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बीमारी के लक्षण जानने के लिए एआई से पूछते हैं सवाल?: सलाह पर आंख मूंदकर न करें भरोसा, वरना हो सकता है नुकसान

Fri, 30 Oct 2026 04:04 PM IST
जागृति शुक्ला टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Fri, 30 Oct 2026 04:04 PM IST
सार

एआई का इस्तेमाल हर क्षेत्र में बढ़ रहा है। फिर चाहे वह चिकित्सा हो या शिक्षा। अधिकतर लोग स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए एआई चैटबॉट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि गलत सलाह और अधूरी जानकारी की वजह से इलाज में देरी या स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने का खतरा भी हो सकता है। एक्सपर्ट्स ने एआई से मिली जानकारी की जांच करने और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेने की बात कही है। 
 

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Using AI Health Advice? Know Risks Before Trusting Chatbots
स्वास्थ्य सलाह के लिए बढ़ रहा एआई का इस्तेमाल - फोटो : एआई जनरेटेड
सिरदर्द हो, थकान हो या किसी बीमारी के लक्षण समझने हों, अब अक्सर लोग डॉक्टर के पास जाने से पहले चैटजीपीटी जैसे चैटबॉट से जानकारी ले लेते हैं। इसकी वजह ये भी है कि एआई कभी भी सवालों के जवाब दे सकता है और यूजर को आसानी से उसकी भाषा में समझा सकता है, लेकिन क्या स्वास्थ्य से जुड़े हर सवाल के लिए एआई पर भरोसा करना सही है? यूनाइटेड किंगडम में हाल ही में हुए एक सर्वे और रिसर्च में चैटबॉट की कुछ सलाह गलत या असुरक्षित पाई गई। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए एआई का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।


स्वास्थ्य संबंधी सवालों के लिए क्यों बढ़ रहा एआई का इस्तेमाल?
  • मान लीजिए, एक महिला जिसकी उम्र तकरीबन 40 साल है, उसे लगातार थकान महसूस होती है। वह व्यस्त और चुनौतीपूर्ण नौकरी में पार्ट-टाइम काम करती हैं और उनके दो बच्चे प्राइमरी स्कूल में पढ़ते हैं। उन्हें अक्सर गुस्सा आता है और लगता है कि उनकी सोचने-समझने की क्षमता पहले जैसी नहीं रही। उनकी एक दोस्त बताती है कि ये पेरिमेनोपॉज के लक्षण हो सकते हैं।
  • अब वह महिला इसके लिए डॉक्टर की अप्वाइंटमेंट लेती है, लेकिन पेरिमेनोपॉज के बारे में ज्यादा जानकारी न होने की वजह से वह पहले चैटजीपीटी से पूछती हैं कि यह क्या है और इसके इलाज के कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं।
  • यह उदाहरण बताता है कि लोग स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाने के लिए एआई चैटबॉट्स का सहारा किस तरह ले रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 30 से 55 प्रतिशत वयस्क बताते हैं कि उन्होंने अपनी सेहत से जुड़े मामलों में चैटजीपीटी या दूसरे लार्ज लैंग्वेज मॉडल का इस्तेमाल किया है। यह चलन लगातार बढ़ रहा है।
  • इतना ही नहीं, अगर आप सीधे किसी एआई चैटबॉट से सवाल नहीं पूछते, तब भी गूगल पर सर्च करने के दौरान कई बार एआई की ओर से तैयार की गई जानकारी दिखाई देती है। ऐसे में एआई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का एक आम जरिया बनता जा रहा है।
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स्वास्थ्य सलाह के लिए बढ़ रहा एआई का इस्तेमाल - फोटो : एआई जनरेटेड
लोग स्वास्थ्य के लिए एआई चैटबॉट्स का इस्तेमाल क्यों करते हैं?
  • यूनाइटेड किंगडम में हाल ही में हुए एक सर्वे में कहा गया है कि कुछ लोग केवल अपनी उत्सुकता की वजह से चैटबॉट से सवाल पूछते हैं। वहीं, हर तीन में से एक से ज्यादा लोगों ने इनका इस्तेमाल यह तय करने के लिए किया कि उन्हें डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है या नहीं।
  • इस सर्वे में करीब आधे लोगों ने चैटबॉट्स को सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं से ज्यादा सुविधाजनक बताया। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि लोगों के मन में कई सवाल रात या सुबह के समय आते हैं, जब पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं होतीं।
  • चैटबॉट का इस्तेमाल करने वाले आधे से ज्यादा लोगों को लगा कि इससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को फायदा हुआ।
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स्वास्थ्य सलाह के लिए बढ़ रहा एआई का इस्तेमाल - फोटो : एआई जनरेटेड
माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट पर हुई पांच लाख से ज्यादा बातचीत का विश्लेषण
  • 2026 में माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट पर हुई पांच लाख से ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी बातचीत का विश्लेषण किया गया। इसमें सामने आया कि हर पांच में से एक बातचीत लोगों के पर्सनल सिमटम्स और इलाज से जुड़ी थी। इनमें कई सवाल यूजर ने अपने बजाय किसी दूसरे व्यक्ति, जैसे बच्चे या परिवार के सदस्य के स्वास्थ्य के बारे में पूछे थे।
  • ऑस्ट्रेलिया में किए गए एक राष्ट्रीय सर्वे के नतीजे भी इसी तरह के रहे। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए चैटजीपीट का इस्तेमाल करने वाले लोगों में से एक-तिहाई से ज्यादा ने ऐसा अपने लक्षणों का मतलब समझने के लिए किया। 
  • वहीं, आधे लोगों ने किसी खास स्वास्थ्य समस्या के बारे में जानकारी जुटाने के लिए इसका इस्तेमाल किया।

