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शुभ-लाभ और स्वास्तिक का क्या होता है महत्व, जानिए इसे अंकित करने पर मिलने वाले फायदे

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 21 Feb 2023 12:27 PM IST
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importance of shubh labh swastik and om symbol in hindu religion
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता माना गया है। - फोटो : iStock
सनातन धर्म में कुछ चीजें और निशान बहुत ही पवित्र माने जाते हैं। जिनका प्रयोग हर शुभ अवसरों पर जरूर किया जाता है। स्वास्तिक, ऊं और शुभ-लाभ समेत कई तरह के निशान होते हैं जिसे किसी धार्मिक अनुष्ठान करते समय, पूजा स्थल, मंदिर और व्रत-त्योहारों के मौके पर जरूर अंकित किया जाता है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता माना गया है। आपने देखा होगा कि अक्सर लोग अपने घर के मुख्य दरवाजे के बाहर या फिर गणेशजी के पूजन के समय शुभ-लाभ लिखते हैं। यह क्यों लिखते हैं? और क्या है इनका भगवान गणेशजी से संबंध आइए जानते हैं।
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lord ganesha - फोटो : istock
भगवान गणेश समृद्धि, बुद्धि और सफलता देने वाले और जीवन से बाधाओं को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं। गणेशजी भक्तों पर प्रसन्न होकर उनके दुखों को दूर करते हैं और सभी मनोरथों को पूर्ण करते हैं। भगवान गणेश स्वयं रिद्धि-सिद्धि के दाता और शुभ-लाभ के प्रदाता हैं। यदि वह प्रसन्न हो जाए तो अपने भक्तों की बाधा, सकंट, रोग-दोष तथा दरिद्रता को दूर करते हैं।
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lord ganesha - फोटो : istock
गणेशजी के दो पुत्र हैं शुभ और लाभ
शास्त्रों के अनुसार गणेशजी का विवाह प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्री ऋद्धि और सिद्धि नामक दो कन्याओं से हुआ था। सिद्धि से 'क्षेम'(शुभ) और ऋद्धि से 'लाभ' नाम के दो पुत्र हुए। इन्हें ही शुभ-लाभ के नाम से जाना जाता है। गणेश पुराण के अनुसार शुभ और लाभ को केशं और लाभ नामों से भी जाना जाता है वहीं रिद्धि शब्द का भावार्थ है 'बुद्धि' जिसे हिंदी में शुभ कहते हैं। सिद्धी शब्द का मतलब होता है 'आध्यात्मिक शक्ति' की पूर्णता यानी 'लाभ'। ज्योतिष की दृष्टि में भी चौघड़िया या मुहूर्त देखते समय उसमें अमृत के अलावा लाभ और शुभ को ही महत्वपूर्ण माना जाता है। 
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lord ganesha - फोटो : iStock
स्वास्तिक गणेशजी का ही स्वरूप
गणेश पुराण में कहा गया है कि स्वास्तिक गणेशजी का ही स्वरूप है, इसलिए सभी शुभ,मांगलिक और कल्याणकारी कार्यों में इसकी स्थापना अनिवार्य है। इसमें सारे विघ्नों को हरने और अंमगल दूर करने की शक्ति निहित है। घर के मुख्य दरवाजे पर 'स्वास्तिक' मुख्य द्वार के ऊपर मध्य में और शुभ और लाभ बाईं और दाईं तरफ लिखते हैं। स्वास्तिक की दोनों अलग-अलग रेखाएं गणपति जी की पत्नी रिद्धि-सिद्धि को दर्शाती हैं। घर के बाहर शुभ-लाभ लिखने का मतलब यही है कि घर में सुख और समृद्धि सदैव बनी रहे। लाभ लिखने का भाव यह है कि भगवान से लोग प्रार्थना करते हैं कि उनके घर की आय और धन हमेशा बढ़ता रहे, लाभ प्राप्त होता रहे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
वास्तु दोष से मिलती है मुक्ति
स्वास्तिक के दाएं-बाएं शुभ-लाभ लिखने से वहां के वास्तु दोष दूर होते हैं। यदि आपके घर में या व्यावसायिक स्थल पर किसी प्रकार का कोई वास्तुदोष है तो यहां की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के लिए पूर्व, उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में शुभ-लाभ सहित स्वास्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए। इसकी जगह आप अष्टधातु या तांबे का स्वास्तिक भी लगा सकते हैं।

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