Self-Acquired Property Rules: आज के समय में बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या बेटियों का पिता की संपत्ति में अधिकार होता है या नहीं। देखा जाए तो कानूनी रूप से पिता की संपत्ति में बेटियों का भी उतना ही हक होता है जितना कि उनके भाइयों का। हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के लागू होने के बाद भारतीय कानून में क्रांतिकारी बदलाव आया है, जिसने बेटियों को बेटों के बराबर लाकर खड़ा कर दिया है। अब बेटी चाहे शादीशुदा हो या नहीं, उसे पैतृक संपत्ति में जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त है।
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Know Your Rights: किन स्थितियों में बेटियों को नहीं मिल सकता है पिता की संपत्ति में हिस्सा? जानें नियम
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shikhar Baranawal
Updated Fri, 24 Apr 2026 01:05 PM IST
सार
Hindu Succession Act 2005: आज के समय में अधिकतर लोग ये जानते हैं कि पिता के संपत्ति में बेटियों का बेटों के बराबर का अधिकार होता है। मगर ये बात बहुत कम लोगों को मालूम है कि कुछ मामलों में बेटियों को पिता के संपत्ति में हिस्सा नहीं मिल सकता है। आइए समझते हैं।
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बेटियों का पिता के संपत्ति में अधिकार
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बेटियों का पिता के संपत्ति में अधिकार
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स्व-अर्जित संपत्ति और वसीयत का नियम
- अगर पिता ने अपनी मेहनत की कमाई से संपत्ति खरीदी है, तो वह अपनी मर्जी से उसे किसी को भी दे सकते हैं।
- अगर पिता ने अपनी स्व-अर्जित संपत्ति की वसीयत सिर्फ बेटों या किसी तीसरे व्यक्ति के नाम कर दी है, तो बेटी उस पर दावा नहीं कर सकती।
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बेटियों का पिता के संपत्ति में अधिकार
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पैतृक संपत्ति और कानूनी अधिकार
- दादा या परदादा से चली आ रही पैतृक संपत्ति में बेटी को जन्म से ही हक मिलता है, इसे पिता वसीयत के जरिए भी नहीं छीन सकते।
- अगर पैतृक संपत्ति का कानूनी रूप से बंटवारा 20 दिसंबर 2004 से पहले हो चुका है, तो उस संपत्ति पर नए कानून के तहत दोबारा दावा नहीं किया जा सकता।
- 2005 के संशोधन के बाद बेटियां 'कॉपरसेनर' (सह-दायक) बन गई हैं, जिससे उनका हक बेटों के समान मजबूत हो गया है।
बेटियों का पिता के संपत्ति में अधिकार
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धर्म परिवर्तन
- अगर कोई बेटी हिंदू धर्म छोड़कर कोई अन्य धर्म अपना लेती है, तो कुछ स्थितियों में पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार नियमों में जटिलताएं आ सकती हैं।
- अगर बेटी ने अपनी मर्जी से लिखित में अपना हिस्सा छोड़ दिया है या 'रिलिनक्विसमेंट डीड' पर हस्ताक्षर किए हैं, तो वह बाद में दावा नहीं कर सकती।
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आम इंसान के लिए जरूरी सलाह
- किसी भी संपत्ति विवाद से बचने के लिए हमेशा राजस्व रिकॉर्ड और वसीयत की स्थिति की जांच किसी वकील से कराएं।
- महिलाओं को अपने कानूनी अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए, क्योंकि कानून अब लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करता है।
- परिवार में संपत्ति का बंटवारा हमेशा आपसी सहमति और कानूनी कागजी कार्रवाई के साथ करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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