Safer Internet Day 2026: रील और शॉर्ट्स के जाल में मासूम, बच्चों को फोन देने से पहले जान लें कुछ जरूरी बातें
History of Safer Internet Day: क्या इंटरनेट आपके बच्चे के लिए वाकई सुरक्षित है? ऑनलाइन पढ़ाई और सोशल मीडिया के इस दौर में आपत्तिजनक कॉन्टेंट का खतरा हर जगह है। ऐसे में Safer Internet Day के मौके पर आइए इस लेख में जानें उन आसान सेटिंग्स और एप्स के बारे में, जो आपके बच्चे के इंटरनेट को पूरी तरह सुरक्षित बना सकते हैं...
अक्सर माता-पिता बच्चों को स्मार्टफोन इस्तेमाल करने से सख्ती से रोकते हैं या "फोन मत चलाओ" कहकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं। लेकिन सेफर इंटरनेट डे का संदेश इससे बिल्कुल अलग है। तकनीक से भागना इसका समाधान नहीं है, बल्कि उसे समझकर सुरक्षित बनाना ही एकमात्र रास्ता है। बच्चों पर पाबंदी लगाने के बजाय उनके लिए डिजिटल सीमाएं तय करना, स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करना और सही सेटिंग्स का चुनाव करना कहीं ज्यादा व्यवहारिक और असरदार साबित होता है।
पाबंदी नहीं, तकनीक को समझने की है जरूरत
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कहां-कहां छिपा है डिजिटल खतरा?
पहले माना जाता था कि अश्लील कॉन्टेंट सिर्फ कुछ खास वेबसाइटों पर होता है, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। अब अडल्ट और अश्लील कॉन्टेंट उन प्लेटफॉर्म्स में सेंध लगा चुका है जिन्हें हम सुरक्षित मानते हैं। जैसे:
- सोशल मीडिया एल्गोरिद्म: रील्स और शॉर्ट्स का इंगेजमेंट मॉडल बच्चों को अनजाने में भड़काऊ विजुअल्स और अश्लील इशारों वाले वीडियो की ओर खींचता है।
- गेमिंग और इन-गेम चैट: ऑनलाइन गेम्स के भीतर चैट फीचर्स और थर्ड-पार्टी लिंक के जरिए अश्लील भाषा का खतरा बना रहता है।
- एआई का नया खतरा: बीते दिनों एआई चैटबॉट ग्रोक के आपत्तिजनक तस्वीरें बनाने के विवाद ने साफ कर दिया है कि बिना फिल्टर वाले एआई टूल्स बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
ऐसे में सेफर इंटरनेट डे इसी खतरे को पहचानने और रोकने की याद दिलाता है।
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कौन-से एप कर सकते हैं मदद?
- गूगल फैमिली लिंक (Google Family Link): 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ये एप बेस्ट माने जाते हैं। इसके जरिए आप दूर बैठे तय कर सकते हैं कि बच्चा कौन सा एप डाउनलोड करेगा और रात में फोन कब तक चला सकेगा। एक बार समय पूरा हो गया, तो फोन खुद से लॉक हो जाएगा।
- वॉचर - पैरेंटल कंट्रोल नियंत्रण (Watcher - Parental Control): यह एप केवल एंड्राइड के लिए है। इसके जरिए आप बच्चे की स्क्रीन लाइव देख सकते हैं और गैलरी तक एक्सेस कर सकते हैं।
- फ्लैशगेट किड्स(FlashGet Kids): इससे आप बच्चे के फोन का कैमरा और माइक रिमोटली ऑन करके देख सकते हैं कि उसके आसपास क्या चल रहा है और वह क्या बातें कर रहा है।
- स्क्रिनट्रिम( ScrinTrim): छोटे बच्चों के लिए एक मनोवैज्ञानिक ट्रिक जैसा है। ये एप ऐप तय समय बाद फोन की ब्राइटनेस जीरो कर देता है, जिससे बच्चे को लगता है कि फोन खराब हो गया है।
- स्क्रीन टाइम (एपल) और डिजिटल वेलबीइंग (एंड्राइड): ये इन-बिल्ट फीचर्स हैं जो एप-वाइज टाइम लिमिट सेट करने में मदद करते हैं, जिससे स्क्रीन की लत पर काबू पाया जा सकता है।
इन जगहों पर तुरंत करें बदलाव
1. यूट्यूब (YouTube): रिस्ट्रिक्टेड मोड और किड्स एप
इसके लिए यूट्यूब के सेटिंग्स के जनरल में जाकर रिस्ट्रिक्टेड मोड ऑन करें। छोटे बच्चों के लिए केवल यूट्यूब किड्स ही इस्तेमाल करने दें जहां कॉन्टेंट पहले से क्यूरेटिड होता है।
2. इंस्टाग्राम Instagram: टीन सेफ्टी और लेस कॉन्टेंट
बच्चे के अकाउंट को प्राइवेट करें। फिर सेटिंग्स में जाकर कॉन्टेंट प्रिफरेंस में जाएं। यहां सेंसटिव कॉन्टेंट को लेस पर सेट करें। इसके हिडन वर्ड फीचर से गालियों को भी ब्लॉक किया जा सकता है।
3.एआई टूल्स पर लगाम
चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे टूल्स को सीधे इस्तेमाल करने देने के बजाय, पैरेंटल कंट्रोल के जरिए अपने फैमिली अकाउंट से जोड़ें। इससे आप मॉनिटर कर पाएंगे कि बच्चा एआई से क्या सवाल पूछ रहा है।