Jyestha Amavasya Mantra Jaap: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह तिथि पितरों के स्मरण, तर्पण और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से किए गए जप, तप, स्नान और दान से न केवल पितृ प्रसन्न होते हैं, बल्कि जीवन में आ रही अनेक बाधाएं भी दूर होने लगती हैं। खासकर पितृ दोष से पीड़ित लोगों के लिए यह दिन बेहद फलदायी माना गया है। यदि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन कुछ विशेष मंत्रों का जाप और विधिपूर्वक पितृ तर्पण किया जाए, तो पितरों की कृपा से सुख-समृद्धि, धन लाभ और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। आइए जानते हैं इस पावन दिन कौन से मंत्रों का जाप करना शुभ रहेगा और पितृ तर्पण की सही विधि क्या है।
Jyeshtha Amavasya: ज्येष्ठ अमावस्या पर जरूर करें इन पितृ मंत्रों का जाप, जीवन से दूर होगा आर्थिक संकट
ज्येष्ठ अमावस्या पर इन विशेष मंत्रों का जाप और पितृ तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जानें पितृ दोष दूर करने, धन हानि रोकने और पितरों को प्रसन्न करने के प्रभावी उपाय।
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ज्येष्ठ अमावस्या पर पितृ तर्पण की विधि
- ज्येष्ठ अमावस्या के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे, पवित्र वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल को शुद्ध कर भगवान और पितरों का स्मरण करें।
- पितृ तर्पण के लिए दोपहर का समय सबसे उत्तम माना जाता है, इसलिए इस समय श्रद्धा और शांत मन से तर्पण करना चाहिए।
- तर्पण करते समय हाथ में जल, काले तिल, जौ और कुश लेकर अपने पितरों का ध्यान करें और मंत्रोच्चार के साथ उन्हें जल अर्पित करें।
- पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए अपनी क्षमता अनुसार दान-पुण्य करें। अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान शुभ माना जाता है।
- इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने का विशेष महत्व है। साथ ही पक्षियों, गाय और जरूरतमंदों को अन्न देना भी पुण्यदायक माना जाता है।
- पूरे दिन मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखें। सकारात्मक सोच रखें और किसी प्रकार के विवाद, क्रोध या कटु वचन से बचें।
- ज्येष्ठ अमावस्या पर सात्विक भोजन करें और तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज आदि से दूरी रखें, ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
तिल का दान और मंत्र जाप का महत्व
ज्येष्ठ अमावस्या पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से पितरों का स्मरण कर उनकी पूजा करने और विशेष रूप से काले तिल का दान करने से पितृ दोष शांत होता है। यह उपाय जीवन में आ रही बाधाओं को कम करने, आर्थिक नुकसान से बचाने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा, ज्येष्ठ अमावस्या पर पितृ शांति के लिए कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक विश्वास के अनुसार इन मंत्रों के उच्चारण से घर का वातावरण सकारात्मक होता है, मानसिक शांति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद पूरे परिवार पर बना रहता है। आइए जानते हैं वे प्रभावशाली मंत्र, जिनका जाप इस दिन करना शुभ माना जाता है।
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पितरों की कृपा प्राप्त करने और पितृ दोष शांति के लिए इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है-
सरल पितृ मंत्र
ॐ पितृ देवतायै नमः।
पितृ गायत्री मंत्र
ॐ पितृगणाय विद्महे जगतधारिणे धीमहि।
तन्नः पितृः प्रचोदयात्॥
पितृ शांति मंत्र
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः॥
विशेष पितृ कृपा मंत्र
ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि।
शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देवः प्रचोदयात्॥
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।