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US vs China: वैक्यूम क्लीनर से लेकर CCTV कैमरा तक... चीन के गैजेट्स से क्यों डरा अमेरिका? समझिए पूरा मामला
Sun, 02 Aug 2026 03:33 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 02 Aug 2026 03:33 PM IST
सार
US Vs China Tech War: क्या घर साफ करने वाला रोबोट या Wi-Fi राउटर से भी आपकी निजी जानकारी को खतरा हो सकता है? अमेरिका का दावा है कि कई स्मार्ट गैजेट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। आखिर इन डिवाइस में ऐसा क्या है, जिसने अमेरिका की टेंशन बढ़ा दी है, जानिए पूरी कहानी।
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चाइनीज गैजेट्स अमेरिका के लिए बने खतरा
- फोटो : अमर उजाला
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क्या आप कभी सोच सकते हैं कि आपके घर का फर्श चमकाने वाला रोबोट वैक्यूम क्लीनर या कोने में रखा वाई-फाई राउटर (Wi-Fi router) आपकी जासूसी कर सकता है? बाहर से देखने पर यह किसी हॉलीवुड फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन तकनीकी दुनिया की सच्चाई यही है। अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी में आगे निकलने की भयंकर होड़ के बीच, अब अमेरिका की ट्रंप (Trump) सरकार ने चीनी स्मार्ट गैजेट्स पर एक के बाद एक बैन लगाने शुरू कर दिए हैं। इस बार निशाने पर सिर्फ स्मार्टफोन या टेलीकॉम नेटवर्क नहीं हैं, बल्कि वे गैजेट्स हैं जो आपके बेडरूम और ड्रॉइंग रूम तक पहुंच चुके हैं।
चाइनीज गैजेट्स पर कड़ा एक्शन
- फोटो : AI
चाइनीज गैजेट्स पर कड़ा एक्शन
- अमेरिका के संचार नियामक, फेडरल कम्यूनिकेशन कमिशन (FCC) ने हाल ही में नए सुरक्षा नियम लागू किए हैं। इन सख्त नियमों के तहत चीन सहित कुछ अन्य देशों में निर्मित आधुनिक स्मार्ट उपकरणों को अब अमेरिकी बाजार में एंट्री नहीं मिलेगी।
- इस ब्लैकलिस्ट में घर की सफाई करने वाले रोबोट वैक्यूम क्लीनर, ह्यूमनॉयड रोबोट, रोबो डॉग, स्मार्ट वाई-फाई राउटर, पावर इन्वर्टर और इंटरनेट से जुड़े कई एडवांस एआई गैजेट्स शामिल किए गए हैं। FCC का कहना है कि ये उपकरण सिर्फ मशीनें नहीं रह गए हैं, बल्कि भारी मात्रा में डेटा इकट्ठा करने वाले नेटवर्क डिवाइस हैं। अगर यह संवेदनशील डेटा किसी विदेशी सरकार (खासकर चीन) के सर्वर तक पहुंचता है, तो यह सीधे तौर पर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
ट्रेड वॉर ने लिया डेटा महायुद्ध का रूप
- फोटो : ANI
ट्रेड वॉर ने लिया डेटा महायुद्ध का रूप
- दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच चल रहा तकनीक का ये युद्ध कोई साधारण ट्रेड वॉर नहीं है। यह असल में दोनों देशों के बीच दुनिया की अगली टेक सुपरपावर बनने की होड़ है। आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का है। यह पूरी लड़ाई उस बेशकीमती डेटा की है जो हमारे स्मार्ट गैजेट्स 24 घंटे बिना थके कलेक्ट कर रहे हैं।
- तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि एआई और इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट डिवाइस जितने सुविधाजनक होते जा रहे हैं, उतनी ही तेजी से वे उपयोगकर्ताओं का डेटा भी कलेक्ट कर रहे हैं। यही कारण है कि दुनिया की बड़ी ताकतें अब केवल हार्डवेयर नहीं, बल्कि डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता को भी राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा मान रही हैं।
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CCTV कैमरा
- फोटो : AI जनरेटेड
अमेरिका को यह चिंता कब से है?
- यह मामला अचानक सामने नहीं आया है। इसकी शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, जब अमेरिका ने Huawei और ZTE पर नेटवर्क उपकरणों के जरिए जासूसी करने की आशंका जताई थी। हालांकि Huawei ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया, लेकिन इसके बावजूद कंपनी को अमेरिकी 5G नेटवर्क से लगभग बाहर कर दिया गया।
- इसके बाद Hikvision और Dahua के CCTV कैमरे, DJI के ड्रोन और TikTok पर भी डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल उठे। अब एआई तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने अमेरिका की चिंता और बढ़ा दी है।
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वैक्यूम क्लीनर
- फोटो : AI
रोबोट वैक्यूम क्लीनर कैसे बन सकता है डेटा कलेक्टर?
- अधिकांश लोगों को लगता है कि रोबोट वैक्यूम क्लीनर केवल फर्श की सफाई करता है, लेकिन आधुनिक प्रीमियम मॉडल इससे कहीं ज्यादा काम करते हैं। इनमें लगे LiDAR सेंसर पूरे घर का 3D मैप तैयार करते हैं। कई मॉडलों में कैमरा और माइक्रोफोन भी मौजूद होते हैं। ये डिवाइस लगातार Wi-Fi से इंटरनेट से जुड़े रहते हैं और मोबाइल एप के जरिए संचालित होते हैं। कई कंपनियां इनसे जुड़ा डेटा अपने क्लाउड सर्वर पर भी स्टोर करती हैं।
- कुछ मॉडलों के फ्रंट कैमरे घर के अंदर की रिकॉर्डिंग भी कर सकते हैं। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि ऐसे उपकरण उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी, घर का लेआउट और अन्य संवेदनशील डेटा एकत्र कर सकते हैं।