आचार्य चाणक्य एक कुशल रणनीतिकार, कूटनीतिज्ञ और महान अर्थशास्त्री थे। विभिन्न विषयों की गहरी समझ और बुद्धिमत्ता के कारण इन्हें विष्णु गुप्त व कौटिल्य भी कहा जाता था। इनको चाणक्य नाम अपने गुरु चणक से प्राप्त हुआ था। आचार्य चाणक्य के जीवन में बहुत संघर्ष के दिन रहे परंतु उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया वे अपने सम्मान के लिए लड़े और अपने शत्रु घनानंद को पराजित करके इतिहास की धारा का रुख बदलकर रख दिया। आचार्य चाणक्य ने कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताया है जिनके कारण व्यक्ति को अपमान का सामना करना पड़ता है और हर व्यक्ति को अपना सम्मान सबसे अधिक प्रिय होता है। नीति शास्त्र के अनुसार यदि जीवन में हमेशा अपने सम्मान को बनाए रखना चाहते हैं तो तुरंत इन आदतों का त्याग कर देना चाहिए। तो चलिए जानते हैं इस विषय में।
chanakya niti: यदि जीवन में हमेशा पाना चाहते हैं मान-सम्मान तो इन आदतों का आज ही कर दें त्याग
दूसरों को अपशब्द या निंदा न करें
आचार्य चाणक्य कहते हैं कभी किसी के बारे में अपशब्द नहीं कहने चाहिए और न ही पीठ पीछे किसी की निंदी करनी चाहिए। जो लोग दूसरों की निंदा करते हैं उन्हें एक न एक दिन इस कारण अपमान का सामना करना पड़ता है। निंदा रस में लोगों को बहुत आनंद आता है लेकिन लोग इस कारण अपना बहूमुल्य समय नष्ट करते हैं जिस कारण वे अपने जीवन में सम्मान के साथ सफलता भी गवां देते हैं। मनुष्य को तुरंत इस बुरी आदत का त्याग कर देना चाहिए, साथ ही ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए जो दूसरों की निंदा करते हैं।
न बोले झूठ
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य को हमेशा सही और सत्य के रास्ते पर चलना चाहिए। जो लोग झूठ बोलते हैं या फिर झूठ के सहारे जीवन में सफलता को प्राप्त करते हैं उनको इस कारण कभी न कभी अपमान का सामना करना पड़ता है। इसी तरह से झूठ बोलकर प्राप्त की गई सफलता ज्यादा दिनों तक नहीं टिकती है क्योंकि सत्य एक न एक दिन सबके सामने आ ही जाता है और ऐसी स्थिति में आपके सम्मान को ठेस पहुंचना निश्चित होता है, इसलिए इस बुरी आदत का त्याग कर देना चाहिए।
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को कभी भी बातों को बढ़ा-चढाकर नहीं बोलना चाहिए, इससे लोग आपका सम्मान नहीं करते हैं। जो लोग हर बात बढ़ा-चढ़ाकर बोलते हैं, वे लोगों के उपहास का पात्र बनते हैं इसलिए तुरंत ही अपनी इस बुरी आदत का त्याग कर देना चाहिए।