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अमेरिकी कारों से हटेगी चाइनीज टेक्नोलॉजी: सरकार को जासूसी का डर, ऑटो कंपनियों के लिए तय हुई डेडलाइन
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 09 Feb 2026 06:12 PM IST
सार
USA Bans Chinese Tech In Cars: अमेरिकी सरकार कारों में इस्तेमाल होने वाली चीनी तकनीक से पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी में है। नए नियमों के मुताबिक सरकार ने 17 मार्च तक कंपनियों को चीनी टेक्नोलॉजी हटाने की डेडलाइन दी है। यह कदम डेटा सुरक्षा को लेकर उठाया जा रहा है, जिससे कनेक्टेड वाहनों, ऑटो कंपनियों और सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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यूएस को सता रहा जासूसी का डर
- फोटो : Hyundai
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आज की आधुनिक कारें सिर्फ एक वाहन नहीं रहीं, बल्कि इंटरनेट से जुड़े कई फीचर्स ने इन्हें चलता-फिरता स्मार्ट डिवाइस बना दिया है। कैमरा, माइक्रोफोन, जीपीएस और क्लाउड से जुड़ी कई सुविधाएं ड्राइविंग को आसान बना रही हैं। लेकिन अब यही टेक्नोलॉजी अमेरिका के लिए चिंता का कारण बन गई है।
अमेरिकी सरकार मार्च 17, 2026 से कारों में इस्तेमाल होने वाली चीनी ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी पर पूरी तरह बैन लगाने पर विचार कर रही है। सरकार को डर है कि कनेक्टेड वाहनों के जरिए अमेरिकी नागरिकों का संवेदनशील डेटा विदेशी ताकतों तक पहुंच सकता है।
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चीनी सॉफ्टेयर का होता है इस्तेमाल
- फोटो : Hyundai
क्यों लग रहा है चीनी टेक्नोलॉजी पर बैन?
अमेरिका का मानना है कि कारों में लगे कैमरा, माइक्रोफोन और GPS सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर जासूसी की जा सकती है। इसी वजह से सरकार चाहती है कि इंटरनेट से जुड़ी कार प्रणालियों में किसी भी तरह का चीनी सॉफ्टवेयर इस्तेमाल न हो।
इस प्रस्ताव के तहत कार कंपनियों को सरकार को यह साबित करना होगा कि उनकी गाड़ियों में इस्तेमाल किया गया सॉफ्टवेयर चीन में विकसित नहीं हुआ है और न ही किसी चीनी कंपनी से जुड़ा है। हार्डवेयर से जुड़े नियम 2030 से लागू होने की संभावना है।
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कंपनियों पर बढ़ा दबाव
- फोटो : Ford China
डेडलाइन से पहले कंपनियों पर दबाव
अमेरिका की कई ऑटो कंपनियां पहले से ही चीनी सॉफ्टवेयर हटाने में जुट गई हैं। अगर किसी सॉफ्टवेयर का संबंध चीन से है, तो उसे किसी गैर-चीनी कंपनी को ट्रांसफर करना होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नियम सिर्फ पैसेंजर कारों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि भविष्य में कमर्शियल व्हीकल्स और ड्रोन जैसे उत्पादों पर भी लागू किए जा सकते हैं।
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चीन से दूरी बढ़ा रहे कई देश
- फोटो : Freepik
वैश्विक स्तर पर बढ़ रही चिंता
कोरोना महामारी के बाद से अमेरिका ने चीनी सप्लायर्स पर निर्भरता कम करनी शुरू कर दी थी। टेस्ला जैसी कंपनियां भी अमेरिका में बनी गाड़ियों के लिए चीनी पुर्जों से दूरी बना रही हैं। डेटा प्राइवेसी को लेकर सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि कई देश सतर्क हो गए हैं। भारत ने भी पिछले कुछ वर्षों में कई चीनी एप्स और उत्पादों पर डेटा सुरक्षा के चलते बैन लगाया है।
हालांकि, चीन अब भी रेयर अर्थ मटीरियल और टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति में है। वहीं, चीनी सरकार लगातार इन आरोपों को खारिज करती रही है कि उसकी तकनीक के जरिए डेटा की जासूसी की जाती है।
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