तेजी से आगे बढ़ती इस डिजिटल दुनिया में किसी की जासूसी करना आम बात हो गई है। इसका सबसे बड़ा कारण तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का होना और हर हाथ में स्मार्टफोन का होना है। स्मार्टफोन भले ही आपके कई काम को आसान कर देता है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि आपका फोन ही आपका सबसे बड़ा जासूस है। आप बस इतना समझ लीजिए कि यदि आपके फोन में कोई एप है तो उसका डेवलपर आप पर पूरी नजर रख सकता है। व्हाट्सएप जैसा एप भी अब सुरक्षित नहीं है, क्योंकि जब अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस का व्हाट्सएप हैक हो सकता है कि किसी भी आम आदमी का भी आसानी से हैक सकता है। अब यहां जानना जरूरी है कि आपके फोन में आखिर ये जासूसी वाले सॉफ्टवेयर पहुंचते कैसे हैं और इनसे बचने के तरीके क्या-क्या हैं?
जानकारी: हैकर कैसे हैक करते हैं आपका फोन, स्मार्टफोन में कैसे पहुंचते हैं जासूसी वाले एप
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जासूसी की दुनिया में पिगासस का बड़ा नाम है। इससे उन फोन और डिवाइस को भी हैक किया जा सकता है जिसे लेकर कंपनियां दावा करती हैं कि यह हैकप्रूफ है। पिगासस एक स्पाईवेयर है जो चुपके से किसी भी डिवाइस की जासूसी कर सकता है। पिगासस जैसे स्पाईवेयर यूजर्स की जानकारी के बिना उनके फोन में मौजूद रहते हैं और फोन में मौजूद गोपनीय जानकारी को हैकर्स तक आसानी से पहुंचाते हैं। आपके फोन में स्पाईवेयर है या नहीं इसका पता लगाना बहुत ही मुश्किल काम है। आपको बता दें कि साल 2019 में पिगासस के जरिए ही भारत समेत दुनिया के करीब 1,400 पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी हुई थी। इसके अलावा अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस का व्हाट्सएप भी इसी सॉफ्टवेयर से हैक हुआ था।
आमतौर पर किसी डिवाइस में स्पाईवेयर या मैलवेयर या जासूसी वाले सॉफ्टवेयर/एप को एक लिंक के जरिए इंस्टॉल किया जाता है। कई बार ये एप किसी थर्ड पार्टी एप के जरिए आते हैं और कई बार संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के बाद आते हैं। बता दें कि जब भी आप किसी एप को फोन में इंस्टॉल करते हैं तो वह यूजर्स से लाइसेंस देने के लिए एग्री बटन पर क्लिक करवाता है। सिर्फ एग्री पर क्लिक नहीं करने पर ये एप इंस्टॉल नहीं होते हैं। एग्री पर क्लिक करने के साथ ही इन एप को आप कैमरा, माइक्रोफोन, मैसेज जैसे कई सारे एप्स का एक्सेस दे देते हैं। इसके बाद ही इन थर्ड पार्टी एप के जरिए आपके फोन में स्पाईवेयर पहुंचते हैं। इसके अलावा स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर गेमिंग और पॉर्न साइट के जरिए आपके फोन तक पहुंचते हैं।
यदि आपका फोन बार-बार क्रैश हो रहा है या कोई एप बार-बार हैंग या क्रैश हो रहा है तो सावधान हो जाएं। इसके अलावा यदि आपके फोन में कोई ऐसा फोल्डर दिख रहा है जिसके बारे में आपको जानकारी नहीं हो तो भी आपको सावधान हो जाने की जरूरत है।
यदि आपको लगता है कि आपके फोन में कोई संदिग्ध एप है जिसे आप इंस्टॉल नहीं किया है तो सबसे पहले फोन का इंटरनेट कनेक्शन बंद करें और इसके बाद उस एप का डाटा क्लियर करने के बाद उस एप को डिलीट करें। सबसे बेहतर यह होगा कि प्रत्येक छह महीने पर फोन को पूरा फॉर्मेट कर दें। सोशल मीडिया या मैसेज में मिले किसी लॉटरी आदि के लिंक पर भी क्लिक ना करें।