या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
शास्त्रों में मां सरस्वती को शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि की देवी माना गया है। मां सरस्वती का नाम संस्कृत के दो शब्दों के मेल से बना है, ‘सार’ तथा ‘स्व’ जिनका अर्थ क्रमशः ‘मूल तत्व’ तथा ‘स्वयं’है। इस प्रकार मां सरस्वती के नाम का तात्पर्य है ‘स्वयं के मूल तत्व एवं भाव का ज्ञान’। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां सरस्वती सृष्टि के रचियता ब्रह्मा जी के मुख से प्रकट हुई थीं। इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने वालों पर देवी की विशेष कृपा बनी रहती है। कमल पर आसीन मां सरस्वती के एक हाथ में पुस्तक, एक में वीणा, एक में माला और एक हाथ आशीर्वाद मुद्रा में है व उनका वाहन हंस है। मां के स्वरूप में जन-जन के कल्याण लिए प्रेरणा छुपी हुई है। इस प्रेरणा को हम जीवन में उतार कर सुखी और समृद्ध जीवन जी सकते हैं।

कमेंट
कमेंट X