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Amazon-Flipkart सेल में रहें सावधान: फेंके गए डिलीवरी बॉक्स से चोरी हो सकता है डेटा, जानिए बचने के तरीके
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Wed, 06 May 2026 05:05 PM IST
सार
Amazon-Flipkart Delivery Box Scam: अमेजन-फ्लिपकार्ट सेल का सीजन आते ही हर घर में पार्सल आने शुरू हो जाते हैं। हम खुशी-खुशी सामान निकालते हैं और खाली डिब्बे को कूड़े में फेंक देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका फेंका हुआ यह मामूली सा डिब्बा आपका बैंक अकाउंट खाली कर सकता है? आखिर कैसे एक खाली बॉक्स आपको साइबर ठगी का शिकार बना रहा है? आइए जानते हैं इस खौफनाक 'डिलीवरी बॉक्स स्कैम' का पूरा सच।
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डिलीवरी बॉक्स स्कैम
- फोटो : एआई जनरेटेड
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सेल का मौसम आते ही हमारे घरों में डिलीवरी बॉक्सेस का अंबार लग जाता है। हम अनबॉक्सिंग के उत्साह में एक बहुत छोटी, लेकिन बेहद अहम बात को नजरअंदाज कर देते हैं, जो हमारे पर्सनल जानकारी को स्कैमर्स तक पहुंचा देती है। यह खतरा उसी गत्ते के डिब्बे से जुड़ा है, जिससे हम सामान निकालने के बाद बेपरवाही से फेंक देते हैं।
क्या है यह 'डिलीवरी बॉक्स स्कैम'?
शायद आपको पहली बार में यह सुनने में अजीब लगे, लेकिन यह सच है। यह स्कैम पूरी तरह से उस जानकारी पर टिका है जिसे हम अनजाने में कूड़ेदान के हवाले कर देते हैं। जब भी आपके पास कोई पार्सल आता है, तो उसके ऊपर एक शिपिंग लेबल चिपका होता है। यह लेबल सिर्फ कूरियर वाले के लिए नहीं होता, बल्कि इसमें आपका नाम, फोन नंबर, घर का पूरा पता या आपके ऑर्डर की डिटेल्स भी छपी होती हैं।
जब आप बिना इस लेबल को फाड़े या मिटाए बॉक्स को बाहर फेंक देते हैं, तो आपकी यह निजी जानकारी खुलेआम जालसाजों के हाथ लग जाती है। आसान शब्दों में कहें तो आपका फेंका हुआ डिब्बा स्कैमर्स के लिए वेरीफाइड डेटा का खजाना बन जाता है।
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डिलीवरी पैकेज (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
स्कैमर्स कैसे बिछाते हैं अपना जाल?
इस ठगी का तरीका बेहद आसान और असरदार भी है। जब आप बॉक्स फेंक देते हैं, तो ये जालसाज उन डिब्बों को इकट्ठा करके लेबल से आपकी सारी जानकारी निकाल लेते हैं। इसके बाद शुरू होता है असली खेल। वे आपको कॉल करते हैं और खुद को अमेजन, फ्लिपकार्ट या किसी अन्य ई-कॉमर्स कंपनी का कस्टमर सपोर्ट या फीडबैक एग्जीक्यूटिव बताते हैं। चूंकि उनके पास पहले से ही आपका सही नाम, पता और नंबर होता है, इसलिए आपको उनकी बातों पर आसानी से भरोसा हो जाता है।
बातचीत के दौरान वे आपको किसी फीडबैक सर्वे के बदले एक्स्ट्रा डिस्काउंट या कैशबैक का लालच देते हैं। इसके लिए वे आपके फोन पर एक लिंक भेजते हैं। जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करते हैं, आपके फोन में कोई खतरनाक मालवेयर या वायरस इंस्टॉल हो जाता है या फिर आप किसी फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं। यहीं से आपकी बैंकिंग डिटेल्स, OTP और लॉगिन आईडी जैसी संवेदनशील जानकारी चुरा ली जाती है।
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सेल के दौरान बढ़ जाते हैं ऐसे मामले
- फोटो : AI
सेल के दौरान क्यों बढ़ जाते हैं ऐसे मामले?
सेल के दिनों में ऑनलाइन ऑर्डर्स की संख्या अचानक बढ़ जाती है। ज्यादा पार्सल का सीधा सा मतलब है कूड़े में ज्यादा डिब्बे, और स्कैमर्स के लिए उतना ही ज्यादा पर्सनल डाटा। इसके अलावा, सेल के दौरान ग्राहकों को भी कंपनियों की तरफ से ऑफर्स और फीडबैक कॉल्स आने की उम्मीद रहती है। इसी मनोवैज्ञानिक बात का फायदा उठाकर ठग आसानी से लोगों का विश्वास जीत लेते हैं और उन्हें अपने जाल में फंसा लेते हैं।
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खुद को सुरक्षित कैसे रखें?
- फोटो : pixabay
खुद को सुरक्षित कैसे रखें?
इस धोखाधड़ी से बचने के कुछ बेहद आसान लेकिन जरूरी उपाय हैं:
लेबल को हमेशा नष्ट करें: खाली डिब्बे को ज्यों का त्यों कभी न फेंकें। फेंकने से पहले हमेशा उस पर लगे लेबल को फाड़ दें, या फिर किसी डार्क मार्कर पेन से अपनी डिटेल्स (नाम, पता, नंबर) को पूरी तरह से छिपा दें।
अनजान लिंक पर क्लिक न करें: अगर आपको मैसेज या व्हाट्सएप पर कोई कैशबैक या ऑफर का लिंक आता है, तो उस पर भूलकर भी क्लिक न करें। कोई भी असली ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म आपको रिवॉर्ड के बदले कोई अनजान ऐप इंस्टॉल करने या बैंकिंग डिटेल्स शेयर करने को नहीं कहता।
फर्जी कॉल्स से सावधान रहें: अगर कोई अनजान शख्स आपको कॉल करके आपके सही नाम और पते के साथ आपसे बात करे और आकर्षक डिस्काउंट का लालच दे, तो भी उस पर तुरंत आंख मूंदकर भरोसा न करें।
आने वाले त्योहारी सीजन में सिर्फ थोड़ी सी सावधानी और एक छोटी सी अच्छी आदत अपनाकर, आप अपने डाटा और अपनी गाढ़ी कमाई, दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं।
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