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2 वर्ल्ड रिकॉर्ड, 2 गोल्ड जीतने वाले देवेंद्र के बारे में जानें 9 खास बातें
Wed, 14 Sep 2016 03:19 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 14 Sep 2016 03:19 PM IST
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Devendra Jhajharia
- फोटो : Reuters
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36 साल की उम्र में अपना ही 12 साल पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़कर पैरालंपिक में फिर से गोल्ड जीतने वाले जेवलिन थ्रोअर देवेंद्र झांझरिया देश के सबसे सफल एथलीट बन गए हैं। ओलंपिक के बाद दिव्यांगों के लिए होने वाले पैरालंपिक्स खेलों में देवेंद्र की सफलता ने सभी को इस खेल की ओर आकर्षित किया है। आइए, जानते हैं देश के इस महानतम एथलीट के बारे में 9 खास बातें।
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Devendra Jhajharia,
- फोटो : Getty
पहला, राजस्थान के चुरू में जन्मे जेवलिन थ्रोअर देवेंद्र झांझरिया के पास एक ही हाथ है, जबकि उनका दूसरा हाथ कुहनी (बायां हाथ) तक ही है। पैरालंपिक खेलों में उनके पास 14 साल का अपार अनुभव है।
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Devendra Jhajharia
- फोटो : Reuters
दूसरा, जन्म के समय देवेंद्र झांझरिया सामान्य बच्चों की तरह ही पैदा हुए थे, लेकिन आठ साल की उम्र में खेल के दौरान वह पेड़ पर चढ़े, इस बीच उनका बायां हाथ 11 हजार वोल्ट वाले बिजली के तार की चपेट में आ गया जिससे उनके शरीर का काफी हिस्सा जल गया। तब किसी ने नहीं सोचा था कि वह फिर से उठ खड़े होंगे, लेकिन वह आगे बढ़े और कामयाब भी हुए। हालांकि बाद में बाएं हाथ की कुहनी तक का हिस्सा हटाना पड़ा था।
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Devendra Jhajharia
- फोटो : Reuters
तीसरा, देवेंद्र झांझरिया जब 10वीं में थे तो उन्होंने भाला फेंक को खेल के रूप में चुना। इस समय वह पूरी तरह से फिट हो चुके थे। उन्होंने अपना अभ्यास जारी रखा और पहले वह ओपन कैटेगरी में जिला स्तर पर चैंपियन बने। वह कई सालों तक सामान्य बच्चों के साथ खेलते रहे और पदक जीतते रहे। उन्हें पैरा यानि दिव्यांगों के लिए अलग से खेल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
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Devendra Jhajharia
- फोटो : Getty
चौथा, पैरालंपिक में 2 स्वर्ण जीतने वाले देवेंद्र झांझरिया पहले रेलवे के लिए काम करते थे, लेकिन अब वह भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता आरडी सिंह के साथ अपने खेल को संवारा और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। आरडी सिंह ने ही पैरा खेलों से देवेंद्र को अवगत कराया।
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