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साइना नेहवाल की कहानी: वो लड़की जिसने देश को सपने दिए और भारत का गर्व बनकर विदा हुईं; क्या आगे कोई ऐसा आएगा?

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Tue, 20 Jan 2026 10:32 AM IST
सार

Saina Nehwal Badminton Career : भारतीय बैडमिंटन में पहला ओलंपिक पदक दिलाकर इतिहास रचने वाली साइना नेहवाल देश की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल के इतिहास में नया अध्याय लिखा। साइना नेहवाल का रिटायर होना एक युग का अंत है। उन्होंने भारत को सिर्फ मेडल नहीं दिए, उन्होंने भारत को लड़ने की इच्छा और हार न मानने की आदत दी।

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Saina Nehwal Retirement: Saina Nehwal Badminton Career, India First Olympic Badminton Medallist Farewell
साइना नेहवाल - फोटो : PTI
Saina Nehwal Retires : भारतीय बैडमिंटन की पोस्टर गर्ल और ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने प्रोफेशनल बैडमिंटन से सोमवार को संन्यास का एलान कर दिया। वह लंबे समय से घुटने की गंभीर समस्या से जूझ रही थीं। साइना ने कहा कि अब उनका शरीर एलीट स्तर के खेल की शारीरिक मांगों को सहन करने की स्थिति में नहीं है। साइना का सफर इतना आसान नहीं रहा है। उन्हें कई मुश्किलों और संघर्षों से जूझना पड़ा। आइए उनकी पूरी कहानी जानते हैं...
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Saina Nehwal Retirement: Saina Nehwal Badminton Career, India First Olympic Badminton Medallist Farewell
साइना नेहवाल - फोटो : PTI
17 मार्च 1990 को हरियाणा के हिसार में जब एक बच्ची ने जन्म लिया तो परिवार में हर कोई खुश नहीं था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि दादी ने देखने से ही इनकार कर दिया, क्योंकि वह लड़की थी, लेकिन किसे पता था कि यही बच्ची एक दिन न सिर्फ अपनी दादी, बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा करेगी।
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Saina Nehwal Retirement: Saina Nehwal Badminton Career, India First Olympic Badminton Medallist Farewell
साइना नेहवाल - फोटो : Twitter
कराटे से बैडमिंटन तक की राह
साइना जब आठ साल की थीं, परिवार हैदराबाद शिफ्ट हो गया। भाषा अजनबी थी, दोस्त नहीं थे, लेकिन एक सपना था, मां का सपना कि बेटी बैडमिंटन खेले। साइना की बैडमिंटन में एंट्री तभी हुई थी। साइना ने शुरू में कराटे भी सीखा और ब्राउन बेल्ट भी हासिल की, पर जल्द ही वह रैकेट की तरफ मुड़ीं। वजह-  साइना की मां, जो खुद राज्य स्तर की बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुकी थीं, उनके अधूरे सपने को पूरा करने के लिए साइना ने रैकेट उठाया। लाल बहादुर स्टेडियम उनकी जिंदगी का पहला मैदान बना। सुबह चार बजे पिता उन्हें 25 किमी दूर छोड़ते, पढ़ाई भी साथ चलती, और शाम तक सिर्फ एक चीज दिमाग में रहती, जीत।
Saina Nehwal Retirement: Saina Nehwal Badminton Career, India First Olympic Badminton Medallist Farewell
साइना नेहवाल और पीवी सिंधू - फोटो : ANI
जब परिवार टूट गया, पर बेटी नहीं टूटी
कोचिंग और उपकरणों का खर्च बहुत ज्यादा था। परिवार परेशान था, लेकिन हार नहीं मानी। फिर एक दिन बदलाव आया, साइना राष्ट्रीय जूनियर टूर्नामेंट्स जीतने लगीं, स्पॉन्सर्स मिलने लगे, भारत को पहली बार एक ऐसी खिलाड़ी मिली जो खेल को बदलने जा रही थी। हरियाणा की इस शटलर ने अपने करियर की चमक बहुत जल्दी दिखा दी थी। साल 2008 में उन्होंने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जीती और उसी साल बीजिंग ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

सिर्फ जीत नहीं, इतिहास रचने वाली लड़की
2008 में बीजिंग ओलंपिक के दौरान वह क्वार्टरफाइनल तक पहुंचीं। वह पहली भारतीय महिला बनीं, जो वहां तक पहुंची, लेकिन यह केवल शुरुआत थी। इस दौरान उन्होंने वर्ल्ड नंबर-पांच वांग चेन को मात दी, हालांकि क्वार्टरफाइनल में इंडोनेशिया की मारिया क्रिस्टिन यूलियांटी से हार गईं।
 
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साइना नेहवाल - फोटो : Twitter

पुरस्कारों की बरसात और अंतरराष्ट्रीय पहचान

20 साल की उम्र में साइना के प्रदर्शन ने देश में जोरदार चर्चा बटोरी। इसके लिए उन्हें मिली पहचान:

  • अर्जुन अवॉर्ड (2009)

  • राजीव गांधी खेल रत्न (2010)

बीजिंग अनुभव के बाद उनके करियर ने तेजी पकड़ी और बीडब्ल्यूएफ टूर पर खिताब लगातार आने लगे।

सुपर सीरीज जीतने वाली पहली भारतीय

साल 2009 में इंडोनेशियन ओपन जीतकर साइना ऐसी पहली भारतीय बनीं जिन्होंने सुपर सीरीज खिताब जीता। इसके बाद उन्होंने-

  • इंडिया ओपन

  • सिंगापुर ओपन

  • और 2010 में फिर इंडोनेशियन ओपन

जीतकर अपनी निरंतरता साबित की। उसी साल दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने फाइनल में मैच प्वाइंट से पीछे रहते हुए दमदार वापसी कर गोल्ड जीता। यह भारत के लिए खास पल था।

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