क्या डॉक्टर की बजाय एआई से पूछना ज्यादा आसान?
  • सर्वे में यह भी कहा गया है कि कई बार स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को लेकर कई ऐसे मेडिकल के टर्म होते हैं, जो काफी कठिन होते हैं। डॉक्टर के पास इतना समय नहीं होता कि वह आपको आसानी से विस्तार से समझा सके। इसलिए कई मरीजों को लगता है कि उनके पास अपने सभी सवाल पूछने के लिए पर्याप्त समय नहीं है। कुछ लोग डॉक्टर से सवाल पूछने में झिझक भी महसूस करते हैं।
  • इसके उलट, एआई चैटबॉट आसानी से यूजर की भाषा में ही उसी बात को समझा देता है।  यहां उसे इस बात की झिझक भी नहीं होती कि कोई उसके सवालों को लेकर क्या सोचेगा।
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स्वास्थ्य सलाह के लिए बढ़ रहा एआई का इस्तेमाल - फोटो : एआई जनरेटेड
एआई से स्वास्थ्य सलाह लेने के क्या हैं खतरे?
  • रिपोर्ट के अनुसार, एआई चैटबॉट्स की सबसे बड़ी चिंता तब सामने आती है, जब किसी व्यक्ति को तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत हो और वह डॉक्टर के पास जाने के बजाय चैटबॉट की सलाह पर भरोसा कर ले। अगर इस दौरान उसे गलत या असुरक्षित जानकारी मिलती है, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
  • यूके के सर्वे में हर पांच में से एक व्यक्ति ने माना कि चैटबॉट से सलाह लेने के बाद उसने डॉक्टर के पास न जाने का फैसला लिया। फिलहाल स्वास्थ्य संबंधी फैसलों में एआई चैटबॉट्स के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों पर वास्तविक दुनिया का डेटा सीमित है। हालांकि, कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें लोगों को नुकसान भी पहुंचा है।

