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Census 2027: जनगणना में भी नहीं हो पाती है इन लोगों की गिनती, वजह जानकर होंगे हैरान

यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रुति गौड़ Updated Thu, 19 Feb 2026 11:59 AM IST
सार

These People Will Not Be Counted In Census: 1 अप्रैल से जनगणना के पहले चरण का आरंभ हो जाएगा। ऐसे में हम आपको यहां बताएंगे कि इस जनगणना के दौरान किन लोगों की गिनती नहीं हो पाती है।

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Census 2027 these people will not counted in Indian census
जनगणना में भी नहीं हो पाती है इन लोगों की गिनती - फोटो : Adobe stock
These People Will Not Be Counted In Census: 1 अप्रैल से भारत में जनगणना का पहला चरण शुरू हो रहा है। जनगणना का उद्देश्य देश की आबादी, उनके सामाजिक और आर्थिक हालात का सही आंकड़ा जुटाना होता है, लेकिन कुछ समुदाय और लोग ऐसे हैं जो इस गिनती से हमेशा बाहर रह जाते हैं।


परिणामस्वरूप, इनके लिए सरकारी योजनाओं और लाभों का सही आंकड़ा नहीं बन पाता। इस बार की जनगणना में भी यही चुनौती बनी हुई है। ऐसे में सभी के लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि कौन हैं ये अदृश्य लोग और क्यों उनकी गिनती मुश्किल होती है। 

 
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जनगणना में भी नहीं हो पाती है इन लोगों की गिनती - फोटो : Adobe stock
 1. भटकते कामगार
 
  • ये श्रमिक अक्सर रोज़गार की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं। 
  • इसमें सड़क पर काम करने वाले मजदूर, निर्माण श्रमिक, ठेले वाले, छोटे व्यवसाय के कामगार शामिल हैं। 
  • उनके पास स्थायी पता नहीं होता और अक्सर वे सरकारी दस्तावेज जैसे राशन कार्ड या आधार में दर्ज नहीं होते। 
  • इससे जनगणना अधिकारियों के लिए उनका रिकॉर्ड रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। 
  • अनुमान है कि भारत में भटकते कामगारों की संख्या लाखों में है, जिन्हें नियमित जनगणना में पूरी तरह कवर करना मुश्किल होता है।

 
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जनगणना में भी नहीं हो पाती है इन लोगों की गिनती - फोटो : Adobe stock
2. आदिवासी समुदाय
 
  • जंगलों और दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समूहों तक पहुंचना कठिन होता है। 
  • कई आदिवासी इलाकों में सड़क या डिजिटल कनेक्टिविटी नहीं होती।
  •  इनके पास अक्सर स्थायी पता, जन्म प्रमाण पत्र या सरकारी पहचान नहीं होती, इससे उनका डेटा अधूरा रहता है। 
  • उदाहरण के लिए, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा के आदिवासी क्षेत्रों में अभी भी जनगणना कवरेज में चुनौतियां बनी रहती हैं।

 
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जनगणना में भी नहीं हो पाती है इन लोगों की गिनती - फोटो : Adobe stock
3. झोपड़पट्टी या अस्थायी आश्रयों में रहने वाले लोग
 
  • शहरी क्षेत्रों में झोपड़पट्टी और अस्थायी आश्रयों में रहने वाले लोग भी अक्सर जनगणना से बाहर रह जाते हैं।
  •  ये लोग सरकारी योजनाओं में भी कम दिखाई देते हैं। 
  • इनके पास स्थायी पता और पहचान पत्र नहीं होने की वजह से डेटा संग्रह कठिन हो जाता है। 
  • दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में यह समस्या सबसे अधिक देखने को मिलती है।

 
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जनगणना में भी नहीं हो पाती है इन लोगों की गिनती - फोटो : Freepik
4. अवैध रूप से बसे लोग
 
  • कुछ प्रवासी या अप्रवासी लोग बिना रजिस्ट्रेशन या पते के शहरों में रहते हैं। 
  • इनमें सीमा पार से आए लोग या अस्थायी वर्कप्लेस पर रहने वाले लोग शामिल हैं। 
  • उनका डेटा अक्सर सरकारी रिकॉर्ड में नहीं होता और जनगणना अधिकारी उन्हें पहचान नहीं पाते।

 
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