लोगों को क्या नुकसान हुआ?
  • रिपोर्ट 31 वर्षीय बोवेन वांग की मौत की खबर का हवाला देती है। महिला की मौत फरवरी में हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, चैटजीपीटी ने उन्हें मिर्गी की दवा की खुराक कम करने के बारे में गलत सलाह दी थी।
  • यह मामला दिखाता है कि दवाओं की खुराक बदलने जैसे गंभीर फैसलों के लिए एआई चैटबॉट पर निर्भर रहना कितना जोखिम भरा हो सकता है।


रिसर्च में भी सामने आईं एआई की गलतियां
  • इतना ही नहीं एआई चैटबॉट्स की स्वास्थ्य संबंधी सलाह कितनी सटीक है, इसे समझने के लिए कुछ सिमुलेशन आधारित अध्ययन भी किए गए हैं। जिनमें चिंता जनक नतीजे सामने आए हैं।
  • एक अध्ययन में प्राइमरी केयर से जुड़े मरीजों के 222 सवालों पर एआई के जवाबों की जांच की गई। इसमें इस्तेमाल किए गए चैटबॉट के आधार पर 5 से 13 प्रतिशत जवाब असुरक्षित पाए गए। इनसे मरीज को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता था।
  • एक दूसरे अध्ययन में एआई चैटबॉट्स की सटीकता को दो अलग-अलग स्थितियों में परखा गया। जब रिसर्च टीम ने काल्पनिक क्लिनिकल स्थितियों से जुड़े सवाल पूछे, तो चैटबॉट 94.9 प्रतिशत मामलों में सही थे, लेकिन जब अध्ययन में शामिल लोगों ने उन्हीं स्थितियों और चैटबॉट्स का इस्तेमाल करके जानकारी खोजी, तो जवाबों की सटीकता घटकर 34.5 प्रतिशत रह गई।
  • इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि किसी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या को समझने के लिए एआई चैटबॉट का इस्तेमाल इंटरनेट सर्च से कम प्रभावी हो सकता है। वहीं, डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए या नहीं, यह तय करने के मामले में इसकी सटीकता इंटरनेट सर्च के बराबर थी, जो केवल 43 प्रतिशत थी।

एआई से सवाल पूछने का तरीका भी है खास
  • अध्ययन में सामने आया है कि एआई चैटबॉट से गलत जवाब मिलने की एक वजह यह भी हो सकती है कि यूजर अपने सवाल में पर्याप्त जानकारी नहीं देता। सटीक जवाब पाने के लिए सवाल में जरूरी बात और लक्षणों की जानकारी देना अहम होता है।
  • हालांकि, बिना किसी ट्रेनिंग के सही प्रॉम्प्ट लिखना आसान नहीं है। इसमें सवाल को स्पष्ट और विशिष्ट बनाने के साथ-साथ निजी जानकारी की सुरक्षा का भी ध्यान रखना पड़ता है। यानी यूजर को यह समझना जरूरी है कि जवाब बेहतर बनाने के लिए कौन-सी जानकारी साझा करनी चाहिए और कौन-सी नहीं।
  • एक दूसरी समस्या यह है कि लोग एआई से मिली जानकारी की दोबारा जांच नहीं करते। कई बार चैटबॉट के जवाब में दिए गए स्रोत गलत या सवाल से असंबंधित हो सकते हैं। गूगन एआई समरी में दिए गए लिंक पर भी केवल एक प्रतिशत यूजर क्लिक करते हैं। इससे यह समझना मुश्किल हो जाता है कि लोग एआई से मिली जानकारी को कितनी बार जांचते हैं।

मरीज डॉक्टर को क्यों नहीं बताते कि वे एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं?
  • वहीं, एक स्थिति में मरीज और डॉक्टर मिलकर एआई चैटबॉट से मिली जानकारी पर चर्चा कर सकते हैं। इससे डॉक्टर गलत जानकारी को सुधार सकते हैं और मरीज को सही फैसला लेने में मदद मिल सकती है। लेकिन हकीकत में कई मरीज अपने डॉक्टर को यह नहीं बताते कि वे स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। 
  • पोलैंड में हुए एक सर्वे में 83 प्रतिशत मरीजों ने डॉक्टर को इसके बारे में नहीं बताया। वहीं, अमेरिका में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत था। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह डर है कि कहीं डॉक्टर नकारात्मक प्रतिक्रिया न दें या उन्हें ऐसा न लगे कि मरीज उनकी विशेषज्ञता को कम महत्व दे रहा है।
एआई के इस्तेमाल पर डॉक्टरों की क्या राय है?
  • जहां एक ओर खतरनाक नतीजे रहें, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के एक सर्वे में कुछ सकारात्मक नतीजे भी सामने आए। एक सर्वे में शामिल 1,692 डॉक्टरों में से 70 प्रतिशत का मानना था कि सामान्य स्वास्थ्य जानकारी जुटाने या फैसले लेने के लिए मरीजों का एआई चैटबॉट इस्तेमाल करना सकारात्मक है या इससे उनके काम पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।
  • हालांकि, मेडिकल टेस्ट के नतीजों और रिपोर्ट को समझने के लिए एआई के इस्तेमाल पर डॉक्टरों की राय अलग थी। करीब 50 प्रतिशत डॉक्टरों ने कहा कि वे बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि उनके मरीज मेडिकल टेस्ट के नतीजों या रिपोर्ट को समझने के लिए AI का इस्तेमाल करें।
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स्वास्थ्य सलाह के लिए बढ़ रहा एआई का इस्तेमाल - फोटो : एआई जनरेटेड
एआई से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लेते समय बेहतर नतीजे कैसे पाएं?
  • अगर मरीज डॉक्टर को बता दें कि वे एआई चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो डॉक्टर उन्हें मिली जानकारी की जांच कर सकते हैं। गलत सलाह को सुधारने और सही विकल्प समझाने में भी मदद मिल सकती है।
  • हालांकि, डॉक्टर्स के सामने भी कुछ चुनौतियां हैं। उनका कहना है कि उन्हें एआई के इस्तेमाल को लेकर खास ट्रेनिंग नहीं मिली है। इसके अलावा, उनके पास इतना समय या इस काम के लिए अलग से भुगतान की व्यवस्था नहीं है कि वे मरीजों को एआई के इस्तेमाल के बारे में विस्तार से समझा सकें।
  • कुछ संसाधन जरूर उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों को चैटबॉट के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए ज्यादा मदद की जरूरत है। साथ ही, डॉक्टरों को भी यह मार्गदर्शन मिलना जरूरी है कि मरीजों को सही जानकारी और मदद के लिए कहां भेजा जाए।
एआई  चैटबॉट के सुरक्षित इस्तेमाल के पांच तरीके
डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और एआई स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने 'स्मार्ट गाइड' तैयार की है। इसमें स्वास्थ्य संबंधी सवालों के लिए एआई चैटबॉट का ज्यादा सुरक्षित इस्तेमाल करने के पांच मुख्य तरीके बताए गए हैं।
  • सवाल पूछने से पहले रुकें: स्वास्थ्य संबंधी सवाल पूछने से पहले सोचें कि आपको किस तरह की जानकारी चाहिए और क्या एआई से पूछना सही रहेगा।
  • सवाल स्पष्ट रखें: चैटबॉट को अपनी समस्या और सवाल साफ शब्दों में बताएं, ताकि जवाब में जरूरी संदर्भ शामिल हो सके।
  • निजी जानकारी का ध्यान रखें: खुद से पूछें कि आप चैटबॉट के साथ कौन-सी जानकारी साझा कर रहे हैं। संवेदनशील और निजी जानकारी देने से पहले सावधानी बरतें।
  • तथ्यों की जांच करें: एआई के जवाब को अंतिम सच न मानें। उसमें बताए गए तथ्यों की दोबारा जांच करें।
  • जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से बात करें: अगर समस्या गंभीर है या मेडिकल मदद की जरूरत है, तो AI के बजाय किसी डